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बांग्लादेश में जनमत संग्रह जागरूकता अभियान की शुरुआत

बांग्लादेश की अंतरिम सरकार की सलाहकार परिषद के सदस्यों ने देशव्यापी जनजागरूकता अभियान की शुरुआत कर दी है

बांग्लादेश में जनमत संग्रह जागरूकता अभियान की शुरुआत
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सलाहकार परिषद का जिला-दर-जिला दौरा, जनता को किया जाएगा जागरूक

  • लोकतांत्रिक प्रक्रिया मजबूत करने पर फोकस, व्यापक जनभागीदारी का लक्ष्य
  • चुनाव से पहले अल्पसंख्यकों पर हमलों की आशंका, एजेंसियों ने दी चेतावनी

ढाका। बांग्लादेश की अंतरिम सरकार की सलाहकार परिषद के सदस्यों ने देशव्यापी जनजागरूकता अभियान की शुरुआत कर दी है। यह अभियान आगामी जनमत संग्रह (रेफरेंडम) के महत्व, उद्देश्यों और प्रक्रिया को लेकर आम लोगों को जागरूक करने के लिए चलाया जा रहा है।

अंतरिम सरकार के चुनाव निगरानी और सहयोग से जुड़े सलाहकार परिषद के सदस्य 15 जनवरी से 21 जनवरी तक एक सप्ताह के लिए जिला-दर-जिला दौरा करेंगे। इस दौरान वे आम जनता को रेफरेंडम से संबंधित विभिन्न पहलुओं की जानकारी देंगे और अधिक से अधिक लोगों को इसमें भागीदारी के लिए प्रेरित करेंगे।

अभियान के तहत सलाहकार परिषद के सदस्य स्थानीय प्रशासन, नागरिक समाज के प्रतिनिधियों और विभिन्न वर्गों एवं पेशों से जुड़े लोगों के साथ संवाद करेंगे। इसका उद्देश्य लोकतांत्रिक प्रक्रिया को मजबूत करना और जनमत संग्रह में व्यापक जनभागीदारी सुनिश्चित करना है।

अभियान के पहले दिन, गुरुवार को स्थानीय सरकार मामलों के सलाहकार आदिलुर रहमान खान चटगांव में मौजूद हैं। अपने दौरे के दौरान वे संबंधित अधिकारियों के साथ बैठकों सहित कई निर्धारित कार्यक्रमों में भाग लेंगे।

इधर, खुफिया एजेंसियों ने चेतावनी दी है कि आगामी चुनावों से पहले अल्पसंख्यकों को निशाना बनाए जाने की घटनाएं और बढ़ सकती हैं। जमात और उससे जुड़े अन्य दलों को उम्मीद है कि अल्पसंख्यकों पर हमलों से उनका कट्टर वोट बैंक और मजबूत होगा। यही कारण है कि भारतीय एजेंसियों को चुनाव से पहले और अधिक हिंसक घटनाओं की आशंका है।

अधिकारियों का कहना है कि यूनुस प्रशासन अक्सर इन घटनाओं को अलग-अलग या व्यक्तिगत विवादों का नतीजा बताकर पेश करता है। हालांकि, जांच में लगभग सभी मामलों में यह सामने आया है कि हत्याएं जानबूझकर और विशेष रूप से अल्पसंख्यकों को निशाना बनाकर की गईं।

ढाका। बांग्लादेश की अंतरिम सरकार की सलाहकार परिषद के सदस्यों ने देशव्यापी जनजागरूकता अभियान की शुरुआत कर दी है। यह अभियान आगामी जनमत संग्रह (रेफरेंडम) के महत्व, उद्देश्यों और प्रक्रिया को लेकर आम लोगों को जागरूक करने के लिए चलाया जा रहा है।

अंतरिम सरकार के चुनाव निगरानी और सहयोग से जुड़े सलाहकार परिषद के सदस्य 15 जनवरी से 21 जनवरी तक एक सप्ताह के लिए जिला-दर-जिला दौरा करेंगे। इस दौरान वे आम जनता को रेफरेंडम से संबंधित विभिन्न पहलुओं की जानकारी देंगे और अधिक से अधिक लोगों को इसमें भागीदारी के लिए प्रेरित करेंगे।

अभियान के तहत सलाहकार परिषद के सदस्य स्थानीय प्रशासन, नागरिक समाज के प्रतिनिधियों और विभिन्न वर्गों एवं पेशों से जुड़े लोगों के साथ संवाद करेंगे। इसका उद्देश्य लोकतांत्रिक प्रक्रिया को मजबूत करना और जनमत संग्रह में व्यापक जनभागीदारी सुनिश्चित करना है।

अभियान के पहले दिन, गुरुवार को स्थानीय सरकार मामलों के सलाहकार आदिलुर रहमान खान चटगांव में मौजूद हैं। अपने दौरे के दौरान वे संबंधित अधिकारियों के साथ बैठकों सहित कई निर्धारित कार्यक्रमों में भाग लेंगे।

इधर, खुफिया एजेंसियों ने चेतावनी दी है कि आगामी चुनावों से पहले अल्पसंख्यकों को निशाना बनाए जाने की घटनाएं और बढ़ सकती हैं। जमात और उससे जुड़े अन्य दलों को उम्मीद है कि अल्पसंख्यकों पर हमलों से उनका कट्टर वोट बैंक और मजबूत होगा। यही कारण है कि भारतीय एजेंसियों को चुनाव से पहले और अधिक हिंसक घटनाओं की आशंका है।

अधिकारियों का कहना है कि यूनुस प्रशासन अक्सर इन घटनाओं को अलग-अलग या व्यक्तिगत विवादों का नतीजा बताकर पेश करता है। हालांकि, जांच में लगभग सभी मामलों में यह सामने आया है कि हत्याएं जानबूझकर और विशेष रूप से अल्पसंख्यकों को निशाना बनाकर की गईं।


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