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अंतर्राष्ट्रीय युवा दिवस सिर्फ भविष्य की उम्मीद नहीं बल्कि वर्तमान की ताकत

नई दिल्ली, जिस उम्र में सपनों को पंख मिलते हैं, उसी उम्र में किसी देश की तकदीर भी लिखी जाती है।

अंतर्राष्ट्रीय युवा दिवस सिर्फ भविष्य की उम्मीद नहीं बल्कि वर्तमान की ताकत
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नई दिल्ली, जिस उम्र में सपनों को पंख मिलते हैं, उसी उम्र में किसी देश की तकदीर भी लिखी जाती है। आज का युवा सिर्फ भविष्य की उम्मीद नहीं, बल्कि वर्तमान की ताकत है। दुनिया के सबसे युवा देशों में शामिल भारत के लिए यह ताकत किसी अवसर से कम नहीं। सवाल सिर्फ इतना है कि इस ऊर्जा को सही दिशा कैसे मिले? इसी सवाल और युवा शक्ति की संभावनाओं को सामने रखने का अवसर है 12 अगस्त, जिसे अंतर्राष्ट्रीय युवा दिवस के रुप में जाना जाता है।

अंतर्राष्ट्रीय युवा दिवस युवाओं की भूमिका, उनकी चुनौतियों, अधिकारों और समाज व राष्ट्र के निर्माण में उनके योगदान को रेखांकित करता है। भारत के संदर्भ में इस दिन का महत्व और भी बढ़ जाता है, क्योंकि देश की बड़ी आबादी युवा है और यही पीढ़ी आने वाले दशकों में भारत की आर्थिक, सामाजिक और तकनीकी दिशा तय करने वाली है।

भारत की 65 प्रतिशत से अधिक आबादी 35 वर्ष से कम उम्र की है। यह आंकड़ा भारत के लिए सिर्फ जनसांख्यिकीय विशेषता नहीं, बल्कि एक बड़ा अवसर है। लेकिन, युवा आबादी का लाभ तभी देश को मिलेगा, जब युवाओं को बेहतर शिक्षा, कौशल, रोजगार, उद्यमिता के अवसर और स्वस्थ वातावरण मिले। यही वजह है कि युवा सशक्तिकरण को केवल रोजगार तक सीमित रखने के बजाय शिक्षा, स्किल डेवलपमेंट, स्वास्थ्य, फिटनेस, खेल और राष्ट्रीय सेवा जैसे क्षेत्रों से जोड़ने की जरूरत महसूस की गई है।

युवाओं को प्रेरित करने की बात हो और स्वामी विवेकानंद का नाम न आए, ऐसा असंभव है। स्वामी विवेकानंद ने युवाओं को आत्मविश्वास, चरित्र, अनुशासन और लक्ष्य के प्रति समर्पण का संदेश दिया। उनका जीवन आज भी युवाओं के लिए प्रेरणा का स्रोत है। उनका संदेश- 'उठो, जागो और तब तक मत रुको जब तक लक्ष्य प्राप्त न हो जाए', आज के दौर में भी उतना ही प्रासंगिक है।

भारत में राष्ट्रीय युवा दिवस 12 जनवरी को स्वामी विवेकानंद की जयंती के अवसर पर मनाया जाता है। भारत सरकार ने वर्ष 1984 में इस दिन को राष्ट्रीय युवा दिवस के रूप में मनाने का निर्णय लिया था और 1985 से इसका आयोजन किया गया। वहीं, अंतर्राष्ट्रीय युवा दिवस 12 अगस्त दुनिया भर के युवाओं से जुड़े मुद्दों और उनकी भूमिका पर ध्यान केंद्रित करने का अवसर देता है।

आज के युवा को निर्णय प्रक्रिया, सामाजिक बदलाव और राष्ट्र निर्माण में भागीदार बनाना जरूरी है। यही सोच युवा कार्य एवं खेल मंत्रालय से जुड़े विभिन्न कार्यक्रमों और मंत्रालयों के बीच सहयोग के जरिए विकसित किए जा रहे युवा-केंद्रित इकोसिस्टम में दिखाई देती है। स्किल डेवलपमेंट से लेकर स्टार्टअप तक, खेल से लेकर फिटनेस तक और सामाजिक सेवा से लेकर नागरिक भागीदारी तक, युवाओं के लिए अवसरों का दायरा लगातार व्यापक हो रहा है।

युवा अगर नौकरी तलाशने वाले से आगे बढ़कर नौकरी देने वाला बने, समस्या देखने वाले से आगे बढ़कर समाधान तैयार करने वाला बने और केवल अधिकारों की बात करने के बजाय अपने कर्तव्यों को भी समझे, तो यही बदलाव भारत की विकास यात्रा को नई गति दे सकता है।

आज का युवा पिछली पीढ़ियों से अलग परिस्थितियों में बड़ा हो रहा है। उसके पास जानकारी पहले से कहीं ज्यादा है, लेकिन सूचनाओं की अधिकता अपने साथ नई चुनौतियां भी लेकर आई है। डिजिटल एडिक्शन, सोशल मीडिया का दबाव, फेक न्यूज, करियर को लेकर असमंजस और मानसिक तनाव जैसी चुनौतियां युवा जीवन का हिस्सा बनती जा रही हैं। ऐसे समय में स्वामी विवेकानंद के आत्मअनुशासन, एकाग्रता और चरित्र निर्माण के विचार और महत्वपूर्ण हो जाते हैं। युवा शक्ति को केवल तकनीकी दक्षता नहीं, बल्कि विवेक, संवेदनशीलता और जिम्मेदारी से जोड़ना भी उतना ही जरूरी है।

युवा विकास केवल किताबों और कक्षाओं तक सीमित नहीं है। खेल अनुशासन सिखाता है, योग और ध्यान मानसिक संतुलन देते हैं, सामाजिक सेवा संवेदनशीलता पैदा करती है और नेतृत्व के अवसर आत्मविश्वास बढ़ाते हैं। इसीलिए देशभर में युवा सम्मेलन, खेल प्रतियोगिताएं, सेमिनार, योग-ध्यान सत्र और सामाजिक गतिविधियां आयोजित की जाती हैं। इनका उद्देश्य युवाओं को केवल प्रेरित करना नहीं, बल्कि उन्हें समाज के प्रति अपनी भूमिका समझने के लिए तैयार करना भी है।

भारत ने विकसित भारत 2047 का लक्ष्य रखा है। जब देश आजादी की शताब्दी मनाएगा, तब आज का युवा ही उस भारत का सबसे बड़ा हिस्सा होगा। इसलिए युवा दिवस यह सोचने का अवसर है कि हम अपने युवाओं को किस तरह का भविष्य दे रहे हैं और युवा खुद अपने भविष्य के साथ देश के भविष्य के लिए क्या भूमिका निभा सकते हैं।

युवाओं में ऊर्जा है, प्रतिभा है और बदलाव की क्षमता है। जरूरत उस ऊर्जा को सही दिशा देने की है। स्वामी विवेकानंद का संदेश इसी दिशा की याद दिलाता है, लक्ष्य बड़ा हो, आत्मविश्वास मजबूत हो और प्रयास लगातार जारी रहे।


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