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कावेरी जल विवाद पर एक दशक बाद कर्नाटक-तमिलनाडु आमने-सामने, 3 अगस्त को बेंगलुरु में अहम बैठक

वरिष्ठ सूत्रों ने पुष्टि की कि कावेरी जल विवाद को लेकर कर्नाटक और तमिलनाडु सरकारों के बीच 3 अगस्त को दोपहर 2 बजे होने वाली उच्चस्तरीय द्विपक्षीय बैठक से पहले बेंगलुरु के विधान सौधा में तैयारियां चल रही हैं

कावेरी जल विवाद पर एक दशक बाद कर्नाटक-तमिलनाडु आमने-सामने, 3 अगस्त को बेंगलुरु में अहम बैठक
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मुख्यमंत्रियों की सीधी मुलाकात: पानी बंटवारे पर होगी चर्चा

  • मेकेदातु प्रोजेक्ट पर टकराव: तमिलनाडु ने जताई कड़ी आपत्ति
  • कावेरी बेसिन में संकट: मानसून की कमी से बढ़ा तनाव

बेंगलुरु। वरिष्ठ सूत्रों ने मंगलवार को पुष्टि की कि कावेरी जल विवाद को लेकर कर्नाटक और तमिलनाडु सरकारों के बीच 3 अगस्त को दोपहर 2 बजे होने वाली उच्चस्तरीय द्विपक्षीय बैठक से पहले बेंगलुरु के विधान सौधा में तैयारियां चल रही हैं। हालांकि, इस बारे में अभी कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया है।

यह बैठक विधान सौधा की तीसरी मंजिल पर बने कॉन्फ्रेंस हॉल में होगी। इसमें कर्नाटक के मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार, तमिलनाडु के मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय, दोनों राज्यों के मंत्री और वरिष्ठ अधिकारी शामिल हो सकते हैं।

आधिकारिक सूत्रों के मुताबिक, बेंगलुरु में विधान सौधा की तीसरी मंजिल पर स्थित इस जगह पर बड़े पैमाने पर तैयारियां की जा रही हैं। इनमें सफाई, लाइटिंग और एयर-कंडीशनिंग सिस्टम की जांच और कार्यक्रम से पहले फर्श बदलने का काम भी शामिल है।

बैठक में लगभग 25 लोगों के बैठने की व्यवस्था की गई है, जिनमें दोनों राज्यों के मुख्यमंत्री, मंत्री, प्रतिनिधि और वरिष्ठ अधिकारी शामिल होंगे।

अधिकारियों को यह भी निर्देश दिया गया है कि वे इस मौके के लिए कॉन्फ्रेंस हॉल में दोनों राज्यों के आधिकारिक प्रतीक और झंडे लगाएं।

यह बैठक इसलिए भी अहम है क्योंकि कावेरी मुद्दे पर कर्नाटक और तमिलनाडु की सरकारों के बीच एक दशक से भी ज्यादा समय बाद पहली बार सीधी बातचीत होगी।

दोनों राज्यों के मुख्यमंत्रियों के बीच ऐसी पिछली बैठक नवंबर 2012 में बेंगलुरु में हुई थी, जिसमें पानी के बंटवारे के विवाद को सुलझाने की कोशिश की गई थी, लेकिन कोई सहमति नहीं बन पाई थी।

यह बातचीत कर्नाटक के मुख्यमंत्री शिवकुमार द्वारा पिछले सप्ताह तमिलनाडु के मुख्यमंत्री विजय को भेजे गए उस पत्र के बाद हो रही है, जिसमें उन्होंने कावेरी मुद्दे पर चर्चा करने की इच्छा जताई थी।

यह घटनाक्रम दोनों दक्षिणी राज्यों के बीच पानी के बंटवारे को लेकर बढ़े तनाव के बीच हो रहा है।

कावेरी जल विनियमन प्राधिकरण (सीडब्ल्यूआरए) ने मंगलवार को कर्नाटक को निर्देश दिया कि वह तमिलनाडु के लिए कावेरी का पानी छोड़े, जबकि कर्नाटक मानसून की कम बारिश के कारण पानी की भारी कमी का सामना कर रहा है।

दोनों राज्यों के बीच तनाव को और बढ़ाते हुए तमिलनाडु के मुख्यमंत्री विजय ने हाल ही में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखकर कर्नाटक की प्रस्तावित मेकेदातु बैलेंसिंग रिजर्वॉयर परियोजना का विरोध किया है। उन्होंने निचले इलाकों में पानी की उपलब्धता पर इसके संभावित असर को लेकर अपने राज्य की चिंताएं फिर से दोहराई हैं।

इन मतभेदों के बावजूद बेंगलुरु में तैयारियां जारी हैं और कर्नाटक और तमिलनाडु, दोनों सरकारें पानी के बंटवारे और मेकेदातु परियोजना जैसे विवादित मुद्दों पर आम सहमति बनाने के लिए बातचीत करने को तैयार हो गई हैं।

सूत्रों के मुताबिक, इस द्विपक्षीय बैठक में पानी के समान बंटवारे को पक्का करने, पीने के पानी की जरूरतों को लेकर कर्नाटक की चिंताओं पर ध्यान देने और मेकेदातु प्रोजेक्ट के बारे में आगे की कार्रवाई पर चर्चा करने की उम्मीद है।

कावेरी बेसिन में जलाशयों का जलस्तर कम होने और कर्नाटक में पानी की कमी का संकट मंडराने के बीच, 3 अगस्त की बैठक पर सबकी नजरें टिकी हैं। इसे भारत के सबसे विवादित नदी विवादों में से एक पर राज्यों के बीच बातचीत को फिर से शुरू करने की दिशा में एक अहम कदम माना जा रहा है।


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