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कॉइनबेस फिशिंग स्कैम में ईडी का शिकंजा, कई आरोपियों के खिलाफ कोर्ट में चार्जशीट दाखिल

प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) की हेडक्वार्टर यूनिट ने 'कॉइनबेस फिशिंग स्कैम' मामले में चिराग तोमर, पंकज तोमर, कुशाग्र शाक्य, आकाश वैश, राहुल आनंद, केतन लूथरा, तोमर ग्रुप ऑफ इंडस्ट्रीज प्राइवेट लिमिटेड और एक्साहोम्स रियल्टर्स के खिलाफ 'प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट (पीएमएलए), 2002' के प्रावधानों के तहत द्वारका डिस्ट्रिक्ट कोर्ट, नई दिल्ली की स्पेशल कोर्ट में अभियोजन शिकायत दायर की।

कॉइनबेस फिशिंग स्कैम में ईडी का शिकंजा, कई आरोपियों के खिलाफ कोर्ट में चार्जशीट दाखिल
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नई दिल्ली। प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) की हेडक्वार्टर यूनिट ने 'कॉइनबेस फिशिंग स्कैम' मामले में चिराग तोमर, पंकज तोमर, कुशाग्र शाक्य, आकाश वैश, राहुल आनंद, केतन लूथरा, तोमर ग्रुप ऑफ इंडस्ट्रीज प्राइवेट लिमिटेड और एक्साहोम्स रियल्टर्स के खिलाफ 'प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट (पीएमएलए), 2002' के प्रावधानों के तहत द्वारका डिस्ट्रिक्ट कोर्ट, नई दिल्ली की स्पेशल कोर्ट में अभियोजन शिकायत दायर की।

ईडी ने शुरू में एक अखबार की रिपोर्ट के आधार पर जांच शुरू की थी, जिसमें बताया गया था कि चिराग तोमर नाम के एक भारतीय नागरिक को यूएसए में गिरफ्तार किया गया है। उस पर आरोप था कि उसने क्रिप्टोकरेंसी एक्सचेंज वेबसाइट 'कॉइनबेस' जैसी दिखने वाली नकली या जाली वेबसाइटों का इस्तेमाल करके 20 मिलियन डॉलर से ज्यादा की चोरी की थी।

जांच से पता चला कि चिराग तोमर, जो अभी यूएसए में हिरासत में है, वो क्रिप्टोकरेंसी एक्सचेंज 'कॉइनबेस' की वेबसाइट को स्पूफ करके और क्रिप्टोकरेंसी चुराकर बड़े पैमाने पर साइबर धोखाधड़ी में शामिल था। इसके बाद 'म्यूचुअल लीगल असिस्टेंस ट्रीटी' (एमएलएटी) चैनलों के जरिए यूएसए के संबंधित अधिकारियों से इस मामले में आपराधिक कार्रवाई और सबूतों से जुड़ी जानकारी मांगी गई।

जांच से पता चला कि चिराग तोमर यूएसए-बेस्ड क्रिप्टोकरेंसी एक्सचेंज 'कॉइनबेस' की वेबसाइट को स्पूफ (धोका) करके बड़े पैमाने पर क्रिप्टोकरेंसी धोखाधड़ी में शामिल था। बता दें कि चिराग तोमर को फेडरल ब्यूरो ऑफ इन्वेस्टिगेशन (एफबीआई) ने 20 दिसंबर 2023 को अटलांटा एयरपोर्ट पर गिरफ्तार किया था और यूएसए की संबंधित कोर्ट ने उसे 60 महीने की जेल की सजा सुनाई है, जिसके बाद दो वर्ष की 'सुपरवाइज्ड रिलीज' होगी।

जांच से पता चला कि चिराग तोमर और उसके साथियों ने असली कॉइनबेस प्लेटफॉर्म जैसी दिखने वाली नकली वेबसाइटें बनाईं और उनका इस्तेमाल किया। इनका मकसद पीड़ितों को धोखा देना और उनके लॉगिन क्रेडेंशियल, टू-फैक्टर ऑथेंटिकेशन कोड और अन्य एक्सेस डिटेल्स हासिल करना था।

पीड़ितों के कॉइनबेस अकाउंट का एक्सेस मिलने के बाद, क्रिप्टोकरेंसी होल्डिंग्स को चिराग तोमर और उसके साथियों के कंट्रोल वाले वॉलेट में ट्रांसफर कर दिया गया। इसके बाद चोरी की गई क्रिप्टोकरेंसी को अन्य वर्चुअल डिजिटल एसेट्स में बदला गया, कई वॉलेट्स के जरिए घुमाया गया, और आखिर में पी2पी क्रिप्टोकरेंसी ट्रांजैक्शन के जरिए भारतीय रुपए में बदल दिया गया।

ईडी की जांच में यह भी पता चला कि चोरी की गई क्रिप्टोकरेंसी को बेचकर मिली रकम चिराग तोमर, उसके परिवार के सदस्यों, ग्रुप की कंपनियों और सहयोगियों, जिनमें तोमर ग्रुप ऑफ इंडस्ट्रीज प्राइवेट लिमिटेड, एक्साहोम्स रियल्टर्स, आकाश वैश, राहुल आनंद और अन्य लोग शामिल हैं, के बैंक खातों में जमा की गई थी। इस पैसे को कई बैंक खातों के जरिए घुमाया गया और चल-अचल संपत्ति खरीदने में इस्तेमाल किया गया, जिससे अपराध से मिली कमाई को साफ-सुथरी संपत्ति के तौर पर दिखाया गया।

ईडी ने इस मामले में अब तक 64.55 करोड़ रुपए की चल-अचल संपत्ति को अस्थायी रूप से जब्त किया है और आगे की जांच जारी है। इसी के साथ ईडी नागरिकों को फिशिंग स्कैम और धोखाधड़ी वाले संदेशों या बातचीत से सावधान रहने की सलाह देती है। ऐसे स्कैम का मकसद फर्जी वेबसाइट, ईमेल, मैसेज या कॉल के जरिए लोगों की निजी और वित्तीय जानकारी चुराना होता है।

ईडी ने नागरिकों को सलाह दी कि वे अनजान लिंक पर क्लिक न करें, ओटीपी, पासवर्ड या बैंक की जानकारी किसी के साथ शेयर न करें और किसी भी संदेश या कॉल का जवाब देने से पहले उसकी सच्चाई की जांच कर लें। ईडी ने सभी नागरिकों से सतर्क रहने और धोखाधड़ी से बचने के लिए अपनी निजी जानकारी सुरक्षित रखने की अपील की है।


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