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लेजर और माइक्रोवेव के जरिए दुश्‍मन ड्रोन को ग‍िराने की तैयारी, अमेर‍िकी सेना करेगी परीक्षण

वॉशिंगटन, अमेरिकी सेना दुश्मन ड्रोन को निष्क्रिय करने करने के ल‍िए खास तैयारी कर रही है। सेना के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया क‍ि इसके ल‍िए हाई-एनर्जी लेजर और हाई-पावर माइक्रोवेव तकनीकों का एक साल तक संचालन संबंधी परीक्षण करने की योजना है।

लेजर और माइक्रोवेव के जरिए दुश्‍मन ड्रोन को ग‍िराने की तैयारी, अमेर‍िकी सेना करेगी परीक्षण
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वॉशिंगटन, अमेरिकी सेना दुश्मन ड्रोन को निष्क्रिय करने करने के ल‍िए खास तैयारी कर रही है। सेना के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया क‍ि इसके ल‍िए हाई-एनर्जी लेजर और हाई-पावर माइक्रोवेव तकनीकों का एक साल तक संचालन संबंधी परीक्षण करने की योजना है।

जॉइंट इंटरएजेंसी टास्क फोर्स 401 के निदेशक ब्रिगेडियर जनरल मैट रॉस ने बताया कि इन प्रणालियों को एक सैन्य ठिकाने पर लगाया जाएगा, जहां सैनिक 365 दिनों तक इन्हें चलाएंगे और इनका रखरखाव करेंगे।

इस परीक्षण का मकसद यह पता लगाना है कि बिना सैन्य अड्डे के जरूरी कामकाज में रुकावट पैदा किए या आसपास के हवाई क्षेत्र को प्रभावित किए इन डायरेक्टेड-एनर्जी हथियारों का भरोसेमंद तरीके से उपयोग किया जा सकता है या नहीं।

मीडिया के साथ बातचीत के दौरान रॉस ने कहा, "यह एक डायरेक्टेड-एनर्जी पायलट प्रोजेक्ट है।"

उन्होंने बताया कि 'डायरेक्टेड एनर्जी' शब्द का इस्तेमाल कई नई तकनीकों के लिए किया जाता है, लेकिन फिलहाल उनका मुख्य ध्यान हाई-एनर्जी लेजर और हाई-पावर माइक्रोवेव पर है।

रॉस ने कहा कि शुरुआती परीक्षणों में यह साबित हो चुका है कि दोनों तकनीकें ड्रोन को नष्ट या निष्क्रिय कर सकती हैं। अब अगला कदम यह देखना है कि वास्तविक परिस्थितियों में लंबे समय तक इनका प्रदर्शन कैसा रहता है।

उन्होंने कहा क‍ि हमारे पास कई सिस्टम हैं और हमने साबित कर दिया है कि यह तकनीक काम करती है। हाई-एनर्जी लेजर और हाई-पावर माइक्रोवेव दोनों से ड्रोन को रोका जा सकता है। लेकिन अब हमें यह समझना है कि इन्हें वास्तविक सैन्य अभियानों में सफलतापूर्वक कैसे इस्तेमाल किया जाए।

इस पायलट परियोजना के दौरान यह भी जांचा जाएगा कि इन प्रणालियों को कितनी बिजली चाहिए, इनके रखरखाव पर कितना खर्च आता है, इन्हें चलाने की लागत क्या है और साल भर में कितने दिन ये पूरी तरह काम करने की स्थिति में रहती हैं। अधिकारी यह भी देखेंगे कि इन हथियारों की मरम्मत या तकनीकी सहायता के लिए कब और कितनी बार विशेषज्ञ कर्मचारियों की जरूरत पड़ती है।

रॉस ने कहा क‍ि मैं चाहता हूं कि इन प्रणालियों को किसी सैन्य ठिकाने पर लगाया जाए और हमारे सैनिक खुद इन्हें चलाएं, इस्तेमाल करें और इनका रखरखाव करें। मैं यह जानना चाहता हूं कि 365 दिनों में इनकी बिजली की जरूरत कितनी रहती है। साल में कितने दिन ये इस्तेमाल के लिए पूरी तरह तैयार रहती हैं और कितने दिन इन्हें मरम्मत की जरूरत पड़ती है।

इस परीक्षण से मिली जानकारी के आधार पर सेना यह तुलना कर सकेगी कि ड्रोन गिराने के लिए इस्तेमाल होने वाली पारंपरिक तकनीकों की तुलना में ये डायरेक्टेड-एनर्जी सिस्टम कितने प्रभावी और किफायती हैं।

रॉस ने कहा कि सेना को ऐसी रणनीतियां और प्रक्रियाएं भी विकसित करनी होंगी, जिनकी मदद से इन हथियारों का उपयोग किया जा सके और साथ ही सैन्य ठिकाने के आसपास सामान्य हवाई यातायात भी प्रभावित न हो। उन्होंने कहा क‍ि मैं नहीं चाहता कि इन प्रणालियों के उपयोग के दौरान हवाई क्षेत्र को बंद करना पड़े।

होमलैंड सिक्योरिटी विभाग के अधिकारी स्टीव विलॉबी ने कहा कि ड्रोन अब सार्वजनिक सुरक्षा और सरकारी एजेंसियों के लिए बेहद उपयोगी उपकरण बन चुके हैं, लेकिन उनका गलत इस्तेमाल भी किया जा सकता है।

उन्होंने कहा क‍ि ड्रोन लोगों की सुरक्षा करते हैं, हमारी संपत्तियों की रक्षा करते हैं, जान बचाने में मदद करते हैं और कम संसाधनों में ज्यादा काम करने की सुविधा देते हैं, जो मौजूदा सरकारी माहौल में बेहद महत्वपूर्ण है। उन्होंने कहा क‍ि दूसरी तरफ हमारी चुनौती यह है कि ड्रोन के अच्छे उपयोग को बढ़ावा दिया जाए और उनके गलत इस्तेमाल को रोका जाए।

अधिकारियों के अनुसार, इसके कार्यों में संभावित खतरों की रोकथाम, तैयारी, ड्रोन की पहचान, उन्हें निष्क्रिय करना, विस्फोटक सुरक्षा, फॉरेंसिक जांच, खुफिया जानकारी जुटाना और जांच-पड़ताल शामिल हैं।

यूक्रेन और अन्य संघर्षों में अपेक्षाकृत सस्ते मानव रहित विमानों (ड्रोन) के बढ़ते उपयोग के कारण दुनिया भर में एंटी-ड्रोन तकनीकों में दिलचस्पी तेजी से बढ़ी है।

लेजर सिस्टम एक समय में किसी एक लक्ष्य को निशाना बना सकते हैं, जबकि हाई-पावर माइक्रोवेव सिस्टम एक साथ कई ड्रोन के इलेक्ट्रॉनिक सिस्टम को बाधित या निष्क्रिय कर सकते हैं।


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