Top
Begin typing your search above and press return to search.

बांग्लादेश में खसरे पर नियंत्रण में देरी, मंत्री बोले- स्थिति गंभीर

ढाका, बांग्लादेश में खसरे या खसरे जैसे लक्षणों के कारण इस साल अब तक 922 बच्चों की मौत हो गई है। आंकड़ा दिन पर दिन बढ़ता जा रहा है। दिनों दिन इस प्रकोप की चपेट में आते बच्चों को फिलहाल राहत मिलती नहीं दिख रही है। करीब दो-तीन महीनों में ही स्थिति सुधर सकती है और बुधवार को ऐसा देश के मंत्री ने कहा। उन्होंने वर्तमान परिस्थिति के लिए पूर्व की सरकारों को जिम्मेदार ठहराया।

बांग्लादेश में खसरे पर नियंत्रण में देरी, मंत्री बोले- स्थिति गंभीर
X

ढाका, बांग्लादेश में खसरे या खसरे जैसे लक्षणों के कारण इस साल अब तक 922 बच्चों की मौत हो गई है। आंकड़ा दिन पर दिन बढ़ता जा रहा है। दिनों दिन इस प्रकोप की चपेट में आते बच्चों को फिलहाल राहत मिलती नहीं दिख रही है। करीब दो-तीन महीनों में ही स्थिति सुधर सकती है और बुधवार को ऐसा देश के मंत्री ने कहा। उन्होंने वर्तमान परिस्थिति के लिए पूर्व की सरकारों को जिम्मेदार ठहराया।

बांग्लादेशी न्यूज एजेंसी यूएनबी के अनुसार, स्वास्थ्य और परिवार कल्याण राज्य मंत्री एम. ए. मुहित ने कहा, "बांग्लादेश को खसरे को काबू में लाने और हालात को बेहतर बनाने में कम से कम दो से तीन महीने लग सकते हैं।"

ढाका के बांग्लादेश शिशु अस्पताल और संस्थान के ऑडिटोरियम में खसरे पर हुई रिसर्च को लेकर बैठक का आयोजन किया गया। इसमें बतौर मुख्य अतिथि उन्होंने कहा, "हमें इस दौरान काम करना होगा, मौतों की संख्या कम करनी होगी और बेहतर प्रबंधन सुनिश्चित करना होगा।"

मुहित ने कहा, " यह उम्मीद करना अव्यावहारिक होगा कि लंबे समय से चली आ रही समस्या को एक दिन या अगले हफ्ते में हल किया जा सकता है। देश की लगभग 80 प्रतिशत आबादी पब्लिक हेल्थकेयर सिस्टम पर निर्भर है और सालों से कुप्रबंधन, भ्रष्टाचार और लापरवाही के कारण यह सेक्टर कई चुनौतियों का सामना कर रहा है।"

उन्होंने कहा कि बांग्लादेश में प्राइवेट अस्पतालों और डायग्नोस्टिक सेंटरों का एक बड़ा नेटवर्क है, जहां क्वालिटी कंट्रोल और मुनाफे से जुड़ी चिंताएं बनी हुई हैं।

बच्चों की हेल्थकेयर के लिए सरकार की भविष्य की योजनाओं के बारे में बताते हुए राज्य मंत्री ने कहा कि मौजूदा सरकार बच्चों की सेहत को सबसे ज्यादा प्राथमिकता दे रही है।

मुहित ने कहा कि हेल्थकेयर वर्करों की कमी को दूर करने के लिए सरकार जल्द ही 5,000 नए डॉक्टर, 1,000 नर्स और 1,00,000 फील्ड-लेवल वर्कर भी भर्ती करेगी।

बैठक में पेश की गई रिसर्च से पता चला कि खसरे के कारण अस्पताल में भर्ती होने वाले 43 प्रतिशत बच्चे तीन से नौ महीने की उम्र के थे। स्टडी में यह भी पाया गया कि 38 प्रतिशत बच्चों को जन्म के बाद पहले छह महीनों तक सिर्फ मां का दूध (एक्सक्लूसिव ब्रेस्टफीडिंग) नहीं मिला था।

हालांकि, जान गंवाने वाले बच्चों में यह आंकड़ा 82 प्रतिशत था, जिससे पता चलता है कि खसरे से मरने वाले बच्चों का एक बड़ा हिस्सा जीवन के पहले छह महीनों के दौरान स्तनपान से वंचित था।

बुधवार सुबह 8:00 बजे तक पिछले 24 घंटों में खसरे जैसे लक्षणों वाले चार और बच्चों की मौत हो गई, जिससे इस साल देश में खसरे की पुष्टि और इसके जैसे लक्षणों से हुई कुल मृतक संख्या 922 हो गई है।


Next Story

Related Stories

All Rights Reserved. Copyright @2019
Share it