नेतन्याहू का बड़ा बयान: अब अमेरिका की आर्थिक मदद की जरूरत नहीं, ईरान पर तीसरी कार्रवाई की भी दी चेतावनी
नेतन्याहू ने कहा कि इजराइल अब आर्थिक रूप से इतना सक्षम हो चुका है कि उसे अमेरिकी आर्थिक सहायता की आवश्यकता नहीं है। उन्होंने यह भी दोहराया कि यदि राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए जरूरत पड़ी तो इजराइल ईरान के खिलाफ फिर से सैन्य कार्रवाई करने से पीछे नहीं हटेगा।

यरुशलम: मध्य पूर्व की राजनीति में लंबे समय से अमेरिका और इजराइल को सबसे करीबी सहयोगियों में गिना जाता रहा है। हालांकि हाल के महीनों में ईरान, क्षेत्रीय सुरक्षा और कूटनीतिक रणनीति को लेकर दोनों देशों के बीच दृष्टिकोण में कुछ मतभेदों की चर्चा होती रही है। इसी बीच इजराइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने ऐसा बयान दिया है, जिसने दोनों देशों के भविष्य के आर्थिक और रणनीतिक संबंधों को लेकर नई बहस छेड़ दी है। नेतन्याहू ने कहा कि इजराइल अब आर्थिक रूप से इतना सक्षम हो चुका है कि उसे अमेरिकी आर्थिक सहायता की आवश्यकता नहीं है। उन्होंने यह भी दोहराया कि यदि राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए जरूरत पड़ी तो इजराइल ईरान के खिलाफ फिर से सैन्य कार्रवाई करने से पीछे नहीं हटेगा।
अमेरिकी आर्थिक सहायता समाप्त करने की इच्छा
एक सार्वजनिक संबोधन में प्रधानमंत्री नेतन्याहू ने कहा कि वह अमेरिका से मिलने वाली आर्थिक सहायता को चरणबद्ध तरीके से समाप्त करना चाहते हैं। उनके अनुसार, इजराइल की अर्थव्यवस्था अब इतनी मजबूत हो चुकी है कि देश अपने संसाधनों के बल पर आगे बढ़ सकता है। उन्होंने कहा कि वह चाहते हैं कि यह प्रक्रिया जल्द शुरू हो और भविष्य में इजराइल अपनी आर्थिक जरूरतों के लिए पूरी तरह आत्मनिर्भर बने। उनके मुताबिक, किसी भी विकसित और मजबूत अर्थव्यवस्था को स्थायी रूप से बाहरी सहायता पर निर्भर नहीं रहना चाहिए।
‘इजराइल की अर्थव्यवस्था अब परिपक्व है’
नेतन्याहू ने अपने संबोधन में कहा कि इजराइल अब एक छोटी अर्थव्यवस्था नहीं रहा। उन्होंने दावा किया कि देश की आर्थिक क्षमता और विकास दर उसे अपनी आवश्यकताओं को स्वयं पूरा करने में सक्षम बनाती है। उनके अनुसार, अमेरिका से मिलने वाली सहायता अब इजराइल की कुल अर्थव्यवस्था का बहुत छोटा हिस्सा रह गई है और देश अपने संसाधनों से उस कमी को आसानी से पूरा कर सकता है। उन्होंने इसे आर्थिक आत्मनिर्भरता की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम बताया।
फिलिस्तीन मुद्दे पर दोहराया सरकार का रुख
प्रधानमंत्री ने अपने संबोधन में फिलिस्तीन के मुद्दे पर भी सरकार की मौजूदा नीति दोहराई। उन्होंने कहा कि इजराइल अपनी सुरक्षा और राष्ट्रीय हितों को सर्वोच्च प्राथमिकता देता रहेगा। नेतन्याहू ने कहा कि उनकी सरकार फिलिस्तीनी राज्य की स्थापना के पक्ष में नहीं है और इजराइल अपनी मौजूदा सुरक्षा नीति पर कायम रहेगा। उन्होंने यह भी कहा कि देश केवल सीमाओं की रक्षा तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि संभावित खतरों के खिलाफ सक्रिय रणनीति अपनाएगा।
ईरान को लेकर सख्त चेतावनी
अपने भाषण में नेतन्याहू ने ईरान का भी उल्लेख किया और कहा कि इजराइल अपनी सुरक्षा से कोई समझौता नहीं करेगा। उन्होंने दावा किया कि इजराइल पहले भी अपनी सुरक्षा जरूरतों के तहत ईरान से जुड़े ठिकानों के खिलाफ कार्रवाई कर चुका है। उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा कि यदि भविष्य में राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए आवश्यकता महसूस हुई तो इजराइल तीसरी बार भी ऐसी कार्रवाई करने से नहीं हिचकेगा। हालांकि उन्होंने किसी संभावित अभियान के समय या स्वरूप को लेकर कोई अतिरिक्त जानकारी नहीं दी।
क्षेत्रीय सुरक्षा पर आक्रामक रणनीति
नेतन्याहू ने कहा कि बदलते सुरक्षा परिदृश्य में इजराइल केवल रक्षात्मक नीति पर निर्भर नहीं रह सकता। उनके अनुसार, सुरक्षा एजेंसियां और सेना संभावित खतरों का पहले से आकलन कर आवश्यक कदम उठाने की रणनीति पर काम करती रहेंगी। उन्होंने कहा कि इजराइल का उद्देश्य केवल अपने नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करना है और इसके लिए आवश्यक होने पर सक्रिय सैन्य कदम भी उठाए जा सकते हैं।
बयानों के कूटनीतिक मायने
विशेषज्ञों का मानना है कि नेतन्याहू के बयान का अर्थ यह नहीं है कि अमेरिका और इजराइल के रणनीतिक संबंध समाप्त हो रहे हैं। दोनों देशों के बीच रक्षा, खुफिया सहयोग और तकनीकी साझेदारी लंबे समय से मजबूत रही है। हालांकि, आर्थिक सहायता को लेकर उनका यह रुख इजराइल की आत्मनिर्भरता पर जोर देने वाला राजनीतिक संदेश माना जा रहा है।
वहीं, ईरान को लेकर दिए गए बयान को क्षेत्रीय सुरक्षा और मध्य पूर्व की मौजूदा परिस्थितियों के संदर्भ में देखा जा रहा है। इस पर अमेरिका, ईरान और अन्य क्षेत्रीय देशों की प्रतिक्रिया पर भी अंतरराष्ट्रीय समुदाय की नजर बनी हुई है।


