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ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग तेज, साम्या कोर्डे बोलीं- शांतिपूर्ण आंदोलन को दबाने की कोशिश

मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर जारी विरोध प्रदर्शनों के बीच प्रोग्रेसिव स्टूडेंट्स यूनियन के अध्यक्ष साम्या कोर्डे ने पुलिस कार्रवाई और प्रदर्शन की अनुमति नहीं मिलने पर सवाल उठाए हैं

ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग तेज, साम्या कोर्डे बोलीं- शांतिपूर्ण आंदोलन को दबाने की कोशिश
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मुंबई। मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर जारी विरोध प्रदर्शनों के बीच प्रोग्रेसिव स्टूडेंट्स यूनियन के अध्यक्ष साम्या कोर्डे ने पुलिस कार्रवाई और प्रदर्शन की अनुमति नहीं मिलने पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार पुलिस के माध्यम से आंदोलनों को दबाने की कोशिश कर रही है। कोर्डे ने कहा कि पुलिस कार्रवाई और हिरासत की घटनाओं के कारण कुछ लोग कार्टर रोड पर प्रस्तावित प्रदर्शन में शामिल होने से डर रहे थे। उन्होंने सौरभ दास और आशुतोष रंका को हिरासत में रखे जाने का भी जिक्र किया।

साम्या कोर्डे ने कहा कि मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार की जवाबदेही तय करने और उनके इस्तीफे की मांग को लेकर देशभर में आंदोलन हो रहे हैं। सरकार इन प्रदर्शनों को खत्म करने के लिए पुलिस का सहारा ले रही है। दिल्ली में हुई कार्रवाई का जिक्र करते हुए उन्होंने अभिजीत दीपके की गिरफ्तारी, आशुतोष रांका और सौरभ दास को न्यायिक हिरासत में रखे जाने की बात कही। कोर्डे ने कहा कि मुंबई पुलिस भी प्रदर्शनकारियों के प्रति उसी तरह का व्यवहार कर रही है, जैसा दिल्ली में देखने को मिला। प्रदर्शन की अनुमति नहीं दी जा रही है और कई बार प्रदर्शन में शामिल होने वाले लोगों के घरों तक पुलिस पहुंच रही है।

उन्होंने दावा किया कि जुलाई से अब तक पुलिस तीन बार उनके घर आ चुकी है। कोर्डे ने कहा कि मेरे घर में पांच लोग रहते हैं, लेकिन पुलिस 20 से 25 लोगों और चार गाड़ियों के साथ पहुंचती है। पुलिस सुबह नौ बजे से रात आठ बजे तक घर के आसपास मौजूद रहती है, जबकि प्रदर्शन का समय शाम चार बजे होता है। उन्होंने सवाल उठाया कि शांतिपूर्ण तरीके से अपनी बात रखना और विरोध दर्ज कराना यदि नागरिकों का अधिकार है, तो इस तरह की कार्रवाई क्यों की जा रही है। ऐसी परिस्थितियां लोकतंत्र में नागरिकों के अधिकारों को लेकर सवाल खड़े करती हैं।

प्रस्तावित प्रदर्शन के दौरान सुरक्षा व्यवस्था कड़ी की गई और कम लोगों के पहुंचने की चर्चा पर कोर्डे ने कहा कि अब यह आंदोलन आम नागरिकों की भागीदारी वाला बन चुका है। पिछले दिन पुलिस की बैरिकेडिंग और अनुमति नहीं मिलने की जानकारी के बावजूद सैकड़ों नागरिक प्रदर्शन स्थल पर पहुंचे। प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लिए जाने और कानूनी कार्रवाई की आशंका के बावजूद लोग वहां पहुंचे। कुछ लोगों को रात करीब पौने दस बजे छोड़ा गया, जबकि कुछ महिलाओं को शाम छह बजे के बाद तक हिरासत में रखा गया।

कोर्डे ने कहा कि प्रदर्शन में ऐसे लोग भी शामिल हुए, जिनके नाम एसआईआर प्रक्रिया के तहत मतदाता सूची से काटे जाने की बात कही गई है या जिन्हें इस संबंध में नोटिस मिले हैं। उन्होंने इसे इस बात का संकेत बताया कि लोग अब डर के बावजूद अपनी चिंताएं सामने रख रहे हैं। उन्होंने कहा कि आंदोलन में शामिल लोगों की संख्या के आधार पर उसके प्रभाव का आकलन नहीं किया जाना चाहिए। उन्होंने आजाद मैदान में हुए प्रदर्शन का उल्लेख करते हुए आरोप लगाया कि पुलिस प्रदर्शनकारियों को ऐसी जगहों पर प्रदर्शन की अनुमति देती है, जहां आम लोगों की पहुंच अपेक्षाकृत कठिन होती है।

उन्होंने आरोप लगाया कि प्रदर्शनकारियों को अलग-अलग जगहों पर भेजकर आंदोलन को कमजोर करने की कोशिश की जा रही है। पुलिस की कार्रवाई और प्रदर्शनकारियों को खींचने के दौरान होने वाली घटनाओं से भी तनाव पैदा होता है। उन्होंने आगे कहा कि जब तक ज्ञानेश कुमार इस्तीफा नहीं देते, तब तक वे और उनके साथी विरोध प्रदर्शनों में भाग लेते रहेंगे। उन्होंने पुलिस से कानून-व्यवस्था संबंधी चिंताओं को ध्यान में रखते हुए प्रदर्शन की अनुमति देने और शांतिपूर्ण आंदोलन सुनिश्चित करने की मांग की।


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