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ई-20 पेट्रोल के नाम पर हो रहा फ्रॉड? राहुल गांधी का दावा- 20% से ज्यादा मिल रहा एथेनॉल, जनता को हो रहा नुकसान

राहुल गांधी ने E20 पेट्रोल में 20 प्रतिशत से ज्यादा एथेनॉल मिलाने का आरोप लगाया। कर्नाटक की लैब रिपोर्ट का हवाला देकर केंद्र सरकार और पेट्रोलियम कंपनियों से जवाब मांगा।

ई-20 पेट्रोल के नाम पर हो रहा फ्रॉड? राहुल गांधी का दावा- 20% से ज्यादा मिल रहा एथेनॉल, जनता को हो रहा नुकसान
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नई दिल्ली। कांग्रेस नेता और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने ई-20 पेट्रोल को लेकर केंद्र सरकार पर गंभीर सवाल उठाए हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि देश में ई-20 पेट्रोल के नाम पर जनता के साथ धोखा किया जा रहा है और पेट्रोल में निर्धारित 20 प्रतिशत से ज्यादा एथेनॉल मिलाया जा रहा है। राहुल गांधी ने इसे '420' करार देते हुए कहा कि महंगे पेट्रोल के पैसे वसूलने के बावजूद वाहन चालकों को उनकी गाड़ियों के लिए सही ईंधन नहीं मिल रहा है।

राहुल गांधी ने कर्नाटक सरकार की ओर से पेट्रोल के नमूनों की कराई गई लैब जांच का हवाला देते हुए दावा किया कि 14 में से 11 सैंपल में एथेनॉल की मात्रा 20 प्रतिशत से अधिक पाई गई है। उन्होंने इस जांच रिपोर्ट को अपने सोशल मीडिया अकाउंट पर साझा कर केंद्र सरकार से जवाब मांगा है।

पेट्रोल के 11 सैंपल में 20% से ज्यादा एथेनॉल का दावा

राहुल गांधी के मुताबिक, कर्नाटक सरकार ने राज्य के सात जिलों से पेट्रोल के नमूने एकत्र कर मान्यता प्राप्त प्रयोगशालाओं में उनकी जांच कराई थी। जांच के नतीजे केंद्र सरकार के निर्धारित मानक से अलग बताए जा रहे हैं।

उन्होंने दावा किया कि इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन (IOCL) के एक सैंपल में 31.2 प्रतिशत और हिंदुस्तान पेट्रोलियम (HPCL) के सैंपल में 30.5 प्रतिशत एथेनॉल पाया गया। राहुल ने सवाल उठाया कि जब सरकार E20 पेट्रोल में 20 प्रतिशत एथेनॉल होने की बात कहती है, तो जांच में इससे अधिक मात्रा कैसे सामने आ रही है?

सरकारी और निजी कंपनियों पर लगाए गंभीर आरोप

कांग्रेस नेता ने IOCL, HPCL, BPCL, नायरा और शेल जैसी पेट्रोलियम कंपनियों पर भी सवाल उठाए। उनका आरोप है कि सरकारी और निजी कंपनियों के पेट्रोल में निर्धारित सीमा से अधिक एथेनॉल मिलाया जा रहा है।

राहुल गांधी ने कहा कि कंपनियों की ओर से प्रयोगशाला रिपोर्ट में एथेनॉल की मात्रा स्पष्ट नहीं की गई। ऐसे में आम उपभोक्ता को यह जानकारी नहीं मिल पाती कि वह अपनी गाड़ी में किस गुणवत्ता का ईंधन भरवा रहा है।

उन्होंने आरोप लगाया कि जनता पेट्रोल की कीमत चुका रही है, लेकिन उसे निर्धारित मानक के अनुरूप ईंधन नहीं मिल रहा। इसका सीधा आर्थिक नुकसान वाहन मालिकों को उठाना पड़ रहा है।

गाड़ियों के माइलेज और इंजन पर असर की जताई आशंका

राहुल गांधी ने कहा कि सभी वाहन 20 प्रतिशत से अधिक एथेनॉल वाले पेट्रोल के इस्तेमाल के लिए डिजाइन नहीं किए गए हैं। अधिक एथेनॉल मिलने से वाहनों के माइलेज और इंजन के प्रदर्शन पर असर पड़ सकता है। उन्होंने दावा किया कि इससे वाहन चालकों को बार-बार मरम्मत पर खर्च करना पड़ सकता है।

उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि पेट्रोल पंपों पर उपभोक्ताओं को ईंधन में एथेनॉल की वास्तविक मात्रा की जानकारी क्यों नहीं दी जाती और उन्हें अपनी पसंद का ईंधन चुनने का विकल्प क्यों नहीं मिलता।

केंद्र सरकार से राहुल गांधी के पांच सवाल

राहुल गांधी ने केंद्र सरकार से पूछा कि पेट्रोल में वास्तव में कितनी मात्रा में एथेनॉल मिलाया जा रहा है? निर्धारित 20 प्रतिशत से अधिक एथेनॉल मिलने के आरोपों की जांच कौन करेगा? संबंधित पेट्रोलियम कंपनियों के खिलाफ कार्रवाई कब होगी? उपभोक्ताओं को सही जानकारी और विकल्प क्यों नहीं दिया जा रहा? उन्होंने यह भी सवाल किया कि सरकार की एथेनॉल नीति से आखिर फायदा किसे मिल रहा है।

फिलहाल राहुल गांधी के इन आरोपों ने E20 पेट्रोल और एथेनॉल ब्लेंडिंग नीति को लेकर नई बहस छेड़ दी है। हालांकि, लैब रिपोर्ट के दावों और कंपनियों पर लगाए गए आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि तथा संबंधित पक्षों का जवाब सामने आना बाकी है।


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