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'सोनिया गांधी की देशभक्ति पर सवाल उठाना गलत', नसीम सिद्दीकी बोले- बोतल वही, बस सामान नया है

एनसीपी (एसपी) के प्रवक्ता नसीम सिद्दीकी ने सोमवार को भारतीय जनता पार्टी पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि सोनिया गांधी की देशभक्ति पर सवाल उठाना एक "पॉलिटिकल स्टंट" है

सोनिया गांधी की देशभक्ति पर सवाल उठाना गलत, नसीम सिद्दीकी बोले- बोतल वही, बस सामान नया है
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मुंबई। एनसीपी (एसपी) के प्रवक्ता नसीम सिद्दीकी ने सोमवार को भारतीय जनता पार्टी पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि सोनिया गांधी की देशभक्ति पर सवाल उठाना एक "पॉलिटिकल स्टंट" है। सिद्दीकी ने कहा कि इटली से होने के बावजूद सोनिया गांधी ने भारतीय परंपराओं को पूरी तरह अपनाया, इसलिए उनके खिलाफ बयान देना गलत है।

वंदे मातरम विवाद पर उन्होंने कहा कि संविधान में इसे अनिवार्य नहीं किया गया है और भाजपा इसे स्कूल से लेकर संसद तक थोपने की कोशिश कर रही है। साथ ही भाजपा की 65 सदस्यीय नई टीम में 50-51 नए चेहरों को शामिल करने पर तंज कसते हुए सिद्दीकी ने कहा कि बोतल वही है, बस सामान बदला गया है। उनके मुताबिक इससे भाजपा के संगठन पर कोई बड़ा प्रभाव नहीं पड़ेगा।

एनसीपी (एसपी) के प्रवक्ता नसीम सिद्दीकी ने कहा, "सोनिया गांधी की देशभक्ति पर किसी भी तरह से सवाल नहीं उठाया जा सकता। इटली से होने के बावजूद जब वह भारत आईं और राजीव गांधी से शादी की तो उन्होंने भारतीय परंपराओं को पूरी तरह अपनाया। वह इस देश में भारतीय कल्चर के हिसाब से रह रही हैं। सोनिया गांधी के खिलाफ जो किया जा रहा है, वह एक पॉलिटिकल स्टंट है।"

भाजपा पर निशाना साधते हुए उन्होंने कहा कि यह भाजपा की सोची-समझी रणनीति है। चाहे कुमारस्वामी हों या कोई और जो ऐसे बयान दे रहा है, उन्हें यह नहीं भूलना चाहिए कि उनके पिता भी कांग्रेस के समर्थन से ही इस देश के प्राइम मिनिस्टर बने थे। सोनिया गांधी को टारगेट करना सही नहीं है।

उन्होंने कहा, "‘वंदे मातरम’ पर विवाद शुरू से ही है, जब से भारत आजाद हुआ है। कुछ लोग इसे पढ़ना पसंद करते हैं, जबकि कुछ नहीं, इसलिए यह बहस का मुद्दा रहा है। संविधान में कहीं भी यह नहीं लिखा है कि ‘वंदे मातरम’ पढ़ना जरूरी किया जाना चाहिए।"

नसीम सिद्दीकी ने कहा कि यह भाजपा सरकार का एजेंडा है, जो इसे स्कूलों से लेकर विश्वविद्यालयों और संसद से लेकर लेजिस्लेटिव असेंबली तक जरूरी बनाने की कोशिश कर रही है।

भाजपा की टीम में हुए फेरबदल को लेकर नसीम सिद्दीकी ने कहा, "65 लोगों की नई टीम में उन्होंने 50-51 नए चेहरे लाने की कोशिश की है, लेकिन मुझे नहीं लगता कि इससे कोई खास फर्क पड़ेगा। बोतल वही है, बस उसके अंदर का सामान बदला जा रहा है, इसलिए मुझे नहीं लगता कि इससे भाजपा के संगठन पर कोई बड़ा प्रभाव पड़ेगा।"

उन्होंने कहा कि यह उनकी एक्सरसाइज है, नए लोगों को आकर्षित करने की उनकी कोशिश है, क्योंकि सीजेपी आंदोलन की वजह से देश के युवा और नौजवान उनसे दूर हो गए हैं, इसलिए 65 में से 51-52 नए चेहरे लाकर वे एक तरह से उन्हें आकर्षित करने की कोशिश कर रहे हैं, लेकिन मुझे नहीं लगता कि भाजपा इसमें कामयाब होगी।


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