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साउथ कोरिया में बनेगी संयुक्त सैन्य अकादमी, रक्षा मंत्री बोले- भविष्य की चुनौती के लिए जरुरी है सुधार

सोल, दक्षिण कोरिया के रक्षा मंत्री आह्न ग्यु-बैक ने देश की तीनों सैन्य अकादमियों थल सेना, वायु सेना और नौसेना को मिलाकर एक संयुक्त सैन्य अकादमी बनाने की सरकारी योजना का समर्थन किया है। उन्होंने इसे भविष्य की जरूरतों के अनुरूप "बुनियादी सुधार" बताया।

साउथ कोरिया में बनेगी संयुक्त सैन्य अकादमी, रक्षा मंत्री बोले- भविष्य की चुनौती के लिए जरुरी है सुधार
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सोल, दक्षिण कोरिया के रक्षा मंत्री आह्न ग्यु-बैक ने देश की तीनों सैन्य अकादमियों थल सेना, वायु सेना और नौसेना को मिलाकर एक संयुक्त सैन्य अकादमी बनाने की सरकारी योजना का समर्थन किया है। उन्होंने इसे भविष्य की जरूरतों के अनुरूप "बुनियादी सुधार" बताया।

योनहाप न्यूज एजेंसी के अनुसार, रक्षा मंत्री ने सशस्त्र बलों के वरिष्ठ अधिकारियों को भेजे एक पत्र में कहा कि घटती जन्म दर, बदलते सुरक्षा माहौल और सैन्य जरूरतों को देखते हुए सैन्य शिक्षा व्यवस्था में व्यापक बदलाव आवश्यक हैं।

यह पत्र ऐसे समय सामने आया है, जब राष्ट्रपति ली जे-म्युंग सरकार की इस योजना का पूर्व सैन्य अधिकारियों और विभिन्न सैन्य अकादमियों के पूर्व छात्रों के संगठन लगातार विरोध कर रहे हैं।

अपने पत्र में आह्न ने कहा, "अकादमियों के अधीक्षकों से लेकर कैडेट्स तक सभी लोग पूरी मेहनत से काम कर रहे हैं, लेकिन अब केवल मेहनत पर्याप्त नहीं है। अकादमियों के उद्देश्य, शिक्षा प्रणाली, संकाय, बुनियादी ढांचे और प्रशिक्षण पाठ्यक्रम में व्यापक सुधार की जरूरत है।"

रक्षा मंत्री के अनुसार, तीनों सेनाओं के बीच बेहतर तालमेल (जॉइंटनेस) विकसित करना समय की मांग है। उनका कहना है कि कैडेटों को शुरुआत से ही साथ पढ़ने, साथ प्रशिक्षण लेने और साथ सोचने का अवसर मिलना चाहिए, ताकि भविष्य में संयुक्त सैन्य अभियानों के दौरान उनका समन्वय और अधिक मजबूत हो।

आह्न ने यह भी कहा कि हाल के वर्षों में सैन्य अकादमियों में प्रवेश पाने वाले छात्रों के अंक लगातार घट रहे हैं। उनके मुताबिक, यह इस बात का संकेत है कि अकादमियां युवाओं को यह भरोसा दिलाने में सफल नहीं हो रही हैं कि वे यहां अपने करियर और क्षमता का बेहतर विकास कर सकते हैं।

उन्होंने कहा कि संयुक्त सैन्य अकादमी बनने से प्रतिभाशाली युवाओं को बेहतर अवसर मिलेंगे और कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) जैसे आधुनिक क्षेत्रों में विशेष प्रशिक्षण देकर भविष्य की चुनौतियों के लिए तैयार किया जा सकेगा।


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