कर्नाटक: गृह लक्ष्मी योजना के ऑडिट पर टिप्पणी को लेकर केएएस अधिकारी के खिलाफ कार्रवाई की मांग
कर्नाटक के अकाउंटेंट जनरल (ऑडिट-I) जहांगीर इनामदार ने मुख्य सचिव शालिनी रजनीश को पत्र लिखकर कर्नाटक प्रशासनिक सेवा (केएएस) के अधिकारी एन. महेश बाबू के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई की मांग की है

बेंगलुरु। कर्नाटक के अकाउंटेंट जनरल (ऑडिट-I) जहांगीर इनामदार ने मुख्य सचिव शालिनी रजनीश को पत्र लिखकर कर्नाटक प्रशासनिक सेवा (केएएस) के अधिकारी एन. महेश बाबू के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई की मांग की है। महेश बाबू पर गृह लक्ष्मी योजना के ऑडिट से जुड़े मामले में अकाउंटेंट जनरल (एजी) और प्रिंसिपल अकाउंटेंट जनरल के खिलाफ आपत्तिजनक और धमकी भरी टिप्पणी करने का आरोप है।
आईएएनएस के पास उपलब्ध पत्र के मुताबिक, इनामदार ने कर्नाटक स्टेट वुमेंस डेवलपमेंट कॉरपोरेशन के मैनेजिंग डायरेक्टर महेश बाबू के नाम से सामने आई टिप्पणियों की जांच कराने की मांग की है।
उन्होंने कहा कि अगर आरोप सही पाए जाते हैं तो संबंधित आचरण नियमों और सीसीए नियमों के तहत अधिकारी के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई शुरू की जानी चाहिए।
जहांगीर इनामदार ने अधिकारी से कर्नाटक के अकाउंटेंट जनरल और प्रिंसिपल अकाउंटेंट जनरल से बिना शर्त सार्वजनिक माफी मांगने के निर्देश देने की भी मांग की है।
यह मामला ऐसे समय सामने आया है, जब नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (सीएजी) की ओर से गृह लक्ष्मी योजना के तहत करीब 225 करोड़ रुपए के दुरुपयोग का मुद्दा उठाए जाने की बात सामने आई थी। इसमें मृत और फर्जी लाभार्थियों से जुड़े खातों में पैसे ट्रांसफर किए जाने का मामला भी शामिल है।
पत्र के मुताबिक, मीडिया रिपोर्टों में महेश बाबू के नाम से ऐसी टिप्पणियां सामने आने का दावा किया गया है जिनमें उन्होंने अकाउंटेंट जनरल के खिलाफ अपमानजनक और धमकी भरी भाषा का इस्तेमाल किया तथा उन पर शारीरिक हमला करने की बात कही। उन्होंने सीएजी की संवैधानिक स्थिति का जिक्र करते हुए कहा कि यह मामला केवल दो अधिकारियों के बीच व्यक्तिगत विवाद का नहीं है।
भारत के संविधान के अनुच्छेद 148 के तहत सीएजी एक संवैधानिक प्राधिकरण है। वहीं, राज्यों की आय और खर्च का ऑडिट अनुच्छेद 149 और नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (कर्तव्य, शक्तियां और सेवा की शर्तें) अधिनियम, 1971 के तहत किया जाता है।
सीएजी की रिपोर्ट संविधान के अनुच्छेद 151(2) के तहत राज्य विधानमंडल के समक्ष रखी जाती है। पत्र में कहा गया कि अकाउंटेंट जनरल और प्रिंसिपल अकाउंटेंट जनरल पर उनके आधिकारिक कामकाज को लेकर हमला करना एक संवैधानिक संस्था और सार्वजनिक धन के खर्च की जानकारी पाने के विधानमंडल के अधिकार पर हमला करने जैसा है।
इनामदार ने कहा कि ऐसी टिप्पणियां किसी भी नागरिक की ओर से स्वीकार्य नहीं हो सकतीं। मामला इसलिए भी गंभीर है, क्योंकि ये आरोप एक सेवारत केएएस अधिकारी पर लगे हैं, जो उस निगम का नेतृत्व कर रहे हैं जिसकी योजना का ऑडिट किया जा रहा है।
इनामदार के मुताबिक, ऐसी टिप्पणियों का वित्तीय पारदर्शिता और चुनावी अवधि के दौरान प्रशासन की निष्पक्षता पर भी असर पड़ सकता है। उन्होंने इस पहलू की भी कथित आपत्तिजनक टिप्पणियों से अलग स्वतंत्र रूप से जांच करने की मांग की।
इनामदार ने कहा कि गृह लक्ष्मी योजना के ऑडिट का एकमात्र उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि सरकारी धन उन महिलाओं तक पहुंचे, जिनके लिए यह योजना बनाई गई है।
उन्होंने कहा कि ऑडिट में सहयोग करके और उसकी जांच से सामने आने वाले तथ्यों पर कार्रवाई करके इस उद्देश्य को हासिल किया जा सकता है, न कि ऑडिट से जुड़े तथ्यों को सामने लाने वाले अधिकारियों के खिलाफ आपत्तिजनक भाषा का इस्तेमाल करके।
इनामदार ने कहा कि संवैधानिक प्राधिकरण को कथित तौर पर निशाना बनाने वाली सार्वजनिक टिप्पणियां ऑडिट प्रक्रिया को नुकसान पहुंचाने के साथ जवाबदेही सुनिश्चित करने वाली राज्य की संस्थागत व्यवस्था की विश्वसनीयता को भी प्रभावित कर सकती हैं।
उन्होंने कर्नाटक सरकार से महेश बाबू के नाम से सामने आई टिप्पणियों की जल्द जांच कराने और उनके सही पाए जाने पर उचित अनुशासनात्मक कार्रवाई करने की मांग की है।
इसके साथ ही उन्होंने मांग की है कि अधिकारी उसी सार्वजनिक मंच पर बिना शर्त माफी मांगें, जहां टिप्पणियां की गई थीं। इनामदार ने यह भी स्पष्ट किया कि गृह लक्ष्मी योजना के बारे में इनपुट राज्य सरकार के अनुरोध पर एक आधिकारिक डी.ओ. पत्र के माध्यम से दिए गए थे।
पत्र में पहले ही स्पष्ट किया गया था कि ऑडिट अभी अंतिम रिपोर्ट के चरण तक नहीं पहुंचा है। उपलब्ध इनपुट सीमित डेटा के आंशिक ऑडिट के दौरान सामने आई शुरुआती टिप्पणियों पर आधारित थे। इसलिए इन्हें ऑडिट के अंतिम निष्कर्ष के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए।


