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पाकिस्तान में सिख दंपति की गोली मारकर हत्या करने के मामले में भारत ने की कड़ी निंदा

नई दिल्ली/इस्लामाबाद, पाकिस्तान के खैबर पख्तूनख्वा में सेवादार जगन्नाथ और उनकी पत्नी अस्मा वंती को गुरुद्वारे में घुसकर गोली मार दी गई।

पाकिस्तान में सिख दंपति की गोली मारकर हत्या करने के मामले में भारत ने की कड़ी निंदा
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नई दिल्ली/इस्लामाबाद, पाकिस्तान के खैबर पख्तूनख्वा में सेवादार जगन्नाथ और उनकी पत्नी अस्मा वंती को गुरुद्वारे में घुसकर गोली मार दी गई। स्थानीय पुलिस के अनुसार, दंपति की मौके पर ही मौत हो गई। सरहद पार हुए इस जघन्य वारदात पर दुनिया भर के सिखों में आक्रोश है। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर इसके विरोध में आवाजें उठ रही हैं। वहीं, भारत में शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी (एसजीपीसी) ने भी इस पर चिंता जताई है तो भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय प्रवक्ता आरपी सिंह ने भी सख्त शब्दों में इसकी निंदा की है।

आरपी सिंह ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर अपना दर्द और गुस्सा जाहिर किया। उन्होंने कहा, "पाकिस्तान एक बार फिर पूरी दुनिया के सामने बेनकाब हो गया है।

पाकिस्तान के खैबर पख्तूनख्वा प्रांत में एक गुरुद्वारे के भीतर निर्मम हत्या केवल एक आपराधिक घटना नहीं, बल्कि यह पाकिस्तान में धार्मिक अल्पसंख्यकों के खिलाफ जारी असुरक्षा, भय और उत्पीड़न की एक और भयावह याद दिलाती है।"

उन्होंने इस वारदात की निंदा करते हुए आगे लिखा, "मैं इस जघन्य घटना की कड़े शब्दों में निंदा करता हूं और शोक संतप्त परिवार तथा विश्वभर के सिख समुदाय के प्रति अपनी गहरी संवेदनाएं व्यक्त करता हूं। इस अपराध के दोषियों की तत्काल पहचान कर उन्हें कानून के कठघरे में लाया जाना चाहिए। पाकिस्तान सरकार को इस हमले के पीछे के कारणों पर भी स्पष्ट जवाब देना चाहिए और बताना चाहिए कि वह अल्पसंख्यक समुदायों तथा उनके धार्मिक स्थलों की सुरक्षा के लिए कौन से ठोस कदम उठा रही है।"

सिंह ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय से भी अपील की कि इस ओर ध्यान दें। उन्होंने कहा कि वह हर बार की तरह चुप नहीं रह सकते। जब पाकिस्तान में अल्पसंख्यकों को निशाना बनाया जाता है, तब मानवाधिकारों और धार्मिक स्वतंत्रता के मुद्दे पर चयनात्मक मौन स्वीकार्य नहीं है। मानवाधिकार और धार्मिक स्वतंत्रता कोई चुनिंदा सिद्धांत नहीं, बल्कि सार्वभौमिक मूल्य हैं।

उन्होंने इसे पाकिस्तान में अल्पसंख्यकों की सुरक्षा को लेकर बरती जा रही ढिलाई का नतीजा करार दिया। आगे बोले, "गुरुद्वारे के भीतर बहाया गया यह खून पाकिस्तान के उन दावों पर एक गहरा कलंक है, जिनमें वह अल्पसंख्यकों की सुरक्षा का दावा करता है। दुनिया जवाब चाहती है और पीड़ितों को न्याय मिलना ही चाहिए।"

वहीं, बुधवार देर शाम को जारी एक बयान में एसजीपीसी अध्यक्ष हरजिंदर सिंह धामी ने हत्या की निंदा करते हुए कहा कि आरोपियों ने एक पवित्र धार्मिक संस्थान की मर्यादा का उल्लंघन किया है, क्योंकि उन्होंने धार्मिक सेवा में लगे एक निर्दोष दंपति को निशाना बनाया।

उन्होंने कहा, “गुरुद्वारे के अंदर एक सिख दंपति की हत्या केवल एक आपराधिक घटना नहीं है, बल्कि यह धार्मिक स्वतंत्रता और अल्पसंख्यकों की सुरक्षा पर गंभीर हमला है।”

एसजीपीसी प्रमुख ने कहा कि इस घटना ने एक बार फिर पाकिस्तान में सिख समुदाय की सुरक्षा और धार्मिक स्थलों की रक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। उन्होंने पाकिस्तान सरकार से इस मामले की जांच करने, दोषियों को जल्द गिरफ्तार करने और उन्हें कड़ी सजा देने की अपील की।

पाकिस्तान के प्रमुख दैनिक डॉन के अनुसार, यह घटना बाबू मोहल्ला इलाके में हुई, जो प्रांतीय राजधानी पेशावर से लगभग 60 किलोमीटर दूर मर्दान जिले में स्थित है।


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