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उत्तर कोरिया में भारत के नए राजदूत संजीव जैन

नई दिल्ली, विदेश मंत्रालय (एमईए) ने सोमवार को घोषणा की कि संजीव जैन को उत्तर कोरिया में भारत का अगला राजदूत नियुक्त किया गया है।

उत्तर कोरिया में भारत के नए राजदूत संजीव जैन
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नई दिल्ली, विदेश मंत्रालय (एमईए) ने सोमवार को घोषणा की कि संजीव जैन को उत्तर कोरिया में भारत का अगला राजदूत नियुक्त किया गया है।

विदेश मंत्रालय ने कहा, "संजीव जैन जो अभी रिपब्लिक ऑफ काबो वर्डे में भारत के राजदूत हैं, उन्हें डेमोक्रेटिक पीपुल्स रिपब्लिक ऑफ कोरिया (उत्तर कोरिया) में भारत का अगला राजदूत नियुक्त किया गया है। उम्मीद है कि वह जल्द ही अपना नया कार्यभार संभालेंगे।''

संजीव जैन काबो वर्डे में भारत के पहले ऐसे राजदूत रहे हैं, जिनका मुख्यालय वहीं स्थित था। उन्होंने संसदीय मामलों, प्रशासन, वाणिज्य दूतावास से जुड़े काम, प्रेस से संबंध, विज्ञान और तकनीक में सहयोग, संस्कृति, भारतीय समुदाय से जुड़े मामलों, व्यापार और वाणिज्य जैसे कई क्षेत्रों में काम किया है।

इससे पहले भी वह दुबई, पेरिस, कैंडी, बर्लिन, टोक्यो और ओसाका में भारतीय दूतावासों और वाणिज्य दूतावासों में अलग-अलग पदों पर काम कर चुके हैं।

काबो वर्डे में राजदूत बनने से पहले वह विदेश मंत्रालय के मुख्यालय में 'आसियान' देशों से जुड़े विभाग में काम कर रहे थे। वह गोवा में आयोजित ब्र‍िक्‍स शिखर सम्मेलन समेत कई बहुपक्षीय सम्मेलनों के आयोजन से भी जुड़े रहे हैं।

संजीव जैन दक्षिण कोरिया में मौजूदा भारतीय राजदूत गौरंगलाल दास की जगह लेंगे।

भारत और दक्षिण कोरिया के बीच 10 दिसंबर 1973 को राजनयिक संबंध स्थापित हुए थे। दोनों देशों के बीच वाणिज्य दूतावास स्तर के संबंध 1962 में शुरू हुए थे। साल 2010 में दोनों देशों ने अपने रिश्तों को 'स्ट्रैटेजिक पार्टनरशिप' का दर्जा दिया, जिसे 2015 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सोल यात्रा के दौरान बढ़ाकर 'स्पेशल स्ट्रैटेजिक पार्टनरशिप' कर दिया गया। साल 2023 में दोनों देशों ने अपने राजनयिक संबंधों के 50 साल पूरे होने का जश्न भी मनाया।

दक्षिण कोरिया के राष्ट्रपति ली जे म्युंग ने इस साल 19 से 21 अप्रैल के बीच भारत का राजकीय दौरा किया। राष्ट्रपति बनने के बाद उनका यह भारत का पहला दौरा था और पद संभालने के बाद किसी भी दक्षिण कोरियाई राष्ट्रपति की यह सबसे शुरुआती भारत यात्रा भी थी। उनके साथ एक उच्च स्तरीय प्रतिनिधिमंडल भी आया था, जिसमें कई मंत्री, वरिष्ठ अधिकारी और दक्षिण कोरिया की बड़ी कंपनियों के प्रमुख (सीईओ) शामिल थे।


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