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कैलिफोर्निया के तियानमेन स्मारक संग्रहालय पर हमले में चीन का हाथ होने का शक

वाशिंगटन, अमेरिका के दो वरिष्ठ रिपब्लिकन लॉ मेकर्स ने कैलिफोर्निया स्थित 'जून फोर्थ मैसेकर मेमोरियल म्यूजियम' में हुई तोड़फोड़ के मामले में चीन की संभावित भूमिका की जांच कराने की मांग की।

कैलिफोर्निया के तियानमेन स्मारक संग्रहालय पर हमले में चीन का हाथ होने का शक
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वाशिंगटन, अमेरिका के दो वरिष्ठ रिपब्लिकन लॉ मेकर्स ने कैलिफोर्निया स्थित 'जून फोर्थ मैसेकर मेमोरियल म्यूजियम' में हुई तोड़फोड़ के मामले में चीन की संभावित भूमिका की जांच कराने की मांग की। उनका कहना है कि यह सिर्फ सामान्य तोड़फोड़ का मामला नहीं हो सकता, बल्कि इसके पीछे चीन या चीन समर्थित लोगों का हाथ होने की भी आशंका है।

न्यू जर्सी से प्रतिनिधि क्रिस स्मिथ और मिशिगन से प्रतिनिधि जॉन मूलेनार ने इस संबंध में अमेरिका के कार्यवाहक अटॉर्नी जनरल टॉड ब्लांश को पत्र लिखा है। क्रिस स्मिथ 'कांग्रेसनल-एग्जीक्यूटिव कमीशन ऑन चाइना' के सह-अध्यक्ष हैं, जबकि जॉन मूलेनार 'हाउस सेलेक्ट कमेटी ऑन चाइना' के अध्यक्ष हैं।

लॉ मेकर्स द्वारा सार्वजनिक रिपोर्टों के हवाले से दी गई जानकारी के अनुसार, 4 जून 1989 केतियानमेन स्क्वायर नरसंहार की 37वीं वर्षगांठ से ठीक पहले कुछ अज्ञात लोग कैलिफोर्निया के एल मोंटे स्थित संग्रहालय में घुस गए। घुसपैठियों ने संग्रहालय की दीवारों और प्रदर्शनी सामग्री पर स्प्रे पेंट किया, संपत्ति को नुकसान पहुंचाया और वहां लगे निगरानी कैमरों तथा सर्विलांस सिस्टम में भी हस्तक्षेप किया।

क्रिस स्मिथ ने कहा कि यह संग्रहालय तियानमेन नरसंहार की उस सच्चाई को सुरक्षित रखता है, जिसे चीन की कम्युनिस्ट पार्टी (सीसीपी) लगभग चार दशक से नकारती रही है और दुनिया से छिपाने की कोशिश करती रही है।

उन्होंने कहा, "इसी वजह से अमेरिकी न्याय विभाग (डीओजे) को इस हमले को बेहद गंभीरता से देखा जाना चाहिए और यह पता लगाना चाहिए कि क्या यह सिर्फ सामान्य तोड़फोड़ थी या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश थी।"

दोनों लॉ मेकर्स ने न्याय विभाग से कहा कि वह एफबीआई के लॉस एंजिलिस फील्ड ऑफिस और नेशनल सिक्योरिटी डिवीजन के साथ मिलकर स्थानीय अधिकारियों की मदद करे। जांच का उद्देश्य यह पता लगाना होना चाहिए कि कहीं इस हमले का संबंध चीन, चीन की कम्युनिस्ट पार्टी (सीसीपी) या फिर बीजिंग सरकार के समर्थन में काम करने वाले लोगों से तो नहीं है।

क्रिस स्मिथ ने कहा, "अगर यह हमला चीन की कम्युनिस्ट पार्टी की ओर से योजना बनाकर कराया गया, उसका समर्थन किया गया या उसके इशारे पर किसी ने अंजाम दिया, तो यह अमेरिका में अभिव्यक्ति की आजादी, ऐतिहासिक सच्चाई और यहां रहने वाले चीनी लोकतंत्र समर्थकों की सुरक्षा पर सीधा हमला होगा।"

जॉन मूलेनार ने कहा कि चीन की कम्युनिस्ट पार्टी लगातार अमेरिका में अपने आलोचकों को डराने, धमकाने और उनकी आवाज दबाने की कोशिश करती रही है। उन्होंने कहा कि न्याय विभाग और एफबीआई को इस मामले की गहराई से जांच करनी चाहिए ताकि अमेरिका में स्वतंत्रता की तलाश में रह रहे चीनी मूल के लोगों और सीसीपी के खिलाफ खुलकर बोलने वाले देशभक्त चीनी-अमेरिकियों के अधिकारों की रक्षा की जा सके।

अपने पत्र में लॉ मेकर्स ने कैलिफोर्निया में हाल के वर्षों में हुई कई घटनाओं का भी जिक्र किया। इनमें लिबर्टी स्कल्प्चर पार्क और चीन के असंतुष्ट कलाकार चेन वेइमिंग से जुड़े स्मारकों को नुकसान पहुंचाने तथा निगरानी किए जाने की घटनाएं शामिल हैं।

इसके अलावा उन्होंने 2023 के एशिया-पैसिफिक इकोनॉमिक कोऑपरेशन (एपीईसी) शिखर सम्मेलन के दौरान सैन फ्रांसिस्को में चीन विरोधी प्रदर्शनकारियों के खिलाफ हिंसा और डराने-धमकाने की घटनाओं का भी जिक्र किया। लॉ मेकर्स ने पूर्व आर्केडिया मेयर एलीन वांग के खिलाफ चीन के अवैध एजेंट के रूप में काम करने के आरोपों में लगे संघीय मामलों का भी जिक्र किया।

क्रिस स्मिथ और जॉन मूलेनार ने यह भी सवाल उठाया कि क्या स्थानीय कानून प्रवर्तन एजेंसियों के पास इतनी ट्रेनिंग और संसाधन हैं कि वे ऐसे मामलों में विदेशी हस्तक्षेप की पहचान कर सकें, जो पहली नजर में केवल तोड़फोड़, हमला, उत्पीड़न या राजनीतिक विरोध जैसी घटनाएं दिखाई देती हैं।

दोनों लॉ मेकर्स ने न्याय विभाग से इस मामले में लिखित जवाब और विस्तृत ब्रीफिंग मांगी है। साथ ही यह भी जानकारी मांगी है कि संग्रहालयों, सामाजिक संगठनों और प्रवासी समुदायों के लिए ऐसे मामलों की शिकायत दर्ज कराने और संदिग्ध विदेशी हस्तक्षेप की रिपोर्ट करने की मौजूदा व्यवस्था क्या है।

क्रिस स्मिथ और जॉन मूलेनार ट्रांसनेशनल रिप्रेशन पॉलिसी एक्ट का भी समर्थन करते रहे हैं। यह द्विदलीय (बाइपार्टिसन) विधेयक उन विदेशी सरकारों के खिलाफ अमेरिकी सरकारी प्रशिक्षण, जनसंपर्क और जवाबदेही की व्यवस्था को मजबूत करने के लिए लाया गया है, जिन पर अमेरिका में लोगों को डराने, धमकाने, निगरानी करने या दबाव बनाने के आरोप लगते रहे हैं।

जून 1989 में बीजिंग के तियानमेन स्क्वायर में लोकतंत्र समर्थक प्रदर्शनकारियों पर चीनी सेना ने गोलीबारी की थी। इस घटना को लेकर चीन में आज भी सार्वजनिक चर्चा पर कड़े प्रतिबंध हैं और मुख्यभूमि चीन में इसकी बरसी मनाने की अनुमति नहीं दी जाती।


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