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मध्य प्रदेश के कम बारिश वाले क्षेत्रों के लिए राहत पैकेज घोषित करे सरकार: जीतू पटवारी

मध्य प्रदेश के इंदौर-उज्जैन सहित कई जिलों में कम बारिश हुई है, जिसका असर फसल पर पड़ा है। कांग्रेस की राज्य इकाई के अध्यक्ष जीतू पटवारी ने राज्य सरकार से वैज्ञानिक तौर पर सर्वेक्षण कराने के साथ किसानों के लिए राहत पैकेज घोषित करने की मांग की है।

मध्य प्रदेश के कम बारिश वाले क्षेत्रों के लिए राहत पैकेज घोषित करे सरकार: जीतू पटवारी
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भोपाल। मध्य प्रदेश के इंदौर-उज्जैन सहित कई जिलों में कम बारिश हुई है, जिसका असर फसल पर पड़ा है। कांग्रेस की राज्य इकाई के अध्यक्ष जीतू पटवारी ने राज्य सरकार से वैज्ञानिक तौर पर सर्वेक्षण कराने के साथ किसानों के लिए राहत पैकेज घोषित करने की मांग की है।

मध्य प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष जीतू पटवारी ने मुख्यमंत्री मोहन यादव को पत्र लिखकर कम वर्षा वाले सभी क्षेत्रों का तहसीलवार वैज्ञानिक सर्वेक्षण कराने तथा प्रभावित क्षेत्रों के किसानों के लिए तत्काल राहत पैकेज घोषित करने की मांग की है।

कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष का कहना है कि इस वर्ष बारिश बेहद असमान रही है। इंदौर-उज्जैन सहित प्रदेश के कई जिलों में सामान्य से काफी कम वर्षा हुई है। इसका सीधा असर खेती की नमी, खरीफ फसल, जलस्त्रोतों और आगामी रबी फसल पर पड़ने की आशंका है।

पटवारी ने कहा कि सरकार वर्षा के साथ फसल, मिट्टी की नमी, जलस्त्रोत एवं भूजल की वास्तविक स्थिति का आकलन कर प्रभावित क्षेत्रों को सूखा प्रभावित घोषित करने की प्रक्रिया शुरू करे। कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष की मांग है कि फसल नुकसान का तहसीलवार सर्वे कर नुकसान के अनुपात में प्रति हेक्टेयर मुआवजा दिया जाए। प्रभावित किसानों के फसल बीमा दावों का तत्काल निपटारा कर भुगतान सुनिश्चित किया जाए। किसानों के अल्पकालीन कृषि ऋण की वसूली स्थगित करने और ब्याज में राहत देने का निर्णय लिया जाए।

साथ ही पटवारी ने मांग की है कि आगामी रबी सीजन के लिए प्रभावित किसानों को बीज, खाद और अन्य आवश्यक कृषि आदानों पर विशेष सहायता दी जाए। प्रभावित गांवों में पेयजल की व्यवस्था की वैकल्पिक व्यवस्था सुनिश्चित की जाए। अंतिम सर्वेक्षण तक प्रभावित किसानों को अंतरिम राहत राशि उपलब्ध कराई जाए।

जीतू पटवारी ने कहा कि यह केवल बारिश के आंकड़ों का विषय नहीं है, बल्कि प्रदेश के लाखों किसानों की आजीविका और आने वाले कृषि मौसम का सवाल है। सरकार कागजी औसत के पीछे छिपने के बजाय जमीन पर किसान की वास्तविक स्थिति को आधार बनाए और समयबद्ध राहत सुनिश्चित करे।


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