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दिशा सालियान को नहीं जानता, 500 करोड़ के मानहानि नोटिस का कोई आधार नहीं: आदित्य ठाकरे

शिवसेना (यूबीटी) नेता आदित्य ठाकरे ने दिवंगत दिशा सालियान के पिता सतीश सालियान द्वारा भेजे गए 500 करोड़ रुपए के मानहानि नोटिस को खारिज कर दिया। आदित्य ठाकरे ने इसे 'तुच्छ' बताया और दिशा सालियान को जानने से भी इनकार किया।

दिशा सालियान को नहीं जानता, 500 करोड़ के मानहानि नोटिस का कोई आधार नहीं: आदित्य ठाकरे
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मुंबई। शिवसेना (यूबीटी) नेता आदित्य ठाकरे ने बुधवार को दिवंगत दिशा सालियान के पिता सतीश सालियान द्वारा भेजे गए 500 करोड़ रुपए के मानहानि नोटिस को खारिज कर दिया। आदित्य ठाकरे ने इसे 'तुच्छ' बताया और दिशा सालियान को जानने से भी इनकार किया।

सुप्रीम कोर्ट में अपने वकील अंशुमन सिन्हा के माध्यम से जवाब देते हुए ठाकरे ने मानहानि के सभी आरोपों का स्पष्ट खंडन किया, माफी मांगने या अपने सोशल मीडिया पोस्ट वापस लेने से इनकार कर दिया और अपने इस रुख को दोहराया कि वे 'दिशा सालियान से कभी नहीं मिले और न ही उन्हें जानते हैं।'

यह विवाद सतीश सालियान के वकील एडवोकेट अनुष्का सोनावाने द्वारा 17 सितंबर, 2026 को जारी किए गए नोटिस से शुरू हुआ। सालियान ने आरोप लगाया कि ठाकरे द्वारा 16 सितंबर, 2026 को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर प्रकाशित अंग्रेजी और मराठी पोस्ट में मानहानिकारक बातें शामिल थीं और उन्होंने सार्वजनिक माफी के साथ 500 करोड़ रुपए के हर्जाने की मांग की।

ठाकरे ने अपने जवाब में स्पष्ट किया कि उनकी पोस्ट में सतीश सालियान का नाम या पहचान कभी नहीं ली गई। उनकी कानूनी टीम ने तर्क दिया कि एक लंबे राजनीतिक और मीडिया अभियान के बारे में सामान्य टिप्पणियों में किसी पार्टी का नाम डालकर कोई कानूनी आधार नहीं बनाया जा सकता। 500 करोड़ रुपए की मांग को 'झूठा, कानूनी रूप से गलत और मनमाना, बिना किसी गणनात्मक आधार या पहचाने गए वित्तीय नुकसान के' बताया गया।

जवाब में बताया गया कि सालियान के मौजूदा दावे उनकी बेटी की मृत्यु के तुरंत बाद दिए गए सार्वजनिक बयानों और कानूनी दस्तावेजों से मेल नहीं खाते। इसमें मालवानी पुलिस स्टेशन में दर्ज एफआईआर संख्या 118/2022 और दिंडोशी सत्र न्यायालय के 16 मार्च, 2022 के आदेश का हवाला दिया गया, जिसमें परिवार ने बेटी की आत्महत्या का कारण शराब के नशे में आर्थिक संकट बताया था, साथ ही राजनीतिक दलों पर अफवाहें फैलाकर परिवार को बदनाम करने का आरोप लगाया था।

ठाकरे ने कहा कि बॉम्बे उच्च न्यायालय ने केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) जांच का निर्देश तो दिया, लेकिन उनके या किसी अन्य व्यक्ति के खिलाफ कोई प्रतिकूल निष्कर्ष दर्ज नहीं किया और यह अनिवार्य किया कि जब तक सबूतों से पर्याप्त आधार न मिलें, किसी भी व्यक्ति को आरोपी नहीं माना जाएगा।

आरोपों का खंडन करने के लिए सोशल मीडिया का उपयोग करने के अपने अधिकार का बचाव करते हुए ठाकरे ने पोस्ट हटाने, माफी मांगने, बयान वापस लेने या मुआवजा देने की मांगों को अस्वीकार कर दिया। उन्होंने मीडिया ट्रायल या राजनीतिक हस्तक्षेप के बिना एक स्वतंत्र और निष्पक्ष सीबीआई जांच की अपनी मांग को दोहराया।


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