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अल-जौफ में जेल पर हवाई हमला

सना, उत्तरी यमन के हूती नियंत्रण वाले अल-जौफ प्रांत में एक जेल पर हवाई हमला हुआ, जिसमें कई लोगों के हताहत होने की खबर है। हूती संचालित अल-मसीरा टीवी ने इस हमले के लिए सऊदी अरब के नेतृत्व वाले सैन्य गठबंधन को जिम्मेदार ठहराया है।

अल-जौफ में जेल पर हवाई हमला
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सना, उत्तरी यमन के हूती नियंत्रण वाले अल-जौफ प्रांत में एक जेल पर हवाई हमला हुआ, जिसमें कई लोगों के हताहत होने की खबर है। हूती संचालित अल-मसीरा टीवी ने इस हमले के लिए सऊदी अरब के नेतृत्व वाले सैन्य गठबंधन को जिम्मेदार ठहराया है।

रिपोर्ट के अनुसार, यह हमला सोमवार को प्रांत की राजधानी अल-हजम में स्थित जेल पर हुआ। इसमें महिलाओं और बच्चों के भी हताहत होने की बात कही गई है।

अल-मसीरा ने जेल निदेशक के हवाले से बताया कि 35 कैदी और अपने पति से मिलने आई एक महिला अब भी मलबे के नीचे फंसे हुए हैं।

टीवी चैनल की ओर से दिखाए गए वीडियो में जेल को भारी नुकसान पहुंचा हुआ दिखाई दिया। साथ ही बचावकर्मी मलबे में फंसे लोगों की तलाश करते नजर आए। स‍िन्हुआ समाचार एजेंसी ने अल-मसीराह टीवी के हवाले से बताया कि इस मामले पर सऊदी अरब की ओर से तुरंत कोई प्रतिक्रिया नहीं आई।

इस बीच, हूती सैन्य प्रवक्ता याह्या सारिया ने सोमवार को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्‍स' पर कहा कि यमन में सऊदी सैन्य कार्रवाइयों का 'जवाब दिया जाएगा।' उन्होंने आरोप लगाया कि इन कार्रवाइयों में हवाई हमले, निगरानी उड़ानें और यमनी सरकारी बलों को हथियारों की आपूर्ति शामिल है।

यमन साल 2014 के अंत से संघर्ष की चपेट में है। उस समय हूती लड़ाकों ने राजधानी सना और उत्तरी यमन के बड़े हिस्से पर कब्जा कर लिया था। इसके बाद 2015 में अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्यता प्राप्त यमनी सरकार के समर्थन में सऊदी अरब के नेतृत्व वाले गठबंधन ने हस्तक्षेप किया था।

संयुक्त राष्ट्र की मध्यस्थता में अप्रैल 2022 में एक युद्धविराम लागू हुआ था, लेकिन छह महीने बाद इसकी अवधि समाप्त हो गई और इसे औपचारिक रूप से आगे नहीं बढ़ाया गया। हालांकि हाल के तनाव बढ़ने तक एक नाजुक और अनौपचारिक युद्धविराम काफी हद तक बना रहा।

हूती समूह ने जुलाई में सऊदी अरब से जुड़े समुद्री जहाजों पर प्रतिबंध लगाने की घोषणा की थी। इसके बाद उसने सऊदी तेल टैंकरों और तेल सुविधाओं पर हमलों की जिम्मेदारी भी ली है।

इसी बीच, यमन के लिए संयुक्त राष्ट्र के विशेष दूत हैंस ग्रंडबर्ग ने कहा है कि हाल ही में विभिन्न मोर्चों पर हुए हूती हमले 'बेहद चिंताजनक घटनाक्रम' हैं, जो संघर्ष को और ज्यादा बढ़ा सकते हैं।

सोमवार को 'एक्‍स' पर जारी एक बयान में ग्रंडबर्ग ने कहा कि आम नागरिकों के मारे जाने और घायल होने, परिवारों के विस्थापित होने तथा नागरिक ढांचे को नुकसान पहुंचने की खबरें 'गहरी चिंता पैदा करने वाली' हैं।

उन्होंने कहा कि अगर फिर से बड़े पैमाने पर लगातार लड़ाई शुरू होती है, तो इसका खामियाजा सबसे ज्यादा आम लोगों को भुगतना पड़ेगा। साथ ही राजनीतिक समाधान तक पहुंचने का रास्ता, जो पहले से ही मुश्किल है, और कठिन हो जाएगा।

ग्रंडबर्ग ने सभी पक्षों से अपील की कि वे 'हर तरह की लड़ाई और हिंसा रोकें', अधिकतम संयम बरतें और तनाव बढ़ने से रोकने के लिए मौजूद संवाद तंत्र का इस्तेमाल करें। इनमें संयुक्त राष्ट्र की मिलिट्री कोऑर्डिनेशन कमेटी भी शामिल है।

उन्होंने कहा कि वह मौजूदा तनाव को कम करने और बातचीत का रास्ता खुला रखने के लिए सभी पक्षों के साथ सीधे संपर्क में बने रहेंगे। साथ ही उन्होंने क्षेत्रीय और अंतरराष्ट्रीय पक्षों से भी अपील की कि वे हालात को शांत करने के लिए अपने प्रभाव का उपयोग करें।


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