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छिटपुट घटना की आड़ में कृषक आंदोलन को दबाने की साजिश कर रही सरकार: दीपंकर भट्टाचार्य

भारत की कम्युनिस्ट पार्टी मार्क्सवादी-लेनिनवादी (भाकपा-माले) के राष्ट्रीय महासचिव दीपंकर भट्टाचार्य ने कृषि कानूनों के विरोध में आंदोलनरत किसानों की गणतंत्र दिवस के दिन दिल्ली में ट्रैक्टर रैली में हुई हिंसा पर आज कहा कि सरकार छिटपुट घटना की आड़ में कृषक आंदोलन को दबाने की साजिश कर रही है

छिटपुट घटना की आड़ में कृषक आंदोलन को दबाने की साजिश कर रही सरकार: दीपंकर भट्टाचार्य
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पटना। भारत की कम्युनिस्ट पार्टी मार्क्सवादी-लेनिनवादी (भाकपा-माले) के राष्ट्रीय महासचिव दीपंकर भट्टाचार्य ने कृषि कानूनों के विरोध में आंदोलनरत किसानों की गणतंत्र दिवस के दिन दिल्ली में ट्रैक्टर रैली में हुई हिंसा पर आज कहा कि सरकार छिटपुट घटना की आड़ में कृषक आंदोलन को दबाने की साजिश कर रही है।

भट्टाचार्य ने शुक्रवार को यहां संवाददाता सम्मेलन में कहा कि 26 जनवरी को किसानों का कार्यक्रम देशव्यापी स्तर का था। इन शांतिपूर्ण कार्यक्रमों में किसानों की बड़ी भागीदारी हुई। बिहार में भी कई स्थानों पर ट्रैक्टर मार्च सहित असरदार प्रतिवाद हुए। दिल्ली में हुई छिटपुट घटना को सरकार बढ़ा-चढ़ा कर पेश कर रही है और उसका इस्तेमाल आंदोलन को दबाने के लिए कर रही है, जो बेहद निंदनीय है। उन्होंने कहा कि इस मामले की सही से जांच होनी चाहिए कि दिल्ली में किसानों के शांतिपूर्ण मार्च के दौरान उपद्रव करने वाले कौन लोग थे।

राष्ट्रीय महासचिव ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की सरकार में आंदोलनों के दमन का एक पैटर्न विकसित हुआ है। पहले आंदोलन को बदनाम करो, फिर दुष्प्रचार चलाओ, झूठे मुकदमे करो और फिर आंदोलनकारियों को जेल में डाल दो। उन्होंने कहा कि रोहित वेमुला की घटना से लेकर जवाहर लाल नेहरू विश्वविद्यालय (जेएनयू) प्रकरण, पिछले साल नागरिकता संशोधन कानून के खिलाफ ऐतिहासिक आंदोलन, जामिया-शाहनीबाग, भीमा कोरेगांव तमाम मामलों में यही पैटर्न को देखा गया है। अब इसी पैटर्न पर किसान आंदेालनों को दबाने की योजना बनाई जा रही है। लेकिन, इस बार किसान पीछे नहीं हटने वाले हैं। दमन के बावजूद फिर से आंदोलनों में किसानों की भागीदारी शुरू हो गई है।

भट्टाचार्य ने कहा कि उत्तर प्रदेश के किसान बड़ी संख्या में आंदोलन में शामिल हो रहे हैं। यदि इस किसान आंदोलन को जीत की मंजिल तक पहुंचाना है तो उत्तर प्रदेश और बिहार को पंजाब-हरियाणा वाली भूमिका निभानी होगी। बिहार में आंदोलन का लगातार विस्तार जारी है। उन्होंने कहा कि इसी आलोक में कल 30 जनवरी को महात्मा गांधी के शहादत दिवस पर बिहार में महागठबंधन के दलों ने मानव शृंखला निर्मित करने का आह्वान किया है।


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