जनगणना की प्रक्रिया अभी शुरू नहीं, समय रहते सुधार करें सरकार: कांग्रेस विधायक हरीश चौधरी
कांग्रेस विधायक हरीश चौधरी ने जाति जनगणना, जेनजी से संवाद के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की टिप्पणी और इंदौर में राहुल गांधी के कार्यक्रम को लेकर प्रतिक्रिया दी

मुंबई। कांग्रेस विधायक हरीश चौधरी ने जाति जनगणना, जेनजी से संवाद के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की टिप्पणी और इंदौर में राहुल गांधी के कार्यक्रम को लेकर प्रतिक्रिया दी। उन्होंने जाति जनगणना की मौजूदा प्रक्रिया में बदलाव की मांग करते हुए कहा कि केवल नारों में जातिगत जनगणना की बात करने से काम नहीं चलेगा, बल्कि जमीन पर भी इसकी सही व्यवस्था होनी चाहिए।
हरीश चौधरी ने कहा कि जनगणना में पूछे जा रहे सवालों में जाति संबंधी जानकारी दर्ज करने की व्यवस्था को लेकर स्पष्टता और सुधार की जरूरत है। जब अनुसूचित जाति (एससी) और अनुसूचित जनजाति (एसटी) के लिए वर्गीकरण की व्यवस्था है तो अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) और अलग-अलग जातियों की पहचान दर्ज करने की व्यवस्था उसी तरह क्यों नहीं होनी चाहिए। जनगणना में प्रत्येक जाति का सही तरीके से उल्लेख और आंकड़ों का संकलन जरूरी है। कांग्रेस की मांग है कि तेलंगाना और बिहार में हुई जातिगत जनगणना से मिले अनुभवों के आधार पर देश में भी ऐसी व्यवस्था तैयार की जाए। जनगणना की प्रक्रिया अभी सभी राज्यों में शुरू नहीं हुई है, इसलिए समय रहते व्यवस्था में सुधार किया जा सकता है। उन्होंने सरकार से प्रक्रिया को दुरुस्त कर देश के साथ न्याय करने की मांग की।
वडोदरा में जेन के साथ संवाद के दौरान प्रधानमंत्री मोदी की 'नाराज फूफा' वाली टिप्पणी पर चौधरी ने आपत्ति जताई। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री पद संवैधानिक और गरिमापूर्ण पद है और इस पद पर रहते हुए शब्दों का चयन भी उसी अनुरूप होना चाहिए। देश के छात्र अपनी समस्याओं और अपेक्षाओं को लेकर प्रधानमंत्री से संवाद चाहते हैं, लेकिन उनकी बात सुनने के बजाय हल्की टिप्पणियां की जा रही हैं। प्रधानमंत्री मोदी को छात्रों की वास्तविक चिंताओं पर ध्यान देना चाहिए।
इंदौर में राहुल गांधी के छात्रों के लिए प्रस्तावित 'छात्रों की गूंज' कार्यक्रम को कथित तौर पर अनुमति नहीं मिलने पर कांग्रेस विधायक ने सरकार पर निशाना साधा। उन्होंने आरोप लगाया कि केंद्र सरकार और भाजपा शासित राज्यों में लोगों की आवाज दबाने की कोशिश की जा रही है और इंदौर में भी ऐसा ही प्रयास हो रहा है।
चौधरी ने कहा कि यदि छात्रों को अपने कार्यक्रम के लिए स्टेडियम की अनुमति नहीं मिलती है तो वे कहीं और एकत्र होकर अपनी बात रख सकते हैं। कार्यक्रम का उद्देश्य छात्रों को अपनी समस्याएं और विचार रखने के लिए मंच उपलब्ध कराना है। आयोजन में राजनीतिक मुद्दों के बजाय छात्रों की बातों पर ध्यान दिया जाना है। चौधरी ने सवाल किया कि छात्रों को अपनी आवाज रखने के लिए मंच देना आखिर गलत कैसे हो सकता है। छात्रों की एकजुटता किसी भी कथित दबाव या रोक के प्रयास का जवाब दे सकती है। उन्होंने जंतर-मंतर पर हुए छात्र आंदोलन का उल्लेख करते हुए दावा किया कि वहां छात्रों की एकजुटता ने सरकार की मंशा को प्रभावित किया था और देशभर में भी छात्र अपनी आवाज मजबूती से उठा सकते हैं।
भाजपा की ओर से 'छात्रों की गूंज' को कथित तौर पर झूठ की गूंज बताए जाने और प्रधानमंत्री मोदी की जेनजी संबंधी टिप्पणी पर चौधरी ने कहा कि ऐसी बातें पहले भी जंतर-मंतर के संदर्भ में कही गई थीं। उन्होंने पीएम मोदी के सोशल मीडिया पर छात्रों के साथ संवाद का उल्लेख करते हुए कहा कि बाद में प्रधानमंत्री ने खुद सोशल मीडिया मंचों पर युवाओं के साथ बातचीत की। युवाओं की भावनाओं और उनकी बातों को केवल आंकड़ों और सोशल मीडिया पहुंच के आधार पर नहीं देखा जाना चाहिए, बल्कि उनकी वास्तविक समस्याओं को भी समझना चाहिए।


