जी7 शिखर सम्मेलन में दुनिया के नेताओं को पीएम मोदी ने दिए खास उपहार
नई दिल्ली, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जी7 शिखर सम्मेलन के दौरान वैश्विक नेताओं को भारत की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत, पारंपरिक ज्ञान और स्थानीय शिल्पकला से जुड़े विशेष उपहार भेंट किए।

नई दिल्ली, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जी7 शिखर सम्मेलन के दौरान वैश्विक नेताओं को भारत की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत, पारंपरिक ज्ञान और स्थानीय शिल्पकला से जुड़े विशेष उपहार भेंट किए। इन उपहारों में राजस्थान की प्रसिद्ध नागौरी अश्वगंधा, जम्मू-कश्मीर की रंबन शहद (हनी) और वाराणसी का पारंपरिक बनारसी सिल्क स्टोल शामिल रहे।
राजस्थान के नागौर जिले में उगाई जाने वाली नागौरी अश्वगंधा अपनी उच्च गुणवत्ता और अधिक विथेनोलाइड मात्रा के लिए प्रसिद्ध है। शुष्क जलवायु और रेतीली मिट्टी में तैयार होने वाली इस औषधीय जड़ी-बूटी को भौगोलिक संकेतक (जीआई) टैग भी प्राप्त है। आयुर्वेद में इसे ‘रसायन’ औषधि माना जाता है, जो शरीर की ऊर्जा, मानसिक क्षमता, रोग प्रतिरोधक क्षमता और समग्र स्वास्थ्य को बढ़ाने में सहायक मानी जाती है। यह उत्पाद ग्रामीण आजीविका को भी मजबूत करता है और पारंपरिक आयुर्वेदिक ज्ञान को आधुनिक वैज्ञानिक शोध से जोड़ने का प्रतीक है।
जम्मू-कश्मीर की चिनाब घाटी में तैयार होने वाली रंबन हनी अपनी प्राकृतिक गुणवत्ता और विशिष्ट स्वाद के लिए जानी जाती है। हिमालयी वनस्पतियों और जंगली फूलों के रस से तैयार इस शहद में प्राकृतिक एंटीऑक्सीडेंट, एंजाइम और कई जैव-सक्रिय तत्व पाए जाते हैं। स्थानीय मधुमक्खी पालकों द्वारा पारंपरिक और पर्यावरण-अनुकूल तरीकों से तैयार की जाने वाली यह शहद क्षेत्र की जैव विविधता, सांस्कृतिक विरासत और प्रकृति के साथ सामंजस्यपूर्ण जीवन शैली का प्रतीक है।
वाराणसी में हाथों से बुना जाने वाला बनारसी सिल्क स्टोल भारतीय वस्त्र परंपरा का उत्कृष्ट उदाहरण है। महीन रेशम और जरी की बारीक कारीगरी से तैयार इस स्टोल पर प्रकृति से प्रेरित आकर्षक डिज़ाइन बनाए जाते हैं। जीआई टैग प्राप्त बनारसी सिल्क भारत की सबसे प्रतिष्ठित हस्तकरघा परंपराओं में से एक है। यह न केवल बुनकर समुदाय की आजीविका का आधार है, बल्कि भारतीय संस्कृति, शिल्प कौशल और सदियों पुरानी कलात्मक विरासत का भी प्रतीक है।
प्रधानमंत्री मोदी द्वारा दिए गए ये उपहार भारत की ‘लोकल फॉर ग्लोबल’ सोच, पारंपरिक ज्ञान, जैव विविधता और हस्तशिल्प की वैश्विक पहचान को मजबूत करने का संदेश देते हैं।


