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गुजरात: कांग्रेस ने एमएसपी की कानूनी गारंटी और मानसून से पहले के कार्यों की जांच की मांग की

कांग्रेस की गुजरात इकाई ने केंद्र और राज्य सरकारों पर किसानों को निराश करने और मानसून के लिए अपर्याप्त तैयारी का आरोप लगाया।

गुजरात: कांग्रेस ने एमएसपी की कानूनी गारंटी और मानसून से पहले के कार्यों की जांच की मांग की
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अहमदाबाद। कांग्रेस की गुजरात इकाई ने बुधवार को केंद्र और राज्य सरकारों पर किसानों को निराश करने और मानसून के लिए अपर्याप्त तैयारी का आरोप लगाया।

पार्टी ने न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) के लिए कानूनी गारंटी के साथ स्वामीनाथन आयोग की सिफारिशों को लागू करने और राज्य के कुछ हिस्सों में भारी बारिश के बाद मानसून से पहले किए गए कामों की जांच की मांग की।

महासचिव और राज्य प्रभारी मुकुल वासनिक ने प्रेस वार्ता में आरोप लगाया कि केंद्र सरकार ने चुनावों के दौरान बार-बार आश्वासन देने के बावजूद किसानों से किए गए वादों को पूरा नहीं किया है।

वासनिक ने कहा, "मोदी सरकार लगातार किसानों को गुमराह कर रही है। चुनावों के दौरान किसानों को न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) के बारे में बड़े-बड़े वादे किए जाते हैं, लेकिन चुनाव खत्म होते ही उन्हें भुला दिया जाता है।"

उन्होंने कहा कि हालांकि सरकार ने कृषि वैज्ञानिक डॉ. एमएस स्वामीनाथन को 'भारत रत्न' से सम्मानित किया है, लेकिन उसने स्वामीनाथन आयोग की उस सिफारिश को लागू नहीं किया है जिसमें किसानों को उत्पादन लागत से अधिक कीमत (मुनाफे के साथ) देने की बात कही गई थी।

उन्होंने दावा किया, "गुजरात में किसान कई चुनौतियों का सामना कर रहे थे, जिनमें लाभकारी कीमतों का अभाव, खेती की बढ़ती लागत, खाद, बीज और कीटनाशकों की बढ़ती कीमतें, फसल का नुकसान, अपर्याप्त मुआवजा, फसल बीमा योजना में कमियां और सिंचाई व बिजली से जुड़ी समस्याएं शामिल हैं।"

उन्होंने कहा कि कांग्रेस ने केंद्र से स्वामीनाथन आयोग की सिफारिशों को कानूनी गारंटी के साथ लागू करने, कृषि उपज के लिए उचित मूल्य सुनिश्चित करने और किसानों के हित में तत्काल कदम उठाने का आग्रह किया है।

गुजरात प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष अमित चावड़ा ने भी राज्य में मानसून की पहली भारी बारिश के बाद बनी स्थिति को लेकर भाजपा सरकार की आलोचना की। उन्होंने आरोप लगाया कि विकास और मानसून से पहले की तैयारियों के दावे जमीनी हकीकत से मेल नहीं खाते।

चावड़ा ने कहा, "पहली भारी बारिश ने विकास, मानसून से पहले की तैयारियों और भ्रष्टाचार मुक्त शासन के भाजपा सरकार के दावों की पोल खोल दी है।"

सूरत की स्थिति का जिक्र करते हुए चावड़ा ने कहा कि पिछले दो दिनों में हुई भारी बारिश ने सामान्य जनजीवन अस्त-व्यस्त कर दिया है। रिहायशी इलाकों में पानी भर गया है, व्यापारियों को आर्थिक नुकसान हुआ है और गाड़ियां क्षतिग्रस्त हुई हैं।

उन्होंने आरोप लगाया, "बारिश से जुड़ी अलग-अलग घटनाओं में नौ लोगों की मौत हुई है, और ये घटनाएं प्रशासनिक विफलता और अपर्याप्त योजना को दर्शाती हैं।"

कांग्रेस ने मांग की कि सभी प्रभावित इलाकों में राहत और बचाव कार्य जारी रहें, मरने वालों के परिवारों को मुआवजा और विशेष सहायता दी जाए, और प्रभावित परिवारों, व्यापारियों और छोटे उद्योगों को हुए नुकसान का सर्वे करके उन्हें मुआवजा दिया जाए।

पार्टी ने मानसून से पहले के कामों पर हुए खर्च, टेंडर और उनके क्रियान्वयन की एक तय समय-सीमा वाली उच्च-स्तरीय जांच की भी मांग की, साथ ही किसी भी लापरवाही या अनियमितता के लिए जिम्मेदार पाए जाने वाले अधिकारियों, ठेकेदारों और एजेंसियों के खिलाफ कार्रवाई की भी मांग की।


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