मध्य प्रदेश दब रहा कर्ज और ब्याज के बोझ तले: जीतू पटवारी
मध्य प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष जीतू पटवारी ने प्रदेश की भाजपा सरकार की आर्थिक नीतियों और लगातार बढ़ते कर्ज को लेकर मुख्यमंत्री मोहन यादव पर निशाना साधा। आरोप लगाया है कि राज्य कर्ज और ब्याज के बोझ तले दबता जा रहा है।

भोपाल। मध्य प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष जीतू पटवारी ने प्रदेश की भाजपा सरकार की आर्थिक नीतियों और लगातार बढ़ते कर्ज को लेकर मुख्यमंत्री मोहन यादव पर निशाना साधा। आरोप लगाया है कि राज्य कर्ज और ब्याज के बोझ तले दबता जा रहा है।
कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष जीतू पटवारी ने एक बयान जारी कर कहा कि मोहन सरकार एक तरफ लाखों करोड़ रुपए के निवेश के दावे कर रही है, बड़े-बड़े उद्योगों और रोजगार के सपने दिखा रही है, लेकिन दूसरी तरफ प्रदेश की आर्थिक स्थिति लगातार कर्ज पर निर्भर होती जा रही है। सरकार की घोषणाओं और जमीनी हकीकत के बीच बहुत बड़ा अंतर है।
पटवारी ने कहा कि मध्य प्रदेश की जनता पर कर्ज का बोझ लगातार बढ़ रहा है। चालू वित्त वर्ष 2026-27 में अप्रैल से अक्टूबर तक प्रदेश सरकार लगभग 44 हजार 980 करोड़ का नया कर्ज ले चुकी है और अब फिर 4,000 करोड़ का कर्ज लेने की तैयारी है। यानी सरकार की आर्थिक व्यवस्था का पहिया लगातार नए कर्ज के सहारे चलाया जा रहा है।
उन्होंने कहा कि चिंता की बात यह है कि इसी अवधि में सरकार 14 हजार 73 करोड़ ब्याज और पुराने ऋण के पुनर्भुगतान में खर्च कर चुकी है। यह स्थिति बताती है कि प्रदेश की आर्थिक व्यवस्था पर पुराने कर्ज का दबाव कितना बढ़ चुका है। सवाल यह है कि सरकार नए कर्ज से विकास का दावा कर रही है, लेकिन पुराने कर्ज की देनदारियां लगातार सरकारी खजाने पर बोझ बढ़ा रही हैं।
पटवारी ने कहा कि सरकार के अपने बजट के आंकड़े भी आर्थिक दबाव की गंभीर तस्वीर पेश करते हैं। वित्त वर्ष 2026-27 में मध्य प्रदेश के लिए लगभग 33,735 करोड़ ब्याज भुगतान का अनुमान रखा गया है। वहीं, वेतन, पेंशन और ब्याज को मिलाकर लगभग 1 लाख 37,826 करोड़ का खर्च प्रस्तावित है, जो सरकार की अनुमानित राजस्व प्राप्तियों का करीब 45 प्रतिशत है। इसका सीधा अर्थ है कि प्रदेश की आमदनी का एक बड़ा हिस्सा पहले से ही तय देनदारियों में खर्च हो जाएगा।
पटवारी ने कहा कि प्रदेश के ऊपर बढ़ती देनदारियों का असर आने वाली पीढ़ियों पर भी पड़ेगा। आज लिया गया कर्ज कल प्रदेश के युवाओं और करदाताओं को चुकाना होगा। सरकार को स्पष्ट करना चाहिए कि लगातार लिए जा रहे कर्ज से कितनी स्थायी परिसंपत्तियां तैयार हुईं, कितनी परियोजनाएं पूरी हुईं और उनका वास्तविक लाभ प्रदेश की जनता को मिला?


