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राहुल गांधी बोले- सालों से गालियां सुन रहा हूं, लेकिन ‘सुधरने’ वाला नहीं; नेहा राठौर संग महिला सम्मान पर चर्चा

बातचीत के दौरान नेहा राठौर ने महिलाओं के साथ होने वाले कथित अनादर और ऑनलाइन ट्रोलिंग का मुद्दा उठाया। उन्होंने कहा कि अगर महिलाएं सत्ता में बैठे लोगों से सवाल नहीं कर सकतीं, तो लोकतंत्र में उन्हें किस तरह का सम्मान मिलेगा।

राहुल गांधी बोले- सालों से गालियां सुन रहा हूं, लेकिन ‘सुधरने’ वाला नहीं; नेहा राठौर संग महिला सम्मान पर चर्चा
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पुणे : कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने शनिवार को कहा कि सरकार की नीतियों और फैसलों पर सवाल उठाने के कारण उन्होंने लंबे समय तक आलोचना और अपमान का सामना किया है, लेकिन वह अपने सवाल पूछने के तरीके से पीछे हटने वाले नहीं हैं। उन्होंने कहा कि उन्हें भी वर्षों से गालियां सुननी पड़ी हैं, लेकिन इसके बावजूद वह ‘सुधरने’ वाले नहीं हैं। राहुल गांधी ने यह बात कांग्रेस के यूथ आउटरीच कार्यक्रम ‘छात्रों की गूंज’ के दौरान भोजपुरी गायिका और सामाजिक मुद्दों पर व्यंग्यात्मक गीतों के लिए पहचानी जाने वाली नेहा राठौर के साथ बातचीत में कही। कार्यक्रम में महिलाओं की राजनीतिक भागीदारी, अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और सोशल मीडिया ट्रोलिंग जैसे मुद्दों पर चर्चा हुई। कार्यक्रम में करीब 15 हजार महिलाओं के शामिल होने का दावा किया गया।

नेहा राठौर ने उठाया महिला सम्मान का सवाल

बातचीत के दौरान नेहा राठौर ने महिलाओं के साथ होने वाले कथित अनादर और ऑनलाइन ट्रोलिंग का मुद्दा उठाया। उन्होंने कहा कि अगर महिलाएं सत्ता में बैठे लोगों से सवाल नहीं कर सकतीं, तो लोकतंत्र में उन्हें किस तरह का सम्मान मिलेगा। राठौर ने कहा कि वह सरकार से उन मुद्दों पर सवाल उठाती हैं, जिन्हें सरकार पसंद नहीं करती। इसके बदले उन्हें आलोचना, गालियों और एफआईआर का सामना करना पड़ता है। उन्होंने सवाल किया कि अगर लोकतंत्र में नागरिक अपने प्रधानमंत्री से सवाल नहीं कर सकते तो फिर लोकतांत्रिक व्यवस्था में सम्मान और जवाबदेही का क्या अर्थ रह जाता है।

व्यंग्यात्मक गीतों को लेकर विवाद का जिक्र

नेहा राठौर ने बातचीत के दौरान अपने पुराने अनुभवों का भी जिक्र किया। उन्होंने बताया कि उत्तर प्रदेश में एक व्यंग्यात्मक गीत प्रस्तुत करने के बाद पुलिस की टीमें उनके पीछे भेजे जाने की बात सामने आई थी। उन्होंने यह भी कहा कि उनके क्षेत्र में लोगों ने उनके परिवार से उनके चरित्र और व्यक्तिगत जीवन को लेकर सवाल किए। राठौर के मुताबिक, सार्वजनिक मुद्दों पर बोलने वाली महिलाओं को सिर्फ राजनीतिक आलोचना का सामना नहीं करना पड़ता, बल्कि उनके चरित्र को निशाना बनाया जाता है। उन्होंने कहा कि पुरुषों को भी ट्रोल किया जाता है, लेकिन महिलाओं के खिलाफ ट्रोलिंग अक्सर निजी और चरित्र आधारित हमलों में बदल जाती है।

‘महिलाओं की ट्रोलिंग अलग तरीके की होती है’

भोजपुरी गायिका ने कहा कि एक महिला के तौर पर समाज में महत्वपूर्ण मुद्दों पर खुलकर बोलना आसान नहीं है। उनके मुताबिक, महिलाओं को राजनीतिक या सामाजिक विचार व्यक्त करने पर उनकी बात के बजाय उनके चरित्र पर सवालों का सामना करना पड़ता है। राठौर ने कहा कि वह खुद को थोड़ा साहसी और जिद्दी मानती हैं और आलोचना से डरने वाली नहीं हैं। उन्होंने कहा कि पिछले कई वर्षों से उन्हें लगातार गालियां दी जा रही हैं, लेकिन इससे उन्होंने अपने विचार व्यक्त करना बंद नहीं किया।

‘मैं सुधरने वाली नहीं हूं’

राठौर ने बातचीत के दौरान कहा कि आलोचना और दबाव के बावजूद वह अपने सवाल पूछती रहेंगी। उन्होंने कहा कि उन्हें लंबे समय से निशाना बनाया जा रहा है, लेकिन वह अपने रुख में बदलाव करने वाली नहीं हैं। इसी बात को आगे बढ़ाते हुए राहुल गांधी ने कहा कि वह भी वर्षों से गालियां सुन रहे हैं, लेकिन वह भी ‘सुधरने’ वाले नहीं हैं। उनके इस बयान को कार्यक्रम में मौजूद लोगों ने राजनीतिक दबाव के बावजूद सवाल उठाने के उनके रुख से जोड़कर देखा।

लोकतंत्र में सवाल पूछने के अधिकार पर जोर

कार्यक्रम के दौरान बातचीत का मुख्य केंद्र यह रहा कि लोकतंत्र में नागरिकों और विशेष रूप से महिलाओं को सत्ता से सवाल पूछने का अधिकार होना चाहिए। राठौर ने अपने अनुभवों के जरिए यह सवाल उठाया कि आलोचना का जवाब राजनीतिक बहस से दिया जाना चाहिए या व्यक्तिगत हमलों के जरिए। राहुल गांधी ने भी उनके अनुभवों के संदर्भ में अपनी राजनीतिक यात्रा के दौरान हुई आलोचना का जिक्र किया। उन्होंने संकेत दिया कि सार्वजनिक जीवन में विरोध और आलोचना के बावजूद वह सरकार से जुड़े मुद्दों पर सवाल उठाते रहेंगे।

महिला भागीदारी को लेकर कांग्रेस का संदेश

‘छात्रों की गूंज’ कार्यक्रम को कांग्रेस के युवा और महिला आउटरीच अभियान के हिस्से के तौर पर देखा जा रहा है। करीब 15 हजार महिलाओं की मौजूदगी वाले इस कार्यक्रम में राजनीतिक संवाद के साथ महिलाओं के सामाजिक अनुभवों और सार्वजनिक जीवन में उनकी भूमिका पर चर्चा हुई। राहुल गांधी और नेहा राठौर की बातचीत ने महिला सम्मान, अभिव्यक्ति की आजादी और सत्ता से सवाल करने के अधिकार को राजनीतिक चर्चा के केंद्र में ला दिया। कांग्रेस की ओर से इसे महिलाओं और युवाओं की आवाज को मंच देने की कोशिश के रूप में पेश किया गया।


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