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वायु रक्षा को नई धार: 114 राफेल लड़ाकू विमानों के खरीद प्रस्ताव को डीपीबी की मंजूरी, सेना ने स्वदेशी अग्निशमन रोबोट का करार किया

रक्षा सूत्रों के अनुसार, यदि सभी स्तरों पर मंजूरी मिल जाती है तो भारत और फ्रांस के बीच इस बहुप्रतीक्षित सौदे पर अगले महीने तक अंतिम समझौते पर हस्ताक्षर किए जा सकते हैं। यह सौदा अंतर-सरकारी समझौते (गवर्नमेंट-टू-गवर्नमेंट, जी-टू-जी) के तहत होगा।

वायु रक्षा को नई धार: 114 राफेल लड़ाकू विमानों के खरीद प्रस्ताव को डीपीबी की मंजूरी, सेना ने स्वदेशी अग्निशमन रोबोट का करार किया
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नई दिल्ली। देश की वायु रक्षा क्षमताओं को और अधिक मजबूत करने की दिशा में भारत ने एक बड़ा और निर्णायक कदम बढ़ाया है। रक्षा खरीद बोर्ड (डीपीबी) ने फ्रांसीसी एयरोस्पेस कंपनी डसाल्ट एविएशन से 114 राफेल लड़ाकू विमानों की खरीद के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है। यह प्रस्ताव अब रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह की अध्यक्षता वाली रक्षा अधिग्रहण परिषद (डीएसी) के सामने रखा जाएगा। इसके बाद प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की अध्यक्षता वाली सुरक्षा मामलों की कैबिनेट समिति (सीसीएस) से अंतिम स्वीकृति मिलने की संभावना है।

अगले महीने तक हो सकता है अंतिम समझौता

रक्षा सूत्रों के अनुसार, यदि सभी स्तरों पर मंजूरी मिल जाती है तो भारत और फ्रांस के बीच इस बहुप्रतीक्षित सौदे पर अगले महीने तक अंतिम समझौते पर हस्ताक्षर किए जा सकते हैं। यह सौदा अंतर-सरकारी समझौते (गवर्नमेंट-टू-गवर्नमेंट, जी-टू-जी) के तहत होगा, जिससे बिचौलियों की भूमिका पूरी तरह समाप्त रहेगी और खरीद प्रक्रिया पारदर्शी तथा समयबद्ध रहेगी।

भारतीय वायु सेना ने पिछले वर्ष रक्षा मंत्रालय को औपचारिक रूप से 114 राफेल लड़ाकू विमानों की आवश्यकता का प्रस्ताव सौंपा था। वायु सेना का तर्क है कि मौजूदा स्क्वाड्रनों की संख्या घटने और भविष्य की सुरक्षा चुनौतियों को देखते हुए अत्याधुनिक मल्टी-रोल फाइटर एयरक्राफ्ट की तत्काल जरूरत है। राफेल को इस आवश्यकता के अनुरूप सबसे उपयुक्त प्लेटफॉर्म माना गया है।

राफेल सौदे का रणनीतिक महत्व
राफेल लड़ाकू विमान अपनी लंबी मारक क्षमता, अत्याधुनिक एवियोनिक्स, एयर-टू-एयर और एयर-टू-ग्राउंड हथियार प्रणालियों तथा हर मौसम में संचालन की क्षमता के लिए जाना जाता है। 114 नए विमानों के शामिल होने से भारतीय वायु सेना की स्ट्राइक क्षमता में उल्लेखनीय वृद्धि होगी और वह एक साथ दो मोर्चों पर संभावित चुनौतियों से निपटने में अधिक सक्षम होगी।

विशेषज्ञों का मानना है कि यह सौदा न केवल सैन्य दृष्टि से अहम है, बल्कि भारत–फ्रांस रक्षा सहयोग को भी नई ऊंचाई देगा। फ्रांस पहले से ही भारत का एक भरोसेमंद रणनीतिक साझेदार रहा है, चाहे वह लड़ाकू विमान हों, पनडुब्बियां हों या अंतरिक्ष और रक्षा प्रौद्योगिकी में सहयोग।

नौसेना के लिए पहले ही हो चुका है बड़ा सौदा
उल्लेखनीय है कि अप्रैल 2025 में भारत ने नौसेना के लिए 63 हजार करोड़ रुपये की लागत से 26 राफेल–मरीन लड़ाकू विमानों की खरीद का समझौता किया था। इस सौदे में 22 सिंगल-सीटर और चार ट्विन-सीटर ट्रेनर विमान शामिल हैं। इन विमानों की आपूर्ति 2031 तक पूरी होने की संभावना है और इन्हें स्वदेशी विमानवाहक पोत आईएनएस विक्रांत पर तैनात किया जाएगा। इससे भारतीय नौसेना की समुद्री स्ट्राइक क्षमता और वायु रक्षा को बड़ी मजबूती मिलेगी।

आत्मनिर्भर भारत की दिशा में सेना का कदम
इसी बीच, थल सेना ने भी आत्मनिर्भर भारत और विकसित भारत के लक्ष्य को आगे बढ़ाते हुए एक महत्वपूर्ण पहल की है। भारतीय सेना ने ‘इनोवेशन फॉर डिफेंस एक्सीलेंस’ (आईडेक्स) ढांचे के तहत स्वदेशी अग्निशमन रोबोट की खरीद के लिए एक समझौते पर हस्ताक्षर किए हैं। यह करार भारतीय सेना के कैपेबिलिटी डेवलपमेंट निदेशालय में संपन्न हुआ और इसमें निजी क्षेत्र की भारतीय कंपनी एम्प्रेसा प्रा. लि. शामिल है।

सहयोगी सेवा से विकसित उत्पाद की पहली सीधी खरीद
यह अग्निशमन रोबोट मूल रूप से भारतीय नौसेना के लिए आईडेक्स ढांचे के तहत विकसित किया गया था। हालांकि, सिंगल स्टेज कंपोजिट ट्रायल के प्रावधान का उपयोग करते हुए भारतीय सेना ने पहली बार किसी सहयोगी सेवा के लिए विकसित उत्पाद की सीधी खरीद की है। इसे रक्षा क्षेत्र में अंतर-सेवा सहयोग और संसाधनों के बेहतर उपयोग की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

जवानों की सुरक्षा में होगी बढ़ोतरी
अग्निशमन रोबोट एक मजबूत और बहुउपयोगी मानव रहित ग्राउंड व्हीकल है, जिसे आग, विस्फोट या अन्य खतरनाक परिस्थितियों में सुरक्षित दूरी से संचालित किया जा सकता है। यह रोबोट आग बुझाने, धुएं से भरे क्षेत्रों में निगरानी और आपात स्थितियों में त्वरित प्रतिक्रिया देने में सक्षम है। इसके उपयोग से अग्निशमन और आपदा प्रबंधन कार्यों के दौरान जवानों की जान को होने वाले जोखिम में उल्लेखनीय कमी आएगी।

रक्षा आधुनिकीकरण की दोहरी तस्वीर
एक ओर जहां 114 राफेल लड़ाकू विमानों की प्रस्तावित खरीद भारत की वायु शक्ति को नई धार देने का संकेत है, वहीं दूसरी ओर स्वदेशी अग्निशमन रोबोट का करार रक्षा क्षेत्र में नवाचार और आत्मनिर्भरता को बढ़ावा देता है। दोनों ही फैसले यह दर्शाते हैं कि भारत न केवल अत्याधुनिक विदेशी तकनीक को रणनीतिक रूप से अपना रहा है, बल्कि घरेलू रक्षा उद्योग और स्टार्टअप्स को भी मजबूत करने पर समान रूप से ध्यान दे रहा है। रक्षा विशेषज्ञों के अनुसार, आने वाले वर्षों में ऐसे फैसले भारत की सैन्य क्षमता, रणनीतिक स्वायत्तता और वैश्विक रक्षा मंच पर उसकी भूमिका को और सुदृढ़ करेंगे।


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