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जयशंकर ने अमीना मोहम्मद से की मुलाकात

नई दिल्ली, विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने गुरुवार को नई दिल्ली में संयुक्त राष्ट्र की उप महासचिव अमीना जे. मोहम्मद से मुलाकात कर सतत विकास, नवीकरणीय ऊर्जा, जलवायु परिवर्तन और खाद्य सुरक्षा सहित कई वैश्विक मुद्दों पर व्यापक चर्चा की।

जयशंकर ने अमीना मोहम्मद से की मुलाकात
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नई दिल्ली, विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने गुरुवार को नई दिल्ली में संयुक्त राष्ट्र की उप महासचिव अमीना जे. मोहम्मद से मुलाकात कर सतत विकास, नवीकरणीय ऊर्जा, जलवायु परिवर्तन और खाद्य सुरक्षा सहित कई वैश्विक मुद्दों पर व्यापक चर्चा की।

जयशंकर ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा, "आज नई दिल्ली में संयुक्त राष्ट्र की उप महासचिव अमीना जे. मोहम्मद से मुलाकात कर खुशी हुई। सतत विकास, नवीकरणीय ऊर्जा, जलवायु परिवर्तन और खाद्य सुरक्षा सहित विभिन्न विषयों पर व्यापक चर्चा हुई।"

इससे पहले गुरुवार को विदेश मंत्रालय के सचिव (पश्चिम) सिबी जॉर्ज ने भी अमीना मोहम्मद से मुलाकात की। दोनों के बीच भारत-संयुक्त राष्ट्र सहयोग, सतत विकास लक्ष्यों (एसडीजी) को हासिल करने, कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) के परिवर्तनकारी प्रभाव, शांति स्थापना अभियानों, जलवायु परिवर्तन, आपदा जोखिम न्यूनीकरण और संयुक्त राष्ट्र में सुधार जैसे विषयों पर चर्चा हुई।

अमीना मोहम्मद बुधवार को तीन दिवसीय आधिकारिक यात्रा पर भारत पहुंची हैं। संयुक्त राष्ट्र के प्रवक्ता स्टीफन दुजारिक ने उनकी यात्रा से पहले बताया था कि वह भारत सरकार के वरिष्ठ अधिकारियों से मुलाकात कर भारत और संयुक्त राष्ट्र के बीच सहयोग तथा एसडीजी को आगे बढ़ाने में भारत की भूमिका पर चर्चा करेंगी।

यात्रा के दौरान वह भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईटी) के छात्रों से भी मुलाकात करेंगी और सतत विकास लक्ष्यों के समर्थन में डिजिटल नवाचार के अवसरों और चुनौतियों पर संवाद करेंगी।

गौरतलब है कि इसी महीने विदेश मंत्री जयशंकर ने अध्ययन दौरे पर भारत आए 17 देशों के संयुक्त राष्ट्र स्थायी प्रतिनिधियों से भी बातचीत की थी। उन्होंने कहा था कि बदलती वैश्विक व्यवस्था में वैश्विक दक्षिण की आकांक्षाओं को प्रतिबिंबित करने वाला सुधारित बहुपक्षवाद समय की जरूरत है।

इसके अलावा, जुलाई में जयशंकर ने न्यूयॉर्क में 2028-29 कार्यकाल के लिए संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (यूएनएससी) की अस्थायी सदस्यता हेतु भारत के अभियान की शुरुआत की थी और अधिक प्रतिनिधित्वपूर्ण, प्रभावी तथा भविष्य के अनुरूप वैश्विक व्यवस्था के लिए भारत का दृष्टिकोण प्रस्तुत किया था।


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