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नेपाल में भारतीय फोरेंसिक दल पंहुचा, साथ मिलकर करेंगे काम

काठमांडू/नई दिल्ली, नेपाल में भारत के राजदूत नवीन श्रीवास्तव ने काठमांडू पहुंचे भारतीय फोरेंसिक टीम से मुलाकात की। ये दल नेपाल की टीम संग मिलकर त्रासदी में जान गंवाने वाले लोगों की पहचान करने में मदद करेगी। इस आपदा के बाद भारत सहित कई देशों के परिवार अपने लापता परिजनों की जानकारी का इंतजार कर रहे हैं।

नेपाल में भारतीय फोरेंसिक दल पंहुचा, साथ मिलकर करेंगे काम
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काठमांडू/नई दिल्ली, नेपाल में भारत के राजदूत नवीन श्रीवास्तव ने काठमांडू पहुंचे भारतीय फोरेंसिक टीम से मुलाकात की। ये दल नेपाल की टीम संग मिलकर त्रासदी में जान गंवाने वाले लोगों की पहचान करने में मदद करेगी। इस आपदा के बाद भारत सहित कई देशों के परिवार अपने लापता परिजनों की जानकारी का इंतजार कर रहे हैं।

विदेश मंत्रालय ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर नेपाल स्थित भारतीय दूतावास की पोस्ट को शेयर करते हुए लिखा, राजदूत नवीन श्रीवास्तव ने नेपाल पहुंचे भारतीय फोरेंसिक टीम के सदस्यों से मुलाकात की। ये टीम अपने नेपाली समकक्षों के साथ मिलकर फ्लैश फ्लड का शिकार हुए लोगों के शवों की पहचान में मदद करने के लिए डीएनए नमूनों का मिलान करेगी।

वहीं, राजदूत श्रीवास्तव की एक्स पोस्ट के मुताबिक, "राहत सामग्री लेकर पहुंची चौथी फ्लाइट में आए भारतीय फोरेंसिक टीम के सदस्यों से काठमांडू में मुलाकात की। वे अपने नेपाली समकक्षों संग मिलकर रसुवा में आई भयानक बाढ़ के दौरान जान गंवाने वालों के डीएनए सैंपल का मिलान करेंगे।

भारत से 11 टन राहत सामग्री लेकर चौथी फ्लाइट रविवार को नेपाल पहुंची। विदेश मंत्रालय ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर बताया कि भारतीय वायुसेना का सी-130 विमान राहत सामग्री के साथ नेपाल पहुंच गया है। इस विमान में सर्च और रेस्क्यू ऑपरेशन में मदद करने वाली एक टनल टेक्निकल टीम और जरूरी उपकरण भेजे गए हैं।

यह मिशन भारत के विदेश मंत्रालय और गृह मंत्रालय की संयुक्त निगरानी में संचालित किया जा रहा है।

नेपाल में 26 अगस्त को मध्य नेपाल और नेपाल-तिब्बत सीमा क्षेत्र में आई भीषण बाढ़ के बाद बड़े स्तर पर खोज और राहत अभियान चलाया जा रहा है। शनिवार तक मृतकों की संख्या 700 पार पहुंच गई है, जबकि 2,000 से ज्यादा लोग अब भी लापता बताए जा रहे हैं।

हजारों लोगों को सुरक्षित निकाला जा चुका है, लेकिन सड़कों, पुलों और अन्य बुनियादी ढांचों को हुए नुकसान के कारण आपदा ग्रस्त क्षेत्रों तक पहुंचने में कठिनाइयां आ रही हैं।


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