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बांग्लादेश में खसरे का कहर, मौत का आंकड़ा पहुंचा 805

ढाका, बांग्लादेश में खसरे का प्रकोप जारी है। गुरुवार को इस बीमारी जैसे लक्षणों वाले दो और बच्चों की मौत हो गई। इसके साथ ही मरने वालों की कुल संख्या बढ़कर 805 हो गई है।

बांग्लादेश में खसरे का कहर, मौत का आंकड़ा पहुंचा 805
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ढाका, बांग्लादेश में खसरे का प्रकोप जारी है। गुरुवार को इस बीमारी जैसे लक्षणों वाले दो और बच्चों की मौत हो गई। इसके साथ ही मरने वालों की कुल संख्या बढ़कर 805 हो गई है।

डायरेक्टोरेट जनरल ऑफ हेल्थ सर्विसेज (डीजीएचएस) के मुताबिक, गुरुवार सुबह तक के पिछले 24 घंटों में ये दो मौतें दर्ज की गईं। बांग्लादेशी समाचार एजेंसी 'यूएनबी' के अनुसार, इन दोनों मौतों को फिलहाल संदिग्ध खसरे से हुई मौत माना गया है।

रिपोर्ट के मुताबिक, खसरे से हुई पुष्टि की गई मौतों की संख्या अभी भी 95 है, लेकिन संदिग्ध मौतों का आंकड़ा बढ़कर 710 हो गया है।

डीजीएचएस ने पिछले 24 घंटों में खसरे के 848 नए संदिग्ध मामले दर्ज किए। इसके साथ ही 15 मार्च से अब तक संदिग्ध मामलों की कुल संख्या 1,21,200 हो गई है।

इसी दौरान खसरे के 166 नए पुष्टि किए गए मामले भी सामने आए, जिससे कुल पुष्टि किए गए मामलों की संख्या बढ़कर 15,007 हो गई।

बढ़ते स्वास्थ्य संकट के बीच एक रिपोर्ट में कहा गया है कि खसरे से हर दिन औसतन लगभग चार बच्चों की मौत हो रही है और रोज 800 से ज्‍यादा लोगों को अस्पताल में भर्ती करना पड़ रहा है। वहीं, सरकार की कोशिशें और लोगों का ध्यान दोनों पहले की तुलना में कम होते दिख रहे हैं।

सरकार का कहना है कि उसने आपातकालीन खसरा टीकाकरण अभियान का लक्ष्य पूरा कर लिया है, लेकिन अस्पतालों में अब भी बिना टीका लगवाए मरीज बड़ी संख्या में पहुंच रहे हैं। इससे साफ है कि टीकाकरण का दायरा अभी भी पर्याप्त नहीं है।

जुलाई के पहले तीन हफ्तों में भी हालात गंभीर बने रहे। डीजीएचएस के आंकड़ों के अनुसार, इस दौरान हर दिन औसतन 1,005 संदिग्ध और पुष्टि किए गए मामले सामने आए, 821 लोगों को अस्पताल में भर्ती करना पड़ा और लगभग चार लोगों की मौत हुई।

बांग्लादेश की प्रमुख अखबार द डेली स्टार के मुताबिक, खसरा और रूबेला खत्म के लिए बनी नेशनल वेरिफिकेशन कमेटी के अध्यक्ष महमूदुर रहमान ने कहा, "हालात में कुछ सुधार जरूर हुआ है, लेकिन टीकाकरण अभियान शुरू होने के दो महीने बाद जितना सुधार होना चाहिए था, उतना नहीं हुआ। लगता है कि अधिकारी इस बात को पूरी तरह समझ नहीं पा रहे हैं।"

स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि यह प्रकोप इसलिए लगातार बना हुआ है क्योंकि करीब 40 लाख बच्चे टीकाकरण से छूट गए। इसके अलावा, अभियान की तय उम्र सीमा से बड़े बच्चों में भी संक्रमण फैला और संक्रमण रोकने के उपाय भी पर्याप्त नहीं रहे।

रहमान ने कहा कि खसरा-रूबेला टीकाकरण अभियान और विटामिन ए अभियान के बीच 40 लाख बच्चों का अंतर इस बात का संकेत है कि बड़ी संख्या में बच्चे अब भी बिना टीके के हैं और संक्रमण के खतरे में हैं।


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