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भारत-मलेशिया रक्षा साझेदारी को मिलेगी नयी ताकत

नई दिल्ली, भारत और मलेशिया के बीच रक्षा विज्ञान, तकनीक और रक्षा उद्योग सहयोग पर बनी जॉइंट सब-कमेटी की 12वीं बैठक शुक्रवार को नई दिल्ली में हुई। इस बैठक में दोनों देशों ने लंबे समय तक साथ मिलकर काम करने और रक्षा उद्योग से जुड़े रिश्तों को और मजबूत बनाने की अपनी प्रतिबद्धता दोहराई।

भारत-मलेशिया रक्षा साझेदारी को मिलेगी नयी ताकत
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नई दिल्ली, भारत और मलेशिया के बीच रक्षा विज्ञान, तकनीक और रक्षा उद्योग सहयोग पर बनी जॉइंट सब-कमेटी की 12वीं बैठक शुक्रवार को नई दिल्ली में हुई। इस बैठक में दोनों देशों ने लंबे समय तक साथ मिलकर काम करने और रक्षा उद्योग से जुड़े रिश्तों को और मजबूत बनाने की अपनी प्रतिबद्धता दोहराई।

भारत के डिफेंस प्रोडक्शन डिपार्टमेंट ने सोशल मीड‍िया प्‍लेटफॉर्म 'एक्स' पर लिखा, "भारत और मलेशिया रक्षा विज्ञान, तकनीक और रक्षा उद्योग सहयोग पर संयुक्त उप-समिति की 12वीं बैठक तीन जुलाई 2026 को नई दिल्ली में आयोजित की गई।"

भारतीय पक्ष की ओर से डिफेंस प्रोडक्शन डिपार्टमेंट, रक्षा मंत्रालय के संयुक्त सचिव (नेवल सिस्टम्स) डॉ. विजय नामदेवराव जादे ने बैठक की सह-अध्यक्षता की। वहीं, मलेशिया की ओर से रक्षा मंत्रालय के रक्षा उद्योग प्रभाग के अंडरसेक्रेटरी मोहद निजाम बिन मोहम्मद खीर ने बैठक की सहअध्यक्षता की।

डिफेंस प्रोडक्शन डिपार्टमेंट ने कहा, "दोनों पक्षों ने लंबे समय तक सहयोग जारी रखने और दोनों देशों के बीच रक्षा उद्योग से जुड़े संबंधों को और मजबूत करने की अपनी प्रतिबद्धता दोहराई।"

इससे पहले बुधवार को भारतीय नौसेना और रॉयल मलेशियाई नौसेना के बीच 11वें स्टाफ टॉक्स का आयोजन नई दिल्ली में हुआ। इस दौरान दोनों देशों ने आपसी सहयोग बढ़ाने, समुद्री साझेदारी को मजबूत करने और इंडियन ओशन रीजन (आईओआर) में समुद्री सुरक्षा के लिए मिलकर काम करने पर चर्चा की।

भारतीय नौसेना के प्रवक्ता ने 'एक्स' पर लिखा, "भारतीय नौसेना और रॉयल मलेशियाई नौसेना के बीच 11वीं स्टाफ वार्ता एक जुलाई 2026 को नई दिल्ली में सफलतापूर्वक संपन्न हुई।"

भारत और मलेशिया के बीच रक्षा संबंध पिछले कई वर्षों में लगातार मजबूत हुए हैं। वर्ष 1993 में दोनों देशों के बीच रक्षा सहयोग पर हस्ताक्षरित समझौता (एमओयू) इन संबंधों की मजबूत नींव माना जाता है। इस समझौते के तहत दोनों देश संयुक्त परियोजनाओं, रक्षा उपकरणों के संयुक्त विकास, खरीद, लॉजिस्टिक्स, रखरखाव और प्रशिक्षण जैसे कई क्षेत्रों में सहयोग बढ़ा सकते हैं।


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