राहुल गांधी को बड़ी राहत, यूपी में दर्ज आपराधिक मानहानि केस सुप्रीम कोर्ट ने किया रद्द
राहुल गांधी को उत्तर प्रदेश के आपराधिक मानहानि मामले में सुप्रीम कोर्ट से बड़ी राहत मिली है। अदालत ने राज्य सरकार की मंजूरी नहीं होने पर केस और समन रद्द कर दिया।

नई दिल्ली। कांग्रेस नेता और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी को उत्तर प्रदेश में दर्ज एक आपराधिक मानहानि मामले में सुप्रीम कोर्ट से बड़ी राहत मिली है। सर्वोच्च अदालत ने शुक्रवार को मामले में निचली अदालत की ओर से जारी समन और उससे जुड़ी कार्यवाही को रद्द कर दिया। यह मामला स्वतंत्रता सेनानी वीडी सावरकर को लेकर राहुल गांधी की कथित टिप्पणियों से संबंधित था।
राहुल गांधी ने इलाहाबाद हाईकोर्ट के उस फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी थी, जिसमें आपराधिक शिकायत की कार्यवाही रद्द करने से इनकार कर दिया गया था। शिकायत में उन पर सावरकर को बदनाम करने और कथित तौर पर विभिन्न समूहों के बीच वैमनस्य बढ़ाने का आरोप लगाया गया था।
राज्य सरकार की मंजूरी पर कोर्ट ने पूछा सवाल
सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट की पीठ ने उत्तर प्रदेश सरकार से पूछा कि क्या संबंधित धाराओं के तहत राहुल गांधी के खिलाफ मुकदमा चलाने के लिए राज्य सरकार की मंजूरी ली गई थी। राज्य सरकार की ओर से पेश अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल केएम नटराज ने अदालत को बताया कि ऐसी कोई मंजूरी नहीं दी गई है।
यह जवाब मामले में महत्वपूर्ण साबित हुआ। राहुल गांधी की ओर से दलील दी गई कि यदि कानून के तहत आवश्यक मंजूरी मौजूद नहीं है तो मजिस्ट्रेट की ओर से जारी समन को बरकरार नहीं रखा जा सकता।
मंजूरी जरूरी, नहीं है तो मामला खत्म: सुप्रीम कोर्ट
मामला भारतीय दंड संहिता की धारा 153A और 505 से जुड़ी धाराओं के तहत कार्रवाई से संबंधित था। याचिका पर सुनवाई के दौरान अदालत ने कहा कि धारा 153A के तहत अपराध का संज्ञान लेने के लिए कानून में निर्धारित प्रक्रिया का पालन जरूरी है।
सुप्रीम कोर्ट ने पाया कि उत्तर प्रदेश सरकार की ओर से दाखिल हलफनामे में राहुल गांधी के खिलाफ अभियोजन की मंजूरी दिए जाने का कोई उल्लेख नहीं है। इसके बाद अदालत ने मजिस्ट्रेट की शिकायत और समन जारी करने वाले आदेश को रद्द कर दिया।
पहले कोर्ट ने राहुल गांधी की टिप्पणी पर जताई थी नाराजगी
यह मामला पहले भी सुप्रीम कोर्ट में पहुंच चुका था। पिछली सुनवाई के दौरान अदालत ने राहुल गांधी की सावरकर पर की गई टिप्पणियों को लेकर मौखिक रूप से नाराजगी जताई थी। अदालत ने स्वतंत्रता आंदोलन से जुड़े व्यक्तित्वों के बारे में सार्वजनिक बयान देते समय सावधानी बरतने की बात कही थी।
अदालत ने यह भी संकेत दिया था कि यदि भविष्य में इसी तरह की टिप्पणियां दोहराई जाती हैं तो न्यायालय उचित कानूनी कार्रवाई पर विचार कर सकता है।
अब आवश्यक सरकारी मंजूरी नहीं होने के आधार पर सुप्रीम कोर्ट ने इस आपराधिक शिकायत से जुड़ी कार्यवाही समाप्त कर दी है। इससे राहुल गांधी को इस मामले में तत्काल बड़ी कानूनी राहत मिली है।


