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शिमला में ईडी की बड़ी कार्रवाई, क्रिप्टो फ्रॉड केस में जुनेजा बंधुओं के ठिकानों पर छापेमारी

प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) के शिमला ऑफिस ने 'प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट (पीएमएलए), 2002' की धारा 17(1) के तहत क्रिप्टोकरेंसी फ्रॉड मामले में विजय जुनेजा और मासूम जुनेजा के ठिकानों पर तलाशी अभियान चलाया

शिमला में ईडी की बड़ी कार्रवाई, क्रिप्टो फ्रॉड केस में जुनेजा बंधुओं के ठिकानों पर छापेमारी
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शिमला। प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) के शिमला ऑफिस ने सोमवार को 'प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट (पीएमएलए), 2002' की धारा 17(1) के तहत क्रिप्टोकरेंसी फ्रॉड मामले में विजय जुनेजा और मासूम जुनेजा के ठिकानों पर तलाशी अभियान चलाया। इस दौरान ऐसे दस्तावेज और डिजिटल डिवाइस मिले, जो इस मामले में सबूत का काम करेंगे।

ईडी ने हिमाचल प्रदेश और पंजाब पुलिस द्वारा सुभाष शर्मा और अन्य के खिलाफ दर्ज एफआईआर के आधार पर जांच शुरू की थी। जांच से पता चला है कि 2018 में सुभाष शर्मा ने हेम राज, सुखदेव ठाकुर, अभिषेक शर्मा और राधिका शर्मा जैसे सह-आरोपियों के साथ मिलकर एक ऑनलाइन प्लेटफॉर्म के जरिए क्रिप्टोकरेंसी-बेस्ड एमएलएम स्कीम शुरू की थी, ताकि वे इसे कंट्रोल कर सकें और बड़े पैमाने पर निवेशकों को जोड़ सकें।

बाद में इस स्कीम को चलाने के लिए प्लेटफॉर्म को विदेशी सर्वर (डिजिटल ओशन) पर शिफ्ट कर दिया गया और अलग-अलग डोमेन के जरिए चलाया गया। आरोपियों ने पोंजी स्ट्रक्चर को बनाए रखने के लिए लोगों को 'कोर्वियो कॉइन (केआरओ)' में निवेश करने के लिए उकसाया। इसके लिए उन्होंने ज्यादा रिटर्न देने का वादा किया, लोगों को गुमराह करने वाले सेमिनार किए, टोकन की वैल्यू में हेरफेर की और नए टोकन लॉन्च किए।

इस स्ट्रक्चर में नए निवेशकों से मिले पैसे का इस्तेमाल पुराने निवेशकों को भुगतान करने के लिए किया जाता था। अपनी गतिविधियों को छिपाने के लिए डिजिटल रिकॉर्ड और डोमेन डिलीट कर दिए गए थे। हालांकि, रिकवर किए गए डेटा से पता चला कि 2.48 लाख से ज्यादा यूजर्स इस फाइनेंशियल फ्रॉड का शिकार हुए और उनके कुल ट्रांजैक्शन 219 मिलियन यूएसडी से ज्यादा थे, जिससे इन निवेशकों को कुल 500 करोड़ रुपए का नुकसान हुआ।

इसके बाद इस क्रिमिनल नेटवर्क ने कई अकाउंट्स, फर्जी फर्मों और बिचौलियों के जरिए फंड को घुमाकर और ऑडिट ट्रेल को छिपाने के लिए एक हिस्से को क्रिप्टोकरेंसी में बदलकर हेरफेर की। घोटाला सामने आने के बाद सुभाष शर्मा कानूनी कार्रवाई से बचने के लिए दुबई भाग गए।

जांच में आगे यह भी पता चला कि निवेशकों से इकट्ठा किया गया फंड विजय कुमार जुनेजा और मासूम जुनेजा तक पहुंचाया गया था। यह कैश मिलने के बाद उन्होंने कथित तौर पर इस फंड का इस्तेमाल अचल संपत्ति खरीदने में किया, जिसमें रजिस्टर्ड वैल्यू असल में चुकाई गई कीमत से काफी कम थी।

इस व्यवस्था से ट्रांजैक्शन वैल्यू का एक बड़ा हिस्सा कैश में चुकाना मुमकिन हुआ और धोखाधड़ी वाली स्कीम से कमाए गए फंड की लॉन्ड्रिंग आसान हो गई। जांच में पीएमएलए की धारा 50 के तहत अलग-अलग लोगों के दर्ज बयानों से पता चला कि सुभाष शर्मा और उनके साथियों की ओर से विजय कुमार जुनेजा और मासूम जुनेजा को कैश दिया गया था।

यह भी पता चला कि विजय कुमार जुनेजा और मासूम जुनेजा कई ऐसे अकाउंट्स में नॉमिनी थे, जो कर्मचारियों के नाम पर थे। जांच में पता चला कि इन अकाउंट्स पर उनका पूरा कंट्रोल था और इनका इस्तेमाल अपराध से हुई कमाई को छिपाने और उसकी लेयरिंग करने के लिए किया गया था।

इसके अलावा, क्रिप्टो करेंसी फ्रॉड से हुई अपराध की कमाई की कुल रकम का पता लगाने के लिए मासूम जुनेजा को पीएमएलए, 2002 की धारा 19(1) के तहत गिरफ्तार किया गया है।


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