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छात्र आंदोलन : तीसरे दौर की वार्ता बेनतीजा, छात्रों ने विधानसभा घेराव का ऐलान

झारखंड में जेपीएससी और जेएसएससी परीक्षा विवाद को लेकर आंदोलन कर रहे छात्रों और राज्य सरकार के बीच रविवार को हुई दूसरे दौर की वार्ता भी बेनतीजा रही

छात्र आंदोलन : तीसरे दौर की वार्ता बेनतीजा, छात्रों ने विधानसभा घेराव का ऐलान
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जेपीएससी विवाद: सरकार-छात्रों की बैठक में फिर गतिरोध

  • सीजीएल परीक्षा पर टकराव: सरकार बोली कोर्ट में मामला, छात्र अड़े
  • सीबीआई जांच पर सरकार का तर्क: समयबद्ध कार्रवाई ही समाधान
  • 10 अगस्त विधानसभा घेराव: आंदोलन तेज करने की तैयारी

रांची। झारखंड में जेपीएससी और जेएसएससी परीक्षा विवाद को लेकर आंदोलन कर रहे छात्रों और राज्य सरकार के बीच रविवार को हुई दूसरे दौर की वार्ता भी बेनतीजा रही।

दोपहर करीब 12 बजे शुरू हुई बैठक में छात्रों की विभिन्न मांगों पर विस्तार से चर्चा हुई। बैठक के बाद सरकार ने जहां करीब 98 प्रतिशत मांगों पर सहमति बनने का दावा किया, वहीं छात्र प्रतिनिधियों ने कहा कि 50 प्रतिशत से अधिक मांगों को सरकार ने स्वीकार किया है, लेकिन कई प्रमुख और निर्णायक मुद्दों पर अब भी सहमति नहीं बनी है। इसके साथ ही छात्रों ने आंदोलन खत्म करने से इनकार करते हुए 10 अगस्त को झारखंड विधानसभा का घेराव करने का ऐलान किया।

वार्ता में परीक्षाओं में कथित गड़बड़ियों की जांच, प्रभावित परीक्षाओं को रद्द करने, दोषियों पर कार्रवाई और भविष्य में ऐसी स्थिति दोबारा नहीं हो, इसके लिए परीक्षा व्यवस्था में सुधार सहित कई मुद्दों पर चर्चा हुई। जेपीएससी की 14वीं परीक्षा के अलावा बैकलॉग और रेगुलर परीक्षाओं से जुड़े मामलों को भी बैठक में उठाया गया।

सरकार की ओर से बताया गया कि 14वीं जेपीएससी परीक्षा में टीडीपीएल से संबंधित कथित गड़बड़ियों की जांच सीआईडी करेगी। मामले में संदिग्ध लोगों को हिरासत में लिए जाने की जानकारी भी दी गई। सरकार ने ईडी से भी मामले की जांच कराने का अनुरोध भेजने की बात कही। इसके अलावा जेपीएससी सदस्यों के इस्तीफे का मुद्दा भी वार्ता में उठा।

सरकार ने जेपीएससी की बैकलॉग और 14वीं जेपीएससी की नियमित परीक्षाओं से जुड़े मामलों की जांच कराने का भरोसा दिया। टीडीपीएल की भूमिका और उससे जुड़ी पूरी प्रक्रिया की जांच तथा दोषियों के खिलाफ कार्रवाई का भी आश्वासन दिया गया।

हालांकि, बातचीत के दौरान जेपीएससी के साथ सीजीएल परीक्षा का मुद्दा भी प्रमुखता से सामने आया। छात्रों और सरकार के प्रस्ताव के बीच सबसे बड़ा गतिरोध इसी मुद्दे पर बना हुआ है। सरकार का कहना है कि जेपीएससी और सीजीएल से जुड़े मामले फिलहाल हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट में विचाराधीन हैं। ऐसे में सीधे परीक्षा रद्द करने का फैसला लेना सरकार के लिए संभव नहीं है।

सरकार ने मामले की समीक्षा के लिए रिटायर्ड जज की अध्यक्षता में एक कमेटी गठित करने का प्रस्ताव छात्रों के सामने रखा। सरकार के अनुसार यह कमेटी करीब 90 दिनों में अपनी रिपोर्ट दे सकती है। जांच और समीक्षा प्रक्रिया में आईआईटी आईएसएम, एक्सएलआरआई सहित अन्य विशेषज्ञ संस्थानों की मदद लेने की भी बात कही गई।

इसके अलावा सरकार ने एक पोर्टल बनाने का प्रस्ताव भी दिया, जहां अभ्यर्थी परीक्षा प्रक्रिया से जुड़ी अपनी समस्याएं और सुझाव दर्ज करा सकेंगे।

सीबीआई जांच पर सरकार ने रखा अपना पक्ष

छात्रों की ओर से लगातार उठाई जा रही सीबीआई जांच की मांग पर मंत्री सुदिव्य कुमार सोनू ने प्रेस वार्ता में सरकार का पक्ष रखा। उन्होंने कहा कि इससे पहले जेपीएससी की पहली और दूसरी परीक्षा से जुड़े मामलों की जांच भी सीबीआई को सौंपी गई थी, लेकिन 20 साल से अधिक समय बीतने के बावजूद उसका अपेक्षित परिणाम सामने नहीं आया।

सरकार का तर्क है कि केवल सीबीआई जांच की मांग करने के बजाय ऐसी व्यवस्था होनी चाहिए, जिसमें जांच समयबद्ध तरीके से पूरी हो और दोषियों के खिलाफ कार्रवाई सुनिश्चित की जा सके। इसी के तहत रिटायर्ड जज की अध्यक्षता में कमेटी गठित करने और विशेषज्ञ संस्थानों की मदद से जांच कराने का विकल्प सरकार ने रखा है।

हालांकि, छात्रों ने सीजीएल को लेकर सरकार के इस प्रस्ताव को स्वीकार नहीं किया। छात्र प्रतिनिधियों का कहना है कि जब तक उनकी प्रमुख मांगों पर स्पष्ट और निर्णायक फैसला नहीं होता, तब तक आंदोलन जारी रहेगा। बैठक के बाद छात्रों ने 10 अगस्त को विधानसभा घेराव का ऐलान कर सरकार पर दबाव बढ़ाने का संकेत दिया है।


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