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अमेरिका की महिला सांसद ने ट्रंप की दिमागी हालत पर उठाए सवाल, भरी सभा में रक्षा मंत्री से पूछा- क्या वो कमांडर इन चीफ रहने लायक हैं?
सारा जैकब्स के इस सवाल पर रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ ने कड़ी आपत्ति जताई। उन्होंने इसे राष्ट्रपति का अपमान बताते हुए कहा कि इस तरह के सवाल न केवल अनुचित हैं, बल्कि देश के सर्वोच्च पद की गरिमा के खिलाफ भी हैं। हेगसेथ ने पलटवार करते हुए जैकब्स से पूछा कि क्या उन्होंने यही सवाल पूर्व राष्ट्रपति जो बाइडेन से उनके कार्यकाल के दौरान कभी पूछा था।

वॉशिंगटन। अमेरिका की राजनीति में एक बार फिर तीखी बहस देखने को मिली, जब एक डेमोक्रेटिक सांसद ने राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की मानसिक स्थिति को लेकर सवाल उठाए। यह मुद्दा हाउस आर्म्ड सर्विसेज कमेटी की बैठक के दौरान सामने आया, जहां सैन डिएगो की सांसद सारा जैकब्स ने रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ से सीधे तौर पर पूछा कि क्या ट्रंप कमांडर-इन-चीफ की भूमिका निभाने के लिए मानसिक रूप से पूरी तरह सक्षम हैं। इस सवाल ने बैठक का माहौल गरमा दिया और दोनों पक्षों के बीच तीखी नोकझोंक शुरू हो गई।
सांसद का सवाल, मंत्री की नाराजगीसारा जैकब्स के इस सवाल पर रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ ने कड़ी आपत्ति जताई। उन्होंने इसे राष्ट्रपति का अपमान बताते हुए कहा कि इस तरह के सवाल न केवल अनुचित हैं, बल्कि देश के सर्वोच्च पद की गरिमा के खिलाफ भी हैं। हेगसेथ ने पलटवार करते हुए जैकब्स से पूछा कि क्या उन्होंने यही सवाल पूर्व राष्ट्रपति जो बाइडेन से उनके कार्यकाल के दौरान कभी पूछा था। इस पर जैकब्स ने जवाब दिया कि बाइडेन अब राष्ट्रपति नहीं हैं, जबकि ट्रंप पिछले डेढ़ साल से इस पद पर हैं, इसलिए उनकी कार्यशैली और निर्णयों पर सवाल उठाना जरूरी है।ट्रंप के बयानों और पोस्ट का जिक्रबहस के दौरान जैकब्स ने ट्रंप के कुछ पुराने सोशल मीडिया पोस्ट और बयानों का भी हवाला दिया। उन्होंने विशेष रूप से एक एआई-जनरेटेड तस्वीर का उल्लेख किया, जिसमें ट्रंप को ईसा मसीह के रूप में दिखाया गया था। इसके अलावा उन्होंने ट्रंप के एक कथित बया —“आज रात एक पूरी सभ्यता खत्म हो जाएगी”—का भी जिक्र किया और सवाल उठाया कि ऐसे संदेशों को आम जनता, खासकर उनके मतदाता, कैसे समझें।रक्षा मंत्री का जोरदार बचावहेगसेथ ने इन आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए ट्रंप का बचाव किया। उन्होंने कहा कि ट्रंप एक “दूरदर्शी और तेज निर्णय लेने वाले” कमांडर-इन-चीफ हैं, जो देश और सेना के हितों को सर्वोपरि रखते हैं। उन्होंने जैकब्स की टिप्पणियों को “अपमानजनक” बताते हुए कहा कि वे इस तरह की बातों पर ध्यान नहीं देंगे। उनके अनुसार, ट्रंप के नेतृत्व में अमेरिकी सेना मजबूत स्थिति में है और राष्ट्रीय सुरक्षा को लेकर सरकार पूरी तरह सजग है।पुराने विवादों का भी जिक्रबहस के दौरान हेगसेथ ने यह भी कहा कि डेमोक्रेट्स ने पहले जो बाइडेन के कार्यकाल में उनकी आलोचनाओं को नजरअंदाज किया था। उन्होंने आरोप लगाया कि उस समय बाइडेन की कार्यक्षमता पर उठे सवालों को दबाया गया, जबकि अब ट्रंप को निशाना बनाया जा रहा है। इस बयान ने बहस को और अधिक राजनीतिक रंग दे दिया।तनावपूर्ण वैश्विक माहौल में बढ़ी बहसयह बहस ऐसे समय में सामने आई है, जब अमेरिका और ईरान के बीच तनावपूर्ण हालात बने हुए हैं और दोनों देशों के बीच टकराव की स्थिति बनी हुई है। 28 फरवरी से शुरू हुए इस संघर्ष के बाद ट्रंप प्रशासन की विदेश नीति और सैन्य निर्णयों पर विपक्ष लगातार सवाल उठा रहा है। ऐसे माहौल में राष्ट्रपति की मानसिक स्थिति पर उठे सवालों ने राजनीतिक बहस को और तेज कर दिया है।पहले भी उठ चुके हैं ऐसे सवालयह पहली बार नहीं है जब ट्रंप की कार्यशैली या बयानों को लेकर उनकी मानसिक स्थिति पर सवाल उठाए गए हों। इससे पहले भी कुछ नेताओं और राजनीतिक विश्लेषकों ने उनके सार्वजनिक बयानों और सोशल मीडिया गतिविधियों को लेकर चिंता जताई थी। हालांकि, ट्रंप समर्थक इन आरोपों को राजनीतिक हमला बताते रहे हैं और उनके नेतृत्व की सराहना करते हैं।कमेटी बैठक में गरमाया माहौलहाउस आर्म्ड सर्विसेज कमेटी की इस बैठक में दोनों पक्षों के बीच बहस काफी देर तक चली। हेगसेथ ने स्पष्ट किया कि वे राष्ट्रपति के पद और उसकी गरिमा का सम्मान करते हैं और इस तरह के सवालों को उचित नहीं मानते। वहीं, जैकब्स ने कहा कि जनता के प्रतिनिधि होने के नाते उनका कर्तव्य है कि वे देश के सर्वोच्च पद पर बैठे व्यक्ति की नीतियों और व्यवहार पर सवाल उठाएं।राजनीतिक ध्रुवीकरण और तेज हुआइस घटना ने एक बार फिर यह दिखा दिया है कि अमेरिकी राजनीति में ध्रुवीकरण किस हद तक बढ़ चुका है। जहां एक ओर सत्तापक्ष राष्ट्रपति के नेतृत्व को मजबूत और प्रभावी बता रहा है, वहीं विपक्ष उनके फैसलों और व्यवहार को लेकर लगातार सवाल खड़े कर रहा है। आने वाले समय में यह मुद्दा और अधिक गहराई से राजनीतिक बहस का हिस्सा बन सकता है।
बहस के दौरान जैकब्स ने ट्रंप के कुछ पुराने सोशल मीडिया पोस्ट और बयानों का भी हवाला दिया। उन्होंने विशेष रूप से एक एआई-जनरेटेड तस्वीर का उल्लेख किया, जिसमें ट्रंप को ईसा मसीह के रूप में दिखाया गया था। इसके अलावा उन्होंने ट्रंप के एक कथित बया —“आज रात एक पूरी सभ्यता खत्म हो जाएगी”—का भी जिक्र किया और सवाल उठाया कि ऐसे संदेशों को आम जनता, खासकर उनके मतदाता, कैसे समझें।
रक्षा मंत्री का जोरदार बचावहेगसेथ ने इन आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए ट्रंप का बचाव किया। उन्होंने कहा कि ट्रंप एक “दूरदर्शी और तेज निर्णय लेने वाले” कमांडर-इन-चीफ हैं, जो देश और सेना के हितों को सर्वोपरि रखते हैं। उन्होंने जैकब्स की टिप्पणियों को “अपमानजनक” बताते हुए कहा कि वे इस तरह की बातों पर ध्यान नहीं देंगे। उनके अनुसार, ट्रंप के नेतृत्व में अमेरिकी सेना मजबूत स्थिति में है और राष्ट्रीय सुरक्षा को लेकर सरकार पूरी तरह सजग है।पुराने विवादों का भी जिक्रबहस के दौरान हेगसेथ ने यह भी कहा कि डेमोक्रेट्स ने पहले जो बाइडेन के कार्यकाल में उनकी आलोचनाओं को नजरअंदाज किया था। उन्होंने आरोप लगाया कि उस समय बाइडेन की कार्यक्षमता पर उठे सवालों को दबाया गया, जबकि अब ट्रंप को निशाना बनाया जा रहा है। इस बयान ने बहस को और अधिक राजनीतिक रंग दे दिया।तनावपूर्ण वैश्विक माहौल में बढ़ी बहसयह बहस ऐसे समय में सामने आई है, जब अमेरिका और ईरान के बीच तनावपूर्ण हालात बने हुए हैं और दोनों देशों के बीच टकराव की स्थिति बनी हुई है। 28 फरवरी से शुरू हुए इस संघर्ष के बाद ट्रंप प्रशासन की विदेश नीति और सैन्य निर्णयों पर विपक्ष लगातार सवाल उठा रहा है। ऐसे माहौल में राष्ट्रपति की मानसिक स्थिति पर उठे सवालों ने राजनीतिक बहस को और तेज कर दिया है।पहले भी उठ चुके हैं ऐसे सवालयह पहली बार नहीं है जब ट्रंप की कार्यशैली या बयानों को लेकर उनकी मानसिक स्थिति पर सवाल उठाए गए हों। इससे पहले भी कुछ नेताओं और राजनीतिक विश्लेषकों ने उनके सार्वजनिक बयानों और सोशल मीडिया गतिविधियों को लेकर चिंता जताई थी। हालांकि, ट्रंप समर्थक इन आरोपों को राजनीतिक हमला बताते रहे हैं और उनके नेतृत्व की सराहना करते हैं।कमेटी बैठक में गरमाया माहौलहाउस आर्म्ड सर्विसेज कमेटी की इस बैठक में दोनों पक्षों के बीच बहस काफी देर तक चली। हेगसेथ ने स्पष्ट किया कि वे राष्ट्रपति के पद और उसकी गरिमा का सम्मान करते हैं और इस तरह के सवालों को उचित नहीं मानते। वहीं, जैकब्स ने कहा कि जनता के प्रतिनिधि होने के नाते उनका कर्तव्य है कि वे देश के सर्वोच्च पद पर बैठे व्यक्ति की नीतियों और व्यवहार पर सवाल उठाएं।राजनीतिक ध्रुवीकरण और तेज हुआइस घटना ने एक बार फिर यह दिखा दिया है कि अमेरिकी राजनीति में ध्रुवीकरण किस हद तक बढ़ चुका है। जहां एक ओर सत्तापक्ष राष्ट्रपति के नेतृत्व को मजबूत और प्रभावी बता रहा है, वहीं विपक्ष उनके फैसलों और व्यवहार को लेकर लगातार सवाल खड़े कर रहा है। आने वाले समय में यह मुद्दा और अधिक गहराई से राजनीतिक बहस का हिस्सा बन सकता है।
बहस के दौरान हेगसेथ ने यह भी कहा कि डेमोक्रेट्स ने पहले जो बाइडेन के कार्यकाल में उनकी आलोचनाओं को नजरअंदाज किया था। उन्होंने आरोप लगाया कि उस समय बाइडेन की कार्यक्षमता पर उठे सवालों को दबाया गया, जबकि अब ट्रंप को निशाना बनाया जा रहा है। इस बयान ने बहस को और अधिक राजनीतिक रंग दे दिया।
तनावपूर्ण वैश्विक माहौल में बढ़ी बहसयह बहस ऐसे समय में सामने आई है, जब अमेरिका और ईरान के बीच तनावपूर्ण हालात बने हुए हैं और दोनों देशों के बीच टकराव की स्थिति बनी हुई है। 28 फरवरी से शुरू हुए इस संघर्ष के बाद ट्रंप प्रशासन की विदेश नीति और सैन्य निर्णयों पर विपक्ष लगातार सवाल उठा रहा है। ऐसे माहौल में राष्ट्रपति की मानसिक स्थिति पर उठे सवालों ने राजनीतिक बहस को और तेज कर दिया है।पहले भी उठ चुके हैं ऐसे सवालयह पहली बार नहीं है जब ट्रंप की कार्यशैली या बयानों को लेकर उनकी मानसिक स्थिति पर सवाल उठाए गए हों। इससे पहले भी कुछ नेताओं और राजनीतिक विश्लेषकों ने उनके सार्वजनिक बयानों और सोशल मीडिया गतिविधियों को लेकर चिंता जताई थी। हालांकि, ट्रंप समर्थक इन आरोपों को राजनीतिक हमला बताते रहे हैं और उनके नेतृत्व की सराहना करते हैं।कमेटी बैठक में गरमाया माहौलहाउस आर्म्ड सर्विसेज कमेटी की इस बैठक में दोनों पक्षों के बीच बहस काफी देर तक चली। हेगसेथ ने स्पष्ट किया कि वे राष्ट्रपति के पद और उसकी गरिमा का सम्मान करते हैं और इस तरह के सवालों को उचित नहीं मानते। वहीं, जैकब्स ने कहा कि जनता के प्रतिनिधि होने के नाते उनका कर्तव्य है कि वे देश के सर्वोच्च पद पर बैठे व्यक्ति की नीतियों और व्यवहार पर सवाल उठाएं।राजनीतिक ध्रुवीकरण और तेज हुआइस घटना ने एक बार फिर यह दिखा दिया है कि अमेरिकी राजनीति में ध्रुवीकरण किस हद तक बढ़ चुका है। जहां एक ओर सत्तापक्ष राष्ट्रपति के नेतृत्व को मजबूत और प्रभावी बता रहा है, वहीं विपक्ष उनके फैसलों और व्यवहार को लेकर लगातार सवाल खड़े कर रहा है। आने वाले समय में यह मुद्दा और अधिक गहराई से राजनीतिक बहस का हिस्सा बन सकता है।
यह पहली बार नहीं है जब ट्रंप की कार्यशैली या बयानों को लेकर उनकी मानसिक स्थिति पर सवाल उठाए गए हों। इससे पहले भी कुछ नेताओं और राजनीतिक विश्लेषकों ने उनके सार्वजनिक बयानों और सोशल मीडिया गतिविधियों को लेकर चिंता जताई थी। हालांकि, ट्रंप समर्थक इन आरोपों को राजनीतिक हमला बताते रहे हैं और उनके नेतृत्व की सराहना करते हैं।
कमेटी बैठक में गरमाया माहौलहाउस आर्म्ड सर्विसेज कमेटी की इस बैठक में दोनों पक्षों के बीच बहस काफी देर तक चली। हेगसेथ ने स्पष्ट किया कि वे राष्ट्रपति के पद और उसकी गरिमा का सम्मान करते हैं और इस तरह के सवालों को उचित नहीं मानते। वहीं, जैकब्स ने कहा कि जनता के प्रतिनिधि होने के नाते उनका कर्तव्य है कि वे देश के सर्वोच्च पद पर बैठे व्यक्ति की नीतियों और व्यवहार पर सवाल उठाएं।राजनीतिक ध्रुवीकरण और तेज हुआइस घटना ने एक बार फिर यह दिखा दिया है कि अमेरिकी राजनीति में ध्रुवीकरण किस हद तक बढ़ चुका है। जहां एक ओर सत्तापक्ष राष्ट्रपति के नेतृत्व को मजबूत और प्रभावी बता रहा है, वहीं विपक्ष उनके फैसलों और व्यवहार को लेकर लगातार सवाल खड़े कर रहा है। आने वाले समय में यह मुद्दा और अधिक गहराई से राजनीतिक बहस का हिस्सा बन सकता है।
इस घटना ने एक बार फिर यह दिखा दिया है कि अमेरिकी राजनीति में ध्रुवीकरण किस हद तक बढ़ चुका है। जहां एक ओर सत्तापक्ष राष्ट्रपति के नेतृत्व को मजबूत और प्रभावी बता रहा है, वहीं विपक्ष उनके फैसलों और व्यवहार को लेकर लगातार सवाल खड़े कर रहा है। आने वाले समय में यह मुद्दा और अधिक गहराई से राजनीतिक बहस का हिस्सा बन सकता है।
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