बंगाल चुनाव नतीजों पर संजय राउत बोले, राहुल गांधी की बात न मानकर ममता ने की गलती
राउत ने कहा कि भले ही पश्चिम बंगाल और अन्य राज्यों में विपक्षी दलों को झटका लगा हो, लेकिन INDIA गठबंधन का भविष्य अभी भी मजबूत है। उन्होंने विश्वास जताया कि विपक्षी दल एकजुट होकर आगे बेहतर प्रदर्शन कर सकते हैं।

मुंबई : पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के नतीजों के बाद राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है। शिवसेना (यूबीटी) के सांसद संजय राउत ने तृणमूल कांग्रेस की हार पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने कांग्रेस नेता राहुल गांधी की सलाह को नजरअंदाज करके बड़ी गलती की। उनके मुताबिक, यदि उस सलाह पर अमल किया जाता, तो चुनावी नतीजे अलग हो सकते थे।
‘राहुल गांधी की चेतावनी को नजरअंदाज किया गया’
मीडिया से बातचीत में राउत ने कहा कि राहुल गांधी ने पहले ही चुनावों को लेकर कुछ गंभीर मुद्दे उठाए थे, जिन्हें पर्याप्त महत्व नहीं दिया गया। उन्होंने दावा किया कि अगर उन बातों को ध्यान में रखा जाता, तो पश्चिम बंगाल में तृणमूल कांग्रेस की स्थिति बेहतर हो सकती थी। राउत ने राहुल गांधी को “दूरदर्शी नेता” बताते हुए कहा कि उन्होंने जो आशंकाएं जताई थीं, वे अब सच साबित होती नजर आ रही हैं।
भाजपा की जीत पर उठाए सवाल
संजय राउत ने पश्चिम बंगाल में भाजपा की जीत को लेकर भी सवाल खड़े किए। उन्होंने कहा कि यह केवल लोकतांत्रिक जीत नहीं है, बल्कि इसके पीछे कुछ प्रक्रियात्मक मुद्दे भी हो सकते हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) के नाम पर लाखों मतदाताओं के नाम मतदाता सूची से हटा दिए गए, जिसका असर चुनाव परिणामों पर पड़ा। हालांकि, इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।
तृणमूल के 15 साल के शासन का अंत
गौरतलब है कि पश्चिम बंगाल में भाजपा ने इस बार निर्णायक बहुमत हासिल करते हुए पहली बार सरकार बनाने की स्थिति बनाई है। इसके साथ ही तृणमूल कांग्रेस के लगभग 15 साल लंबे शासन का अंत हो गया है। यह बदलाव राज्य की राजनीति में एक बड़े परिवर्तन के रूप में देखा जा रहा है, जिसने राष्ट्रीय स्तर पर भी चर्चा को जन्म दिया है।
विपक्षी गठबंधन के भविष्य पर भरोसा
राउत ने कहा कि भले ही पश्चिम बंगाल और अन्य राज्यों में विपक्षी दलों को झटका लगा हो, लेकिन INDIA गठबंधन का भविष्य अभी भी मजबूत है। उन्होंने विश्वास जताया कि विपक्षी दल एकजुट होकर आगे बेहतर प्रदर्शन कर सकते हैं। उन्होंने यह भी कहा कि चुनावी हार किसी भी गठबंधन के अंत का संकेत नहीं होती, बल्कि यह आत्ममंथन और सुधार का अवसर प्रदान करती है।
तमिलनाडु का भी किया जिक्र
अपने बयान में राउत ने तमिलनाडु का भी उल्लेख किया और वहां के राजनीतिक घटनाक्रम को भी विपक्ष के लिए चुनौती बताया। उन्होंने कहा कि अलग-अलग राज्यों में अलग परिस्थितियां होती हैं, लेकिन विपक्ष को एकजुट होकर रणनीति बनानी चाहिए।
इतिहास से दिया उदाहरण
संजय राउत ने अपने बयान में ऐतिहासिक संदर्भ भी दिया। उन्होंने कहा कि एक समय ऐसा था जब इंदिरा गांधी ने देश के अधिकांश राज्यों में जीत हासिल की थी, लेकिन बाद में उन्हें भी हार का सामना करना पड़ा। राउत के अनुसार, यह राजनीति का स्वभाव है कि कोई भी पार्टी हमेशा शिखर पर नहीं रहती। उन्होंने कहा कि भाजपा इस समय अपने चरम पर है, लेकिन भविष्य में उसे भी चुनौतियों का सामना करना पड़ सकता है।


