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सोनम वांगचुक के अनशन खत्म होने पर कांग्रेस का तंज, 'छात्रों की मांग अब भी बरकरार'

कांग्रेस नेता कुलदीप राठौर ने सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक के भूख हड़ताल समाप्त करने के घटनाक्रम को लेकर केंद्र सरकार और भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) पर निशाना साधा।

सोनम वांगचुक के अनशन खत्म होने पर कांग्रेस का तंज, छात्रों की मांग अब भी बरकरार
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शिमला/भोपाल। कांग्रेस नेता कुलदीप राठौर ने सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक के भूख हड़ताल समाप्त करने के घटनाक्रम को लेकर केंद्र सरकार और भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) पर निशाना साधा।

उन्होंने कहा कि जिस व्यक्ति को सरकार और भाजपा के नेता पहले चीन का एजेंट बता रहे थे, उसी सोनम वांगचुक का अनशन समाप्त कराने के लिए केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा और जितेंद्र सिंह को आगे आना पड़ा। यह इस बात का संकेत है कि सरकार मौजूदा स्थिति पर नियंत्रण करना चाहती है। नीट पेपर लीक मामले को लेकर आंदोलन कर रहे छात्र अब भी केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग कर रहे हैं और कांग्रेस पार्टी इस मांग का समर्थन करती है।

कुलदीप राठौर ने आरोप लगाया कि छात्रों के आंदोलन के दौरान पुलिस ने लाठीचार्ज किया और आंसू गैस के गोले दागे, जो लोकतांत्रिक अधिकारों का हनन है। उन्होंने कहा कि छात्रों के साथ दुर्व्यवहार करने वाले पुलिस अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई होनी चाहिए।

प्रधानमंत्री मोदी के वीडियो संदेश का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि यदि सरकार नए कानून का मसौदा तैयार कर चुकी है, तो उसे इस पर विपक्ष को विश्वास में लेना चाहिए। उन्होंने सुझाव दिया कि प्रधानमंत्री सोशल मीडिया के माध्यम से अपनी बात रखने के बजाय संसद में इस विषय पर विस्तृत चर्चा करें, ताकि सभी पक्षों की राय सामने आ सके और प्रभावी समाधान निकाला जा सके।

वहीं, मध्य प्रदेश में कांग्रेस नेता शोभा ओझा ने भी पेपर लीक के मामलों को लेकर केंद्र सरकार पर तीखा हमला बोला और केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग दोहराई। उन्होंने कहा कि देशभर के छात्र-छात्राओं के साथ अन्याय हो रहा है और परीक्षा प्रणाली पर उनका भरोसा कमजोर हुआ है।

शोभा ओझा ने आरोप लगाया कि प्रदर्शन कर रहे छात्रों के साथ पुलिस का रवैया बेहद कठोर रहा और धरना-प्रदर्शनों के दौरान कानून-व्यवस्था के नाम पर छात्रों के साथ अनुचित व्यवहार किया गया। सरकार को छात्रों की आवाज सुननी चाहिए और उनकी मांगों पर गंभीरता से विचार करना चाहिए।


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