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इंदौर की नव भारत गृह निर्माण सहकारी संस्था घोटाले में ईडी की बड़ी कार्रवाई, पांच आरोपियों के खिलाफ अभियोजन शिकायत दाखिल

प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने नव भारत गृह निर्माण सहकारी संस्था लिमिटेड, इंदौर में हुए कथित वित्तीय घोटाले के मामले में बड़ी कार्रवाई करते हुए पांच आरोपियों के खिलाफ विशेष अदालत में अभियोजन शिकायत (प्रॉसिक्यूशन कंप्लेंट) दाखिल की है

इंदौर की नव भारत गृह निर्माण सहकारी संस्था घोटाले में ईडी की बड़ी कार्रवाई, पांच आरोपियों के खिलाफ अभियोजन शिकायत दाखिल
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इंदौर। प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने नव भारत गृह निर्माण सहकारी संस्था लिमिटेड, इंदौर में हुए कथित वित्तीय घोटाले के मामले में बड़ी कार्रवाई करते हुए पांच आरोपियों के खिलाफ विशेष अदालत में अभियोजन शिकायत (प्रॉसिक्यूशन कंप्लेंट) दाखिल की है। आरोप है कि इन लोगों ने संस्था को करीब 4.64 करोड़ रुपए का नुकसान पहुंचाया।

ईडी की इंदौर उप-जोनल इकाई ने 3 जुलाई को विशेष पीएमएलए अदालत, इंदौर में श्रीकांत घांटे, सुभाष चंद्र दुबे, राकेश जैन, अंतिम जोशी और आनंद शाह के खिलाफ धन शोधन निवारण अधिनियम (पीएमएलए), 2002 के तहत अभियोजन शिकायत दाखिल की। विशेष अदालत ने मामले में प्री-कॉग्निजेंस सुनवाई के लिए नोटिस जारी कर दिए हैं।

ईडी ने इस मामले की जांच एमजी रोड थाना, इंदौर में दर्ज एफआईआर के आधार पर शुरू की थी। एफआईआर में नव भारत गृह निर्माण सहकारी संस्था के पदाधिकारियों पर भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) की विभिन्न धाराओं के तहत वित्तीय अनियमितताओं और धोखाधड़ी के आरोप लगाए गए थे।

जांच में ईडी को पता चला कि संस्था के अध्यक्ष, उपाध्यक्ष और निदेशक मंडल के कुछ सदस्यों ने सुनियोजित तरीके से संस्था के सदस्यों के साथ धोखाधड़ी की। आरोप है कि संस्था के धन से खरीदी गई जमीन को विभिन्न संस्थाओं और व्यक्तियों को बेच दिया गया और उससे प्राप्त राशि का गबन किया गया।

ईडी के अनुसार, आरोपियों ने भूमि बिक्री से प्राप्त धनराशि से जुड़े रिकॉर्ड को नष्ट कर दिया और अवैध तरीके से हासिल की गई रकम को विभिन्न माध्यमों से छिपाने के बाद अचल संपत्तियां खरीदने में इस्तेमाल किया।

जांच एजेंसी का कहना है कि इस पूरे मामले में संस्था के सदस्यों को धोखा देकर अपराध से अर्जित आय (प्रोसीड्स ऑफ क्राइम) तैयार की गई और उसे व्यवस्थित तरीके से अलग-अलग स्तरों पर खपाया गया।

इससे पहले ईडी ने 12 फरवरी 2026 को कार्रवाई करते हुए पीएमएलए के तहत 64.16 लाख रुपए मूल्य की अचल संपत्तियों को अस्थायी रूप से कुर्क किया था। ये संपत्तियां आरोपी श्रीकांत घांटे और सुभाष चंद्र दुबे के नाम पर थीं।

ईडी ने बताया कि मामले में आगे की जांच जारी है और जांच के दौरान सामने आने वाले अन्य तथ्यों के आधार पर आगे भी कार्रवाई की जा सकती है।


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