अस्पताल से छुट्टी के बाद सोनम वांगचुक राजघाट पहुंचकर महात्मा गांधी को दी श्रद्धांजलि, बोले- आज भी सबसे प्रासंगिक है बापू का अहिंसा का मार्ग
अस्पताल से छुट्टी मिलने के बाद सोनम वांगचुक पत्नी गीतांजलि आंग्मो के साथ राजघाट पहुंचे। उन्होंने महात्मा गांधी को श्रद्धांजलि देते हुए कहा कि अहिंसा और संवाद का रास्ता आज भी सबसे प्रासंगिक है।

स्वास्थ्य में तेजी से सुधार, जल्द लौटेंगे लद्दाख
राजघाट पहुंचने से पहले सोनम वांगचुक ने अस्पताल से छुट्टी मिलने पर एक वीडियो संदेश जारी किया। उन्होंने बताया कि अब उनकी तबीयत पहले से काफी बेहतर है और धीरे-धीरे सामान्य भोजन भी कर रहे हैं। उनके अनुसार, शरीर में ऊर्जा वापस लौट रही है और चिकित्सकों की सलाह के अनुसार वह पूरी तरह स्वस्थ होने की दिशा में आगे बढ़ रहे हैं।
उन्होंने कहा कि लद्दाख लौटने से पहले महात्मा गांधी को श्रद्धांजलि देना उनके लिए बेहद महत्वपूर्ण था। वांगचुक ने बताया कि बापू के विचार हमेशा उन्हें प्रेरित करते रहे हैं और समाज में सकारात्मक बदलाव लाने के लिए अहिंसक आंदोलन सबसे प्रभावी माध्यम है।
समर्थकों और डॉक्टरों का जताया आभार
सोनम वांगचुक ने अपने स्वास्थ्य लाभ के लिए डॉक्टरों, अस्पताल के मेडिकल स्टाफ और शुभचिंतकों का धन्यवाद किया। उन्होंने कहा कि उपचार के दौरान उन्हें लगातार सहयोग मिला, जिससे जल्द स्वस्थ होने में मदद मिली।
उन्होंने उन हजारों लोगों के प्रति भी आभार व्यक्त किया जिन्होंने उनके आंदोलन और विचारों का समर्थन किया। वांगचुक ने कहा कि जनता की एकजुटता किसी भी लोकतांत्रिक अभियान की सबसे बड़ी ताकत होती है और लोगों के समर्थन से ही सकारात्मक बदलाव संभव हो पाते हैं।
'संवाद ही लोकतंत्र की सबसे बड़ी ताकत'
राजघाट में मीडिया से बातचीत के दौरान वांगचुक ने कहा कि सरकारों को हमेशा जनता की आवाज सुननी चाहिए। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में असहमति को सम्मान मिलना चाहिए और हर समस्या का समाधान बातचीत के माध्यम से खोजा जाना चाहिए। उनके मुताबिक, टकराव की बजाय संवाद अपनाने से समाज में विश्वास बढ़ता है और स्थायी समाधान निकलते हैं।
उन्होंने यह भी कहा कि महात्मा गांधी के सिद्धांत आज भी देश और समाज के लिए उतने ही उपयोगी हैं, जितने स्वतंत्रता आंदोलन के समय थे।
लद्दाख लौटने की तैयारी
सोनम वांगचुक ने बताया कि स्वास्थ्य पूरी तरह सामान्य होने के बाद वह जल्द ही अपने गृह राज्य लद्दाख लौटेंगे। उन्होंने कहा कि आगे भी समाज और पर्यावरण से जुड़े मुद्दों पर शांतिपूर्ण तरीके से अपनी आवाज उठाते रहेंगे। वांगचुक ने दोहराया कि किसी भी जनआंदोलन की सफलता लोगों की भागीदारी और लोकतांत्रिक मूल्यों में विश्वास पर निर्भर करती है।


