रांची में आदिवासी एकता महाजुटान रैली, परिसीमन और माइंस-मिनरल्स बिल के खिलाफ गरजे कांग्रेस नेता
रांची में कांग्रेस के पूर्व विधायक बंधु तिर्की के नेतृत्व में कांग्रेस नेताओं और आदिवासी संगठनों ने ‘आदिवासी एकता महाजुटान’ रैली निकाली। रैली में आबादी के आधार पर परिसीमन और माइंस एंड मिनरल्स संशोधन बिल का कड़ा विरोध किया गया

रांची। रांची में कांग्रेस के पूर्व विधायक बंधु तिर्की के नेतृत्व में कांग्रेस नेताओं और आदिवासी संगठनों ने ‘आदिवासी एकता महाजुटान’ रैली निकाली। रैली में आबादी के आधार पर परिसीमन और माइंस एंड मिनरल्स संशोधन बिल का कड़ा विरोध किया गया। नेताओं ने इसे आदिवासियों की संख्या, भागीदारी और जमीन-संसाधनों पर अधिकार को कमजोर करने की साजिश बताते हुए सरकार को चेतावनी दी।
परिसीमन को लेकर आदिवासी संगठनों में भारी नाराजगी है। नेताओं का कहना है कि अगर जनसंख्या के आधार पर परिसीमन किया गया तो आदिवासी बहुल इलाकों में सीटें घट जाएंगी, जिससे उनकी राजनीतिक भागीदारी और आवाज कमजोर हो जाएगी।
बंधु तिर्की ने कहा, "परिसीमन में जनसंख्या के आधार पर अगर हमारी सीट घटी तो ईंट से ईंट बजा देंगे। खान एवं खनिज (विकास एवं विनियमन) संशोधन विधेयक, 2026 को वापस लेना ही होगा। विपक्ष इसी तरह की बात करता है। छत्तीसगढ़ और झारखंड में आदिवासियों का क्या हाल है?"
सुखदेव भगत ने कहा, "निश्चित रूप से आदिवासी एकता महाजुटान रैली परिसीमन के विरुद्ध है। इसके जरिए सरकार आदिवासी संख्या घटाना चाहती है, आवाज को दबाना चाहती है। इसके विरुद्ध में आज आदिवासी संगठनों ने ये कार्यक्रम किया। निश्चित रूप से सड़कों पर हमारी जनता है, सदन में राहुल गांधी के नेतृत्व में हमलोग संघर्ष करेंगे।"
सुबोध कांत सहाय ने कहा कि 2011 में जो स्थिति थी, जिसकी वजह से परिसीमन की प्रक्रिया को असम, झारखंड समेत एक-दो राज्यों में रोक दिया गया था। आज उससे ज्यादा बुरा हाल है। रोका क्यों गया था, क्योंकि आदिवासियों की संख्या और भागीदारी घट रही थी। आज के परिवेश में इसे एक सशक्त व्यवस्था में बदलना ही अहम है।
एक अन्य नेता ने कहा कि ये आदिवासियों की एकता का शक्ति प्रदर्शन है। जिस तरह से भाजपा नए-नए नियम ला रही है, आदिवासियों को बांटने की कोशिश कर रही है, उसके खिलाफ एक जबरदस्त शंखनाद है और इसका असर सिर्फ झारखंड में नहीं, पूरे देश में दिखेगा।


