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मोहम्मद बलूच एक्टिविस्ट की गुमशुदगी के 17 साल

डबलिन, कई अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार संगठनों और कार्यकर्ताओं ने बलूच मानवाधिकार रक्षक सम्मी दीन बलोच के प्रति एकजुटता व्यक्त करते हुए उनके पिता दीन मोहम्मद बलोच के 17 वर्षों से गुमशुदगी (जबरन गायब किए जाने) मामले पर चिंता जताई है।

मोहम्मद बलूच एक्टिविस्ट की गुमशुदगी के 17 साल
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डबलिन, कई अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार संगठनों और कार्यकर्ताओं ने बलूच मानवाधिकार रक्षक सम्मी दीन बलोच के प्रति एकजुटता व्यक्त करते हुए उनके पिता दीन मोहम्मद बलोच के 17 वर्षों से गुमशुदगी (जबरन गायब किए जाने) मामले पर चिंता जताई है। दीन मोहम्मद बलूच नेशनल मूवमेंट (बीएनएम) के प्रमुख नेताओं में से एक रहे हैं।

आयरलैंड स्थित मानवाधिकार संगठन फ्रंट लाइन डिफेंडर्स ने बताया कि 28 जून 2009 को बलूचिस्तान के खुजदार जिले से पाकिस्तानी सुरक्षा बलों द्वारा दीन मोहम्मद को कथित तौर पर हिरासत में लिए जाने के बाद से उनका कोई पता नहीं चल पाया है।

संगठन ने कहा कि एक पिता की तलाश से शुरू हुआ यह संघर्ष अब पाकिस्तान में कथित जबरन गुमशुदगी के खिलाफ सबसे प्रमुख आंदोलनों में से एक बन चुका है।

फ्रंट लाइन डिफेंडर्स ने अपने बयान में कहा, "बलूचिस्तान में कई वर्षों से जबरन गुमशुदगी को दमन के एक माध्यम के रूप में इस्तेमाल किए जाने के आरोप लगते रहे हैं। संगठन के अनुसार, लापता लोगों के परिवारों विशेषकर माताओं, पत्नियों, बहनों और बेटियों को भी कथित तौर पर प्रताड़ना का सामना करना पड़ता है।"

संगठन ने आरोप लगाया कि सम्मी दीन बलोच के घर पर कई बार छापे मारे गए, उनकी निगरानी की गई, उनके खिलाफ ऑनलाइन दुष्प्रचार किया गया और मानवाधिकार गतिविधियों के कारण उन्हें कई बार मनमाने ढंग से गिरफ्तार भी किया गया।

फ्रंट लाइन डिफेंडर्स ने पाकिस्तान सरकार से दीन मोहम्मद की स्थिति और ठिकाने की जानकारी सार्वजनिक करने, उनकी सुरक्षित रिहाई सुनिश्चित करने तथा सम्मी दीन और अन्य प्रभावित परिवारों के खिलाफ कथित उत्पीड़न, निगरानी और प्रतिशोधात्मक कार्रवाइयों को रोकने की मांग की।

इसी तरह, एमनेस्टी इंटरनेशनल ने भी दीन मोहम्मद की लगातार गुमशुदगी पर गहरी चिंता व्यक्त की। संगठन ने कहा कि 28 जून 2009 को उन्हें खुजदार सिविल अस्पताल से उठाया गया था और अदालतों में कई याचिकाओं, अधिकारियों से अपील तथा परिवार के लंबे अभियान के बावजूद आज तक उनका कोई पता नहीं चल सका है।

इस बीच, बलूच नेशनल मूवमेंट (बीएनएम) ने ब्रिटेन और दक्षिण कोरिया में विरोध प्रदर्शन कर दीन मोहम्मद की कथित गुमशुदगी के मुद्दे को उठाया।

बीएनएम के अनुसार, "लंदन में पीएम आवास 10 डाउनिंग स्ट्रीट के बाहर हुए प्रदर्शन का उद्देश्य ब्रिटेन सरकार, संयुक्त राष्ट्र, अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार संगठनों और वैश्विक समुदाय का ध्यान बलूचिस्तान की बिगड़ती सामाजिक-राजनीतिक स्थिति की ओर आकर्षित करना था।"

प्रदर्शन के दौरान वक्ताओं ने दीन मोहम्मद की 17 वर्षों से जारी कथित गुमशुदगी, गैरकानूनी हिरासत और यातना की निंदा करते हुए इसे गंभीर मानवाधिकार उल्लंघन बताया।

बीएनएम ने आरोप लगाया कि बलूचिस्तान में जबरन गुमशुदगी अब एक संगठित सरकारी नीति का रूप ले चुकी है, जिसके कारण हजारों बलूच परिवार प्रभावित हुए हैं और राजनीतिक कार्यकर्ताओं के परिजनों को भी निशाना बनाया जा रहा है।

दक्षिण कोरिया में आयोजित प्रदर्शन के दौरान बीएनएम कार्यकर्ताओं ने दावा किया कि दीन मोहम्मद पिछले 17 वर्षों से पाकिस्तान सेना की हिरासत में हैं। उन्होंने पाकिस्तानी अधिकारियों की जवाबदेही तय करने और बलूचिस्तान के मुद्दे पर अंतरराष्ट्रीय समुदाय से समर्थन की अपील की।

प्रदर्शनकारियों ने कहा कि कथित जबरन गुमशुदगी से प्रभावित परिवारों के दर्द और पीड़ा पर अंतरराष्ट्रीय समुदाय को गंभीरता से ध्यान देना चाहिए।

प्रदर्शन के दौरान वक्ताओं ने बलूच यकजेहती कमेटी (बीवाईसी) की नेता महरंग बलोच, सिबगतुल्लाह बलोच और बलूच स्टूडेंट्स ऑर्गनाइजेशन (बीएसओ) अध्यक्ष बलाच कादिर को कथित रूप से "गोपनीय मुकदमों" के जरिए सुनाई गई आजीवन कारावास की सजा की भी आलोचना की और आरोप लगाया कि पाकिस्तान ने बलूच लोगों के मौलिक अधिकारों का हनन किया है।


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