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शांति निकेतन हाउसिंग सोसाइटी घोटाले में ईडी की बड़ी कार्रवाई, 6.63 करोड़ रुपए की संपत्ति और नकदी जब्त

प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने शांति निकेतन को-ऑपरेटिव ग्रुप हाउसिंग सोसाइटी (एसजीएचएस) के सदस्यों से कथित धोखाधड़ी और धनशोधन के मामले में बड़ी कार्रवाई करते हुए दिल्ली, गुरुग्राम और फरीदाबाद में आठ ठिकानों पर छापेमारी की।

शांति निकेतन हाउसिंग सोसाइटी घोटाले में ईडी की बड़ी कार्रवाई, 6.63 करोड़ रुपए की संपत्ति और नकदी जब्त
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गुरुग्राम। प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने शांति निकेतन को-ऑपरेटिव ग्रुप हाउसिंग सोसाइटी (एसजीएचएस) के सदस्यों से कथित धोखाधड़ी और धनशोधन के मामले में बड़ी कार्रवाई करते हुए दिल्ली, गुरुग्राम और फरीदाबाद में आठ ठिकानों पर छापेमारी की।

यह कार्रवाई मनी लॉन्ड्रिंग रोकथाम अधिनियम (पीएमएलए), 2002 के तहत की गई, जिसमें करोड़ों रुपए की नकदी, सोना-चांदी, डिजिटल साक्ष्य और महत्वपूर्ण दस्तावेज जब्त किए गए।

ईडी के अनुसार, यह जांच गुरुग्राम के सुशांत लोक थाने में भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) की विभिन्न धाराओं के तहत दर्ज एफआईआर के आधार पर शुरू की गई। एफआईआर में मंगल सैन मित्तल, अनिल शर्मा, अरुण शर्मा और अन्य पर शांति निकेतन को-ऑपरेटिव ग्रुप हाउसिंग सोसाइटी के सदस्यों के साथ धोखाधड़ी करने का आरोप लगाया गया है।

जांच में सामने आया कि सोसाइटी के तत्कालीन अध्यक्ष मंगल सैन मित्तल ने मेसर्स कॉनोइसर इन्फ्राबिल्ड प्राइवेट लिमिटेड (सीआईपीएल) के निदेशक अनिल शर्मा और अरुण शर्मा के साथ मिलकर कथित रूप से सोसाइटी पर अवैध नियंत्रण स्थापित किया। आरोप है कि उन्होंने सदस्यों के फंड का गबन किया, फर्जी सदस्य बनाए, आधिकारिक रिकॉर्ड छिपाए और बड़ी रकम जुटाने के बाद हाउसिंग प्रोजेक्ट को अधूरा छोड़ दिया।

ईडी की जांच में यह भी पता चला कि जहां सोसाइटी में केवल 98 सदस्यताओं की अनुमति थी, वहीं आरोपियों ने कथित रूप से 34 अतिरिक्त अवैध सदस्यताएं बेच दीं। फ्लैट बेचने के लिए दोहरे भुगतान की व्यवस्था अपनाई गई, जिसमें खरीदारों से बैंकिंग चैनलों के साथ-साथ नकद भुगतान भी लिया गया। एजेंसी के अनुसार अब तक की जांच में करीब 90.50 करोड़ रुपए की वसूली का पता चला है, जिसमें बैंक खातों और नकद के माध्यम से प्राप्त धन शामिल है।

जांच में यह भी सामने आया कि सोसाइटी के फंड को आरोपियों से जुड़ी विभिन्न व्यावसायिक कंपनियों में स्थानांतरित किया गया। बैंक खातों के विश्लेषण से धन की लेयरिंग और रोटेशन के प्रमाण मिले हैं। इनमें मेसर्स कॉनोइसर इन्फ्राबिल्ड प्राइवेट लिमिटेड तथा अनिल शर्मा के खातों में 12 करोड़ रुपए नकद जमा किए जाने का भी उल्लेख है।

9 जुलाई की तलाशी के दौरान ईडी ने कई डिजिटल उपकरण, संपत्ति संबंधी दस्तावेज, ऑडिटेड वित्तीय रिकॉर्ड, टैली डेटा और फंड डायवर्जन से जुड़े दस्तावेज जब्त किए। इसके अलावा, एजेंसी ने लगभग 6.63 करोड़ रुपए मूल्य की संपत्ति भी बरामद की। जब्त संपत्ति में 55 लाख रुपए की बेहिसाबी नकदी; 1.85 करोड़ रुपए की सोने की ईंटें; 1.95 करोड़ रुपए के सोने के आभूषण; और करीब 100 किलोग्राम चांदी, जिसकी अनुमानित कीमत 2.28 करोड़ रुपए है, शामिल हैं।

ईडी ने कार्रवाई के दौरान आरोपियों से जुड़े कई बैंक खाते भी फ्रीज कर दिए हैं। एजेंसी का कहना है कि मामले में धनशोधन और वित्तीय अनियमितताओं के पूरे नेटवर्क की जांच जारी है और आगे कानूनी कार्रवाई की जाएगी।


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