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नागेश सिंह: पीएम मोदी के ऑस्ट्रेलिया दौरे से रणनीतिक रिश्तो को बल

मेलबर्न, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी छह दिवसीय दौरे के दूसरे चरण में ऑस्ट्रेलिया पहुंचेंगे। पीएम मोदी के दौरे से पहले ऑस्ट्रेलिया में भारत के उच्चायुक्त नागेश सिंह ने भारत-ऑस्ट्रेलिया संबंधों, पीएम मोदी के ऑस्ट्रेलिया दौरे, वार्षिक समिट, मेलबर्न क्रिकेट ग्राउंड इवेंट, भारतीय समुदाय, हिंद-प्रशांत और वैश्विक शांति के लिए सहयोग को लेकर न्यूज एजेंसी आईएएनएस से बात की।

नागेश सिंह:  पीएम मोदी के ऑस्ट्रेलिया दौरे से रणनीतिक रिश्तो को बल
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मेलबर्न, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी छह दिवसीय दौरे के दूसरे चरण में ऑस्ट्रेलिया पहुंचेंगे। पीएम मोदी के दौरे से पहले ऑस्ट्रेलिया में भारत के उच्चायुक्त नागेश सिंह ने भारत-ऑस्ट्रेलिया संबंधों, पीएम मोदी के ऑस्ट्रेलिया दौरे, वार्षिक समिट, मेलबर्न क्रिकेट ग्राउंड इवेंट, भारतीय समुदाय, हिंद-प्रशांत और वैश्विक शांति के लिए सहयोग को लेकर न्यूज एजेंसी आईएएनएस से बात की।

पीएम मोदी के दौरे को लेकर ऑस्ट्रेलिया में भारत के उच्चायुक्त नागेश सिंह ने कहा, "पिछले दस सालों में पीएम मोदी का तीसरी बार यहां आना एक बड़ा संकेत है कि पिछले एक दशक में दोनों देशों के संबंध तेज गति से बढ़ रही है। इसे 2020 में हमने व्यापक रणनीतिक साझेदारी का दग्जा दिया था। इसे जब हम व्यापक बोलते हैं, तो फिर रक्षा और सुरक्षा हो या व्यापर और निवेश हो, स्वच्छ ऊर्जा या लोगों में आपसी जुड़ाव हो, एक प्रगाढ़ संबध विकसित हो रहा है।"

उन्होंने कहा कि इसका कारण यह है कि आज विश्व में जो हालात है, वो हमारे दोंनों देशों को एकसाथ ला रहे हैं। हम चाहते हैं कि हिंद-प्रशांत एक ऐसा स्वतंत्र क्षेत्र हो जहां शांति, समृद्धि हो। इसके अलावा राजनीतिक स्तर पर अगर हम देखें, तो दोनों देश लोकतांत्रिक हैं। हम चाहते हैं कि स्थिरता के माहौल में देश की जनता की सेवा कर सकें, विकास हो, ये और बढ़ता जाएगा। पिछले एक डेढ़ सालों मनें जो माहौल रहे हैं, खाड़ी में युद्ध हुए, पश्चिम एशिया में युद्ध चला, ऐसे में भारत और ऑस्ट्रेलिया के बीच का संबंध एक स्थिर प्लेटफॉर्म पर है और ये काफी आगे बढ़ेगा।

भारतीय उच्चायुक्त ने कहा, "ऑस्ट्रेलिया के पास बहुत रिसोर्स है। इनके पास हर तरह के खनिज हैं, जो हमें चाहिए। हमारा मार्केट बहुत बड़ा है। ऑस्ट्रेलिया के पास तकनीक है, हम बड़े स्तर पर मैन्युफैक्चरिंग कर सकते हैं। सबसे बड़ा कनेक्शन लोगों से लोगों का जुड़ाव है। ऑस्ट्रेलिया में भारतीय मूल के 10 लाख लोग हैं। वो यहां बहुत अच्छे पदों पर, व्यवसाय और राजनीति में हैं। यह दोनों देशों के बीच एक पुल है।"

भारत-ऑस्ट्रेलिया वार्षिक समिट को लेकर उन्होंने कहा कि यह तीसरा वार्षिक लीडर्स समिट है। भारत का बहुत कम देशों के साथ इस तरह का संबंध है, जहां हर साल एक लीडर एक-दूसरे के देश में जाते हैं। इस साल पीएम मोदी यहां आ रहे हैं, इससे पहले पीएम अल्बनीज भारत गए थे। ऐसे ही हमारा जापान रूस के साथ है। हालांकि भारत का ज्यादा देशों के साथ ऐसा संबंध है नहीं, लेकिन यह दर्शाता है कि इन देशों के साथ हमारे संबंध कितने प्रगाढ़ होते जा रहे हैं।

ऑस्ट्रेलिया में पीएम मोदी के कार्यक्रम को लेकर उन्होंने कहा, "मार्बल अरीना में एक सामुदायिक कार्यक्रम है। पीएम मोदी की लोकप्रियता बहुत ज्यादा है। सटीक आंकड़ा तो पता नहीं है, लेकिन एक वरिष्ठ नेता ने कहा था कि 5-7 लाख लोग हो सकते हैं। ये जो कार्यक्रम आयोजित हो रहा है, उसमें अनुमान के हिसाब से 25-30 हजार लोग शामिल होंगे। दोनों देशों के प्रधानमंत्री जनता को संबोधित करेंगे। लोगों में इसे लेकर बड़ा उत्साह है। ऑस्ट्रेलिया बहुत बड़ा देश है। हर जगह से लोग आ रहे हैं। पीएम मोदी के बोलने से लोगों का उत्साह बढ़ता है। लोग उन्हें सुनना चाहते हैं।"

पीएम मोदी के सिडनी दौरे का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि यहां एक ऐसा कार्यक्रम हुआ था, जहां पीएम मोदी को प्रधानमंत्री अल्बनीज ने 'द बॉस' बोला। इसी तरह का कार्यक्रम अरीना में होगा।

खेल के क्षेत्र में भारत-ऑस्ट्रेलिया के बीच सहयोग को लेकर उन्होंने कहा, "हम चाहते हैं कि हमारी खेल-कूद की साझेदारी क्रिकेट से आगे निकले। ऑस्ट्रेलिया क्रिकेटिंग सुपरपावर है। 28 मिलियन आबादी का देश है, लेकिन रिकॉर्ड देखें तो हर किस्म के खेल में बहुत आगे हैं। हम एक ऐसी साझेदारी बनें कि हॉकी और क्रिकेट के अलावा बाकी खेलों में भी हम आगे निकलें। केवल टीमों का आदान-प्रदान ना हो, हम उससे आगे निकलें। इस कार्यक्रम में भारत की तरफ से ऑस्ट्रेलिया ने कबड्डी दिखाने का विकल्प चुना है। ऑस्ट्रेलिया की तरफ से फुटबॉल (फुटी) दिखाया जाएगा। क्रिकेट की भी उपस्थिति होगी, लेकिन हमारा लक्ष्य इससे आगे जाने का है।"

उन्होंने कहा कि क्वाड के अपने लक्ष्य हैं। भारत-ऑस्ट्रेलिया एक द्विपक्षीय साझेदार हैं। इस पर हम लोग काम कर रहे हैं, चाहे वह रक्षा, सुरक्षा और आर्थिक मामले हों। अगर आप देखें तो इसमें संयुक्त अभ्यास है। यह द्विपक्षीय स्तर पर आगे बढ़ रहा है। इसकी तुलना हम क्वाड से नहीं कर सकते हैं। हम दोनों देशों के मूल्य एक जैसे हैं। यह संबंध मूल्यों पर आधारित है। हम किसी को दबाना नहीं चाहते और ना ही हम किसी पर हमला करते हैं। हमारा एक ही लक्ष्य है, शांति और स्थिरता।


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