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तीन बार हारी, चौथी बार मैदान में: पेरू राष्ट्रपति पद की दावेदार केको फुजीमोरी कौन ?

लीमा, पेरू की केको फुजीमोरी को हमेशा हारी हुई नेता के तौर पर पहचाना गया। तीन बार राष्ट्रपति चुनाव में किस्मत आजमाई लेकिन हर बार मुंह की खाई, आखिरकार चौथी बार बाजी मार ली। पेरू की राजनीति में 'बदनाम' दिवंगत राष्ट्रपति अल्बर्टो फुजीमोरी की 51 वर्षीय बेटी ने बहुत कम अंतर से जीत हासिल की।

तीन बार हारी, चौथी बार मैदान में: पेरू राष्ट्रपति पद की दावेदार केको फुजीमोरी कौन ?
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लीमा, पेरू की केको फुजीमोरी को हमेशा हारी हुई नेता के तौर पर पहचाना गया। तीन बार राष्ट्रपति चुनाव में किस्मत आजमाई लेकिन हर बार मुंह की खाई, आखिरकार चौथी बार बाजी मार ली। पेरू की राजनीति में 'बदनाम' दिवंगत राष्ट्रपति अल्बर्टो फुजीमोरी की 51 वर्षीय बेटी ने बहुत कम अंतर से जीत हासिल की।

उन्होंने वामपंथी उम्मीदवार रोबर्टो सांचेज को हराने के बाद देश में "व्यवस्था और उम्मीद" बहाल करने का संकल्प जताया है। यह जीत लैटिन अमेरिका में फिर से उभरते दक्षिणपंथ की एक और सफलता मानी जा रही है।

पेरू की एंडियाना न्यूज एजेंसी के अनुसार, 7 जून को हुए राष्ट्रपति पद के दूसरे चरण (रनऑफ) के चुनाव में फुजीमोरी ने बेहद मामूली अंतर से जीत दर्ज की। अंतिम परिणामों के अनुसार, उन्होंने 1.8 करोड़ से अधिक पड़े मतों में से 50,000 से भी कम वोटों के अंतर से सांचेज को हराया। फुजीमोरी की पार्टी फुएरजा पॉपुलर को 50.135 प्रतिशत तो सांचेज की टुगैदर फॉर पेरू पार्टी को 49.865 मत मिले।

पेरू की राष्ट्रीय निर्वाचन जूरी ने विवादित मतपत्रों की समीक्षा में कई सप्ताह लगाए और 3 जुलाई को आधिकारिक रूप से विजेता की घोषणा करने का कार्यक्रम तय किया।

विजेता घोषित किए जाने के बाद फुजीमोरी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा, "हर गुजरते दिन के साथ हम सभी पेरूवासियों के लिए व्यवस्था और उम्मीद के रास्ते पर आगे बढ़ने के और करीब पहुँच रहे हैं।"

यह चुनाव बढ़ते अपराध और लंबे समय से चली आ रही राजनीतिक अस्थिरता के मुद्दों पर लड़ा गया। एंडीज क्षेत्र के इस देश में पिछले दस वर्षों में आठ राष्ट्रपति बदल चुके हैं। पिछले कुछ महीनों में कई ऐसी तस्वीरें सामने आईं जिसमें जेन जी व्यवस्था के खिलाफ सड़क पर उतर कर अपनी आवाज बुलंद करता दिखा।

जबरन वसूली करने वाले गिरोहों और सुपारी देकर कराई जाने वाली हत्याओं में वृद्धि के बीच फुजीमोरी ने अपने पिता की तरह सख्त शासन का वादा किया।

अल्बर्टो फुजीमोरी को माओवादी विद्रोहियों का दमन करने और अत्यधिक महंगाई पर नियंत्रण पाने के लिए सराहा गया था, लेकिन बाद में वे भ्रष्टाचार और आतंकवाद से लड़ाई के नाम पर मानवता के विरुद्ध अपराधों के आरोपों में बदनाम हुए, देश छोड़कर भागे और अंततः जेल भेजे गए।

उधर, रोबर्टो सांचेज ने परिणामों की घोषणा पर तत्काल कोई प्रतिक्रिया नहीं दी। मतगणना के शुरुआती दौर में सांचेज आगे चल रहे थे, लेकिन बाद में फुजीमोरी ने उन्हें पीछे छोड़ दिया।

सांचेज ने पहले ही कहा था कि यदि उनकी प्रतिद्वंद्वी की सरकार बनती है तो वे उसे मान्यता नहीं देंगे। उनका आरोप था कि विदेशों में पड़े वोटों के प्रबंधन में प्रशासनिक अनियमितताएं हुई हैं।

केको फुजीमोरी 28 जुलाई को पांच वर्ष के कार्यकाल के लिए राष्ट्रपति पद की शपथ लेंगी।

लंबे समय तक आक्रामक छवि वाली नेता मानी जाने वाली फुजीमोरी ने इस चुनाव अभियान के दौरान अपनी छवि को नरम और सकारात्मक बनाने का प्रयास किया।

वे 19 वर्ष की आयु में प्रथम महिला (फर्स्ट लेडी) बनी थीं, जब उनकी मां ने सार्वजनिक रूप से अल्बर्टो फुजीमोरी से अलग होने का फैसला किया था। बाद में उन्होंने अमेरिका में व्यवसाय प्रशासन की शिक्षा प्राप्त की।

दशकों से 'फुजीमोरी' नाम उनके लिए एक ओर पहचान, वफादार समर्थकों और मजबूत राजनीतिक नेटवर्क का स्रोत रहा है, तो दूसरी ओर आलोचना का कारण भी।

पेरू के लाखों नागरिक आज भी उनके पिता के शासनकाल की कड़वी यादों के कारण किसी भी फुजीमोरी नाम वाले उम्मीदवार को वोट देने से बचते रहे हैं, जिसके कारण केको तीन बार राष्ट्रपति बनने से चूक गईं।


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