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पाकिस्तान में बॉडी ऑर्गन तस्करी का काला कारोबार

इस्लामाबाद, पाकिस्तान में इंसान के अंगों की अवैध तस्करी सिर्फ देश के अंदर का अपराध नहीं, बल्कि यह एक अंतरराष्ट्रीय धंधा बन चुका है जो विदेशी मांग को पूरा कर रहा है।

पाकिस्तान में बॉडी ऑर्गन तस्करी का काला कारोबार
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इस्लामाबाद, पाकिस्तान में इंसान के अंगों की अवैध तस्करी सिर्फ देश के अंदर का अपराध नहीं, बल्कि यह एक अंतरराष्ट्रीय धंधा बन चुका है जो विदेशी मांग को पूरा कर रहा है।

एक रिपोर्ट के मुताबिक, जून में इस्लामाबाद में प्लेसेंटा को वियतनाम निर्यात करने का मामला सामने आया था, जिसने इस व्यापार के अंतरराष्ट्रीय होने का खुलासा किया। इससे पहले भी ट्रांसप्लांट टूरिज्म की रिपोर्ट्स आ चुकी हैं, जिसमें विदेशी मरीज अवैध तरीकों से अंग लेने के लिए पाकिस्तान आते हैं।

'पाकिस्तान ऑब्जर्वर' की रिपोर्ट में कहा गया, "यह क्रॉस-बॉर्डर पहलू स्थानीय दलालों, विदेशी मरीजों, नकद भुगतान और फर्जी मेडिकल दस्तावेजों को एक साथ लाता है। यह व्यापार वहीं मुनाफा तलाशता है जहां निगरानी सबसे कमजोर होती है। जब ग्राहक कई देशों में फैले होते हैं, तो सप्लाई चेन एक देश से बाहर निकल जाती है, जिससे इस अपराध को पकड़ना और रोकना मुश्किल हो जाता है। पाकिस्तान की मौजूदा समस्या बड़ी गिरफ्तारियों का न होना नहीं, बल्कि हर छापे के बाद इसे स्थायी रूप से खत्म करने में नाकामी है।"

रिपोर्ट के अनुसार, पाकिस्तान के अवैध अंग व्यापार ने एक बार फिर कड़वी हकीकत दिखाई है कि कैसे गरीबी, नियामक विफलताएं और मेडिकल कदाचार कमजोर लोगों को अपराध की दुनिया में 'सामान' बना देते हैं।

रिपोर्ट में कहा गया, "पाकिस्तान में अंग तस्करी अब छिपे हुए सौदों से आगे बढ़ चुकी है। जांचकर्ताओं ने हाल के ऑपरेशन को दलालों, मेडिकल पेशेवरों और बिचौलियों से जुड़े संगठित नेटवर्क से जोड़ा है, जिसमें कथित तौर पर फर्जी कागजात, मंजूरी को दरकिनार कर और सोची-समझी वित्तीय व्यवस्था के जरिए ट्रांसप्लांट किया जाता था।"

जून 2026 में फेडरल इन्वेस्टिगेशन एजेंसी (एफआईए) के एंटी-करप्शन सर्कल ने दो संदिग्ध दलालों को गिरफ्तार किया था, जो कथित तौर पर ईंट भट्ठा मजदूरों, दिहाड़ी मजदूरों और अन्य आर्थिक रूप से कमजोर लोगों को अवैध किडनी ट्रांसप्लांट के लिए लुभा रहे थे।

यह गिरफ्तारी इस्लामाबाद में पहले के ऑपरेशन के बाद हुई, जिसमें इसी जांच में एक डॉक्टर और उसकी मेडिकल टीम के कई सदस्यों को गिरफ्तार किया गया था।

अधिकारियों ने कहा कि यह नेटवर्क लगभग 187 अवैध किडनी ट्रांसप्लांट कर चुका है। मरीजों से हर ऑपरेशन के लिए 21,500 डॉलर (60 लाख पाकिस्तानी रुपए) से 36,000 डॉलर (1 करोड़ पाकिस्तानी रुपए) तक वसूले गए, जबकि डोनर को इसका बहुत छोटा हिस्सा ही दिया गया।

इस साल एक और ऑपरेशन में, 25 जून को एफआईए ने इस्लामाबाद में पांच संदिग्धों को गिरफ्तार किया, जिनमें तीन चीनी नागरिक और दो पाकिस्तानी शामिल थे। आरोप है कि वे मानव अंगों के अवैध व्यापार में शामिल थे।

अधिकारियों ने कहा कि छापे में ताजा, सूखा और प्रोसेस्ड मानव प्लेसेंटा भी बरामद हुआ, जो जांचकर्ताओं के अनुसार पेशावर, रावलपिंडी और लाहौर के अस्पतालों से लाया गया था।

आरोप है कि प्लेसेंटा को भेड़ के अंगों के रूप में गलत लेबल लगाकर विदेश भेजा जा रहा था, और वियतनाम इसका गंतव्य था।

रिपोर्ट में कहा गया है, "इस केस ने व्यापार की तस्वीर को और बड़ा कर दिया। यह सिर्फ किडनी की तस्करी या लोकल ट्रांसप्लांट घोटाले तक सीमित नहीं था, बल्कि इसमें अस्पताल से जुड़े चैनलों के जरिए मानव जैविक सामग्री के संग्रह, प्रसंस्करण और निर्यात का भी आरोप है।"


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