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पीएसीएल घोटाला: ईडी ने 9,420 करोड़ रुपए की 282 संपत्तियां जस्टिस लोढ़ा समिति को सौंपी, निवेशकों को धन वापसी का रास्ता साफ

प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने पर्ल्स एग्रोटेक कॉर्पोरेशन लिमिटेड (पीएसीएल) घोटाले में बड़ी सफलता हासिल करते हुए लगभग 9,420.57 करोड़ रुपए के मौजूदा बाजार मूल्य वाली 282 अचल संपत्तियों की बहाली (रेस्टिट्यूशन) जस्टिस आर.एम. लोढ़ा समिति को सुनिश्चित कराई है

पीएसीएल घोटाला: ईडी ने 9,420 करोड़ रुपए की 282 संपत्तियां जस्टिस लोढ़ा समिति को सौंपी, निवेशकों को धन वापसी का रास्ता साफ
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नई दिल्ली। प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने पर्ल्स एग्रोटेक कॉर्पोरेशन लिमिटेड (पीएसीएल) घोटाले में बड़ी सफलता हासिल करते हुए लगभग 9,420.57 करोड़ रुपए के मौजूदा बाजार मूल्य वाली 282 अचल संपत्तियों की बहाली (रेस्टिट्यूशन) जस्टिस आर.एम. लोढ़ा समिति को सुनिश्चित कराई है। धन शोधन निवारण अधिनियम 2002 के तहत विशेष अदालत के आदेश के बाद यह कार्रवाई की गई है, जिससे लाखों निवेशकों को उनकी फंसी हुई रकम लौटाने की प्रक्रिया को गति मिलेगी।

ईडी के अनुसार, चालू वित्त वर्ष में अब तक करीब 1,595.85 करोड़ रुपए की संपत्तियां कुर्क की गई हैं। इसके साथ ही पीएसीएल मामले में कुल कुर्क संपत्तियों का मूल्य बढ़कर 28,626 करोड़ रुपए हो गया है। इनमें भारत के अलावा ऑस्ट्रेलिया स्थित संपत्तियां भी शामिल हैं।

जांच एजेंसी ने बताया कि कुर्क की गई संपत्तियां पीएसीएल लिमिटेड, उससे जुड़ी कंपनियों तथा दिवंगत निर्मल सिंह भंगू के परिवार और सहयोगियों के नाम पर थीं। इनमें उनकी पत्नी प्रेम कौर, बेटियां बरिंदर कौर और सुखविंदर कौर तथा दामाद हरसतिंदर पाल सिंह हेयर और गुरप्रताप सिंह शामिल हैं।

ईडी ने बताया कि निवेशकों को भूमि आवंटन और निवेश पर लाभ का झांसा देकर उनसे नकद भुगतान और किस्तों के माध्यम से धन जुटाया गया था। कई मामलों में जमीन का वास्तविक स्वामित्व न होने के बावजूद आवंटन पत्र और अन्य दस्तावेज जारी किए गए, जिससे बड़े पैमाने पर धोखाधड़ी हुई। आरोप है कि लगभग 48,000 करोड़ रुपए की राशि अब भी निवेशकों को वापस नहीं मिल सकी है।

सुप्रीम कोर्ट ने वर्ष 2016 में एक मामले की सुनवाई के दौरान सेबी को पूर्व मुख्य न्यायाधीश जस्टिस आर.एम. लोढ़ा की अध्यक्षता में एक समिति गठित करने का निर्देश दिया था। अदालत ने पीएसीएल की जमीन और अन्य संपत्तियों को बेचकर प्राप्त धन निवेशकों को लौटाने का आदेश भी दिया था। इसके बाद जस्टिस लोढ़ा समिति का गठन किया गया।

ईडी ने 26 जुलाई 2016 को मनी लॉन्ड्रिंग का मामला दर्ज कर जांच शुरू की थी। जांच में पता चला कि अपराध से अर्जित धन को विभिन्न कंपनियों और सहयोगियों के जरिए कई स्तरों पर घुमाकर भारत और विदेशों में अचल संपत्तियां खरीदी गईं।

ईडी ने 10 सितंबर 2018 को विशेष अदालत में अभियोजन शिकायत दाखिल की थी, जिस पर अदालत संज्ञान ले चुकी है। एजेंसी ने मामले में कई आरोपियों के खिलाफ कार्रवाई की है।

ईडी ने कहा था कि 9,420.57 करोड़ रुपए मूल्य की 282 संपत्तियों की बहाली लाखों ठगे गए निवेशकों को उनकी रकम वापस दिलाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।


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