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भारत की समग्र दृष्टि ही दुनिया की चुनौतियों का समाधान, विश्व को पूर्णता देना हमारा कार्य: मोहन भागवत

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत ने कहा कि भारत की समग्र और एकात्म दृष्टि आज विश्व जिन समस्याओं के समाधान की तलाश कर रहा है

भारत की समग्र दृष्टि ही दुनिया की चुनौतियों का समाधान, विश्व को पूर्णता देना हमारा कार्य: मोहन भागवत
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बेंगलुरु। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत ने कहा कि भारत की समग्र और एकात्म दृष्टि आज विश्व जिन समस्याओं के समाधान की तलाश कर रहा है, उसका उत्तर प्रस्तुत करती है। उन्होंने कहा कि दुनिया को पूर्णता प्रदान करना भारत का दायित्व है और इसी दिशा में भारतीय शिक्षण मंडल (बीएसएम) का कार्य एक व्यापक सभ्यतागत मिशन का हिस्सा है।

डॉ. मोहन भागवत बेंगलुरु स्थित आर्ट ऑफ लिविंग इंटरनेशनल सेंटर में 26 से 28 जून तक आयोजित भारतीय शिक्षण मंडल के तीन दिवसीय राष्ट्रीय सम्मेलन 'ऑपरेशनलाइजिंग एनईपी-2020 : इंटीग्रेटिंग इंडियन नॉलेज सिस्टम्स' के समापन समारोह को संबोधित कर रहे थे।

उन्होंने कहा कि वर्तमान वैश्विक विचारधाराएं जीवन और समाज के केवल आंशिक पक्षों को सामने रखती हैं, जबकि भारतीय दृष्टि जीवन को समग्र रूप से देखती है। उन्होंने कहा, "विश्व कल्याण के लिए भारत की इस पूर्ण दृष्टि को दुनिया तक पहुंचाना आवश्यक है। हमारा कार्य वास्तव में विश्व को पूर्णता देना है।"

डॉ. भागवत ने कहा कि भारतीय दृष्टिकोण अन्य विचारों को गलत नहीं मानता, बल्कि यह स्वीकार करता है कि प्रत्येक समाज ने अपने अनुभवों के आधार पर अपनी-अपनी जीवन दृष्टि विकसित की है। भारतीय परंपरा 'अनेकता' के सिद्धांत पर आधारित है, जो सभी दृष्टिकोणों का सम्मान करते हुए शास्त्रार्थ और संवाद के माध्यम से सत्य के सार को ग्रहण करने की बात करती है।

उन्होंने कहा कि सत्य इतना व्यापक है कि कोई एक दृष्टिकोण उसे पूरी तरह समाहित नहीं कर सकता। भारतीय दृष्टि इसी कारण अधिक समग्र और पूर्ण मानी जाती है।

सरसंघचालक ने कहा कि भारतीय शिक्षण मंडल का उद्देश्य केवल रोजगारपरक शिक्षा तक सीमित नहीं है। यह मनुष्य के समग्र विकास की अवधारणा पर आधारित है, जिसमें शिक्षा को केवल आर्थिक दृष्टि से नहीं, बल्कि मानवीय, सांस्कृतिक और नैतिक मूल्यों के साथ जोड़ा जाता है।

उन्होंने कहा कि भारतीय शिक्षण मंडल भारतीय जीवन मूल्यों पर आधारित ऐसी शिक्षा व्यवस्था विकसित करने का प्रयास कर रहा है, जो व्यक्ति और समाज दोनों के सर्वांगीण विकास का मार्ग प्रशस्त करे।

डॉ. भागवत ने कहा कि भारतीय शिक्षण मंडल स्वयं को सभी राजनीतिक दलों और उनकी राजनीतिक आवश्यकताओं से अलग रखकर कार्य करता है।

उन्होंने स्वतंत्रता आंदोलन के नेताओं का उल्लेख करते हुए कहा कि उन्होंने भी ऐसे रचनात्मक कार्यों को राजनीतिक संगठनों से अलग रखा था, क्योंकि इस प्रकार का कार्य राजनीतिक दलों के साथ रहते हुए प्रभावी ढंग से नहीं किया जा सकता।

उन्होंने कहा कि भारतीय शिक्षण मंडल की यही स्वतंत्र कार्यशैली, भारतीय मूल्यों के प्रति उसकी प्रतिबद्धता और विश्व कल्याण की व्यापक दृष्टि उसे अन्य संस्थाओं से अलग पहचान देती है।

इस अवसर पर डॉ. मोहन भागवत ने भारतीय शिक्षण मंडल की नई वेबसाइट का भी शुभारंभ किया। उन्होंने कहा कि इससे भारतीय शिक्षा की अवधारणा और संगठन की गतिविधियां देश-विदेश के शिक्षकों, शोधकर्ताओं और आम नागरिकों तक अधिक प्रभावी ढंग से पहुंच सकेंगी।

समापन समारोह में भारतीय शिक्षण मंडल के अखिल भारतीय अध्यक्ष डॉ. सच्चिदानंद जोशी, अखिल भारतीय महासचिव डॉ. भरतशरण सिंह सहित देशभर से आए लगभग 380 शिक्षाविद्, शिक्षकों, शोधकर्ताओं और प्रतिनिधियों ने भाग लिया।

तीन दिवसीय सम्मेलन का उद्घाटन कर्नाटक के राज्यपाल थावरचंद गहलोत ने किया था। सम्मेलन में राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 के प्रभावी क्रियान्वयन तथा भारतीय ज्ञान परंपरा पर आधारित शिक्षा व्यवस्था को मजबूत बनाने के विभिन्न पहलुओं पर व्यापक मंथन किया गया।


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