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दक्षिण कोरिया: बैलट पेपर विवाद पर17 दिन से प्रदर्शन जारी

सोल, दक्षिण कोरिया की राजधानी सोल में 3 जून को हुए स्थानीय चुनावों में कथित अनियमितताओं को लेकर विरोध प्रदर्शन लगातार तेज होता जा रहा है। मतदान केंद्रों पर बैलट पेपर की कमी के आरोपों के बाद शुरू हुआ यह आंदोलन रविवार को 17वें दिन में प्रवेश कर गया।

दक्षिण कोरिया: बैलट पेपर विवाद पर17 दिन से प्रदर्शन जारी
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सोल, दक्षिण कोरिया की राजधानी सोल में 3 जून को हुए स्थानीय चुनावों में कथित अनियमितताओं को लेकर विरोध प्रदर्शन लगातार तेज होता जा रहा है। मतदान केंद्रों पर बैलट पेपर की कमी के आरोपों के बाद शुरू हुआ यह आंदोलन रविवार को 17वें दिन में प्रवेश कर गया।

प्रदर्शनकारी दक्षिणी सोल के सोंगपा जिले में स्थित एसके ओलंपिक हैंडबॉल जिम्नेजियम के बाहर इकट्ठा होकर चुनाव दोबारा कराए जाने की मांग कर रहे हैं। यह वही स्थान है जहां चुनावों की मतगणना हुई थी। प्रदर्शनकारियों ने “चुनाव धोखाधड़ी” के आरोप लगाते हुए लगातार नारेबाजी और धरना प्रदर्शन जारी रखा है।

योनहाप न्यूज एजेंसी के अनुसार, सोल महानगर सरकार का अनुमान है कि दोपहर 3:30 बजे तक लगभग 34,000 लोग प्रदर्शन में शामिल थे, जिनमें 20 और 30 वर्ष की आयु के युवा सबसे अधिक संख्या में थे। यह आंदोलन 5 जून को शुरू हुआ था, जब 26 मतदान केंद्रों पर बैलट पेपर की कमी के कारण मतदान अस्थायी रूप से बाधित हो गया था।

राष्ट्रीय निर्वाचन आयोग (एनईसी) ने इस कमी के लिए औपचारिक रूप से माफी मांगी है, लेकिन उसका कहना है कि यह स्थिति चुनाव कानून के तहत पुनर्मतदान का आधार नहीं बनती। इस बीच पुलिस और अभियोजकों की संयुक्त टीम इस मामले की जांच कर रही है।

सरकार ने प्रदर्शनकारियों से अपील की है कि वे शांतिपूर्ण प्रदर्शन करें और किसी भी प्रकार की अवैध गतिविधियों से बचें। अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि शांतिपूर्ण विरोध को अनुमति है, लेकिन हिंसा या अवैध कृत्यों को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।

इस मामले को लेकर दक्षिण कोरिया की नेशनल असेंबली ने भी जांच की प्रक्रिया शुरू कर दी है। सत्तारूढ़ डेमोक्रेटिक पार्टी (डीपी) और मुख्य विपक्षी पीपुल पावर पार्टी (पीपीपी) दोनों ने संसदीय जांच की मांग की है, जिसके आधार पर एक विशेष समिति गठित करने की तैयारी चल रही है।

हालांकि, दोनों दलों के बीच जांच के दायरे और समिति में सीटों के बंटवारे को लेकर मतभेद बने हुए हैं। विपक्षी पीपीपी ने अलग से विशेष अभियोजक जांच की भी मांग की है, जबकि सत्तारूढ़ डीपी का कहना है कि इस पर निर्णय संसदीय जांच के बाद लिया जाना चाहिए।

राजनीतिक तनाव के बीच संसद के अध्यक्ष चो जियोंग सिक ने संकेत दिया है कि आने वाले सप्ताह में इस जांच प्रस्ताव को आगे बढ़ाया जा सकता है। वहीं राष्ट्रपति कार्यालय ने भी कहा है कि यदि दोनों पक्ष सहमत होते हैं तो विशेष जांच की संभावना पर विचार किया जा सकता है।


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