एसआईआर रद्द हो, 13 करोड़ मतदाताओं को सूची से हटाया गया है : नसीम सिद्दीकी
एनसीपी-एसपी के राष्ट्रीय प्रवक्ता नसीम सिद्दीकी ने एसआईआर को रद्द करने की मांग की है। उन्होंने कहा कि दुनिया के सभी देश मतदाताओं की संख्या बढ़ाने की कोशिश करते हैं, लेकिन भारत में मतदाता सूची को कम किया जा रहा है। उन्हें फिर से नामांकित करने की जरूरत है।

मुंबई। एनसीपी-एसपी के राष्ट्रीय प्रवक्ता नसीम सिद्दीकी ने एसआईआर को रद्द करने की मांग की है। उन्होंने कहा कि दुनिया के सभी देश मतदाताओं की संख्या बढ़ाने की कोशिश करते हैं, लेकिन भारत में मतदाता सूची को कम किया जा रहा है। उन्हें फिर से नामांकित करने की जरूरत है।
सिद्दीकी ने कहा, "एसआईआर रद्द होना चाहिए। दुनिया के तमाम देश मतदाताओं की संख्या बढ़ाने के लिए कवायद करते हैं, मतदाता को नामांकित करने की कोशिश करते हैं, लेकिन भारत एक ऐसा देश है जो अपने मतदाताओं की सूची को कम करने की बात कर रहा है। 140 करोड़ के इस देश में 13 करोड़ लोगों के नाम मतदाता सूची से कम कर दिए गए हैं। देश में सभी लोग मतदाता नहीं हैं, लगभग 50-60 फीसदी लोग ही मतदाता होते हैं, बाकी कम उम्र के बच्चे होते हैं। उनमें भी जो भारत के मतदाता हैं, उनमें से 13 करोड़ लोगों को कम कर दिया गया है, कम से कम 20 से 25 फीसदी मतदाताओं को हटा दिया गया है, उन्हें फिर से नामांकित करने की आवश्यकता है।
एक अन्य सवाल का जवाब देते हुए उन्होंने कहा कि पश्चिम बंगाल में भी भाजपा की सरकार है और केंद्र में भी भाजपा की सरकार है। सैंया भये कोतवाल तो डर काहे का, जैसा चाहें, वैसा कर लें।
उन्होंने आगे कहा कि किसी भी नेक काम को करने के लिए किसी मुहूर्त की आवश्यकता नहीं होती है। अगर विशेष सत्र बुलाने की आवश्यकता है तो सरकार को बुलाना चाहिए। महिला आरक्षण पहले ही पास हो चुका है। इसमें भ्रम नहीं फैलाना चाहिए। सभी दलों ने महिला आरक्षण को एकमत से पारित किया है। उस महिला आरक्षण में जो ओबीसी महिलाएं हैं और ओबीसी महिलाओं में जो मुस्लिम महिलाएं हैं, उनके लिए आरक्षण दिए जाने की आवश्यकता है।
उन्होंने कहा कि यह मांग बार-बार देश में उठती है, वरना इस संसद में फिर वही होगा कि जिनकी आबादी 7 प्रतिशत है, उनकी महिलाएं 70 प्रतिशत होंगी और भारत के ग्रामीण क्षेत्र की महिलाएं संसद तक नहीं पहुंच पाएंगी। इसलिए पिछड़ी महिलाओं, गरीब महिलाओं और अल्पसंख्यक महिलाओं को इसमें आरक्षण देने की आवश्यकता है। परिसीमन बिल की कोई आवश्यकता नहीं है। इसके बहाने कहीं पर निगाहें, कहीं पर निशाना है। दक्षिण भारत की राजनीति को पूरी तरह से देश की संसद में समाप्त करने की जो योजना है, वह परिसीमन के जरिए उत्तर भारत में सारी सीटें लाने की है, दक्षिण भारत की सीटें कम करने की है, इसलिए इस परिसीमन बिल का विरोध हो रहा है।
एक अन्य सवाल का जवाब देते हुए उन्होंने कहा कि यह दमनकारी सरकार है, संविधान को न मानने वाली सरकार है, लोकतंत्र का गला घोंटने वाली सरकार है। इसलिए इस लड़ाई में जो भी आएगा, उसे सिर पर कफन बांधकर आना चाहिए, यह समझ लेना चाहिए। अगर उन्हें गांधी बनना है, नेल्सन मंडेला बनना है, तो बड़ा त्याग करने की आवश्यकता है। ये गिरफ्तारियां होती रहेंगी, जमानत मिलती रहेगी, और आंदोलन जारी रहेगा।
रिजीम चेंज वाली टिप्पणी को लेकर उन्होंने कहा कि रिजीम चेंज होना ही चाहिए। जब कोई सरकार दमनकारी हो जाए, जब कोई सरकार हिटलरशाही हो जाए, जब कोई हिटलर के रोल में आ जाए, तो ऐसी सरकार को बदलना चाहिए। भारत में लोकतंत्र है। यहां कोई तख्तापलट नहीं हो रहा है, यह कोई पाकिस्तान नहीं है कि सेना तख्तापलट कर देगी।


