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पाकिस्तान पर फिर कस सकता है FATF का शिकंजा, भारत जुटा रहा सबूत; ग्रे लिस्ट में वापसी की बढ़ीं अटकलें

FATF की अक्टूबर बैठक से पहले भारत पाकिस्तान को दोबारा ग्रे लिस्ट में शामिल कराने की तैयारी में है। आतंकवाद वित्तपोषण से जुड़े सबूतों के आधार पर इस्लामाबाद पर दबाव बढ़ सकता है।

पाकिस्तान पर फिर कस सकता है FATF का शिकंजा, भारत जुटा रहा सबूत; ग्रे लिस्ट में वापसी की बढ़ीं अटकलें
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नई दिल्ली। आतंकवाद के वित्तपोषण और मनी लॉन्ड्रिंग के मुद्दे पर पाकिस्तान की मुश्किलें एक बार फिर बढ़ सकती हैं। भारत आगामी अक्टूबर में होने वाली फाइनेंशियल एक्शन टास्क फोर्स (FATF) की पूर्ण बैठक में पाकिस्तान को दोबारा ग्रे लिस्ट में शामिल करने की मांग उठा सकता है। इसके लिए भारत कथित तौर पर कई वीडियो, तस्वीरें और अन्य दस्तावेजी साक्ष्य जुटा रहा है, जिनके आधार पर यह साबित करने की कोशिश की जाएगी कि पाकिस्तान अब भी आतंकवाद को समर्थन और वित्तीय मदद देने वाली गतिविधियों पर पूरी तरह रोक लगाने में विफल रहा है।

FATF की ग्रे लिस्ट में वापसी से बढ़ सकती हैं पाकिस्तान की आर्थिक चुनौतियां

सूत्रों के अनुसार, भारत का उद्देश्य पाकिस्तान को फिर से FATF की निगरानी व्यवस्था के दायरे में लाना है। ग्रे लिस्ट में शामिल देशों पर अंतरराष्ट्रीय वित्तीय संस्थानों की कड़ी निगरानी रहती है और उन्हें मनी लॉन्ड्रिंग, आतंकवाद वित्तपोषण तथा अवैध वित्तीय गतिविधियों के खिलाफ अपनी व्यवस्थाओं में सुधार करने के लिए लगातार जवाबदेह ठहराया जाता है।

विशेषज्ञों का मानना है कि यदि पाकिस्तान दोबारा ग्रे लिस्ट में शामिल होता है, तो उसे विदेशी निवेश, अंतरराष्ट्रीय ऋण और वित्तीय सहायता प्राप्त करने में कठिनाइयों का सामना करना पड़ सकता है। इससे उसकी पहले से दबाव में चल रही अर्थव्यवस्था पर अतिरिक्त बोझ पड़ सकता है।

आतंकियों के समर्थन से जुड़े वीडियो बन सकते हैं बड़ा आधार

भारत उन वीडियो और तस्वीरों को प्रमुख साक्ष्य के रूप में पेश कर सकता है, जो हाल के महीनों में सोशल मीडिया पर सामने आए थे। इनमें कथित तौर पर पाकिस्तान के कुछ सैन्य अधिकारियों और स्थानीय नेताओं को आतंकियों के जनाजों में शामिल होते हुए देखा गया था।

इसके अलावा कई ऐसे वीडियो भी चर्चा में रहे, जिनमें प्रतिबंधित संगठनों से जुड़े व्यक्तियों को सार्वजनिक मंचों से आर्थिक सहयोग और चंदा जुटाने की अपील करते हुए दिखाया गया। भारत का दावा है कि ऐसे घटनाक्रम यह संकेत देते हैं कि आतंकवादी नेटवर्क अब भी वित्तीय और सामाजिक समर्थन प्राप्त कर रहे हैं।

क्या है FATF और क्यों महत्वपूर्ण है इसकी निगरानी?

फाइनेंशियल एक्शन टास्क फोर्स (FATF) एक अंतरराष्ट्रीय संस्था है, जो आतंकवाद वित्तपोषण, मनी लॉन्ड्रिंग, अवैध हथियार कारोबार, साइबर अपराध और अन्य वित्तीय अपराधों पर नजर रखती है। 40 सदस्यीय यह संगठन दुनिया भर में वित्तीय पारदर्शिता और सुरक्षा के लिए मानक तय करता है।

FATF उन देशों की पहचान करता है, जहां वित्तीय प्रणाली का दुरुपयोग होने का खतरा अधिक होता है और जरूरत पड़ने पर उन्हें ग्रे या ब्लैक लिस्ट में डालने की सिफारिश करता है।

2022 में मिली थी राहत, लेकिन निगरानी अब भी जारी

पाकिस्तान को अक्टूबर 2022 में FATF की ग्रे लिस्ट से हटाया गया था। इससे पहले वह कई वर्षों तक निगरानी सूची में रहा था। हालांकि ग्रे लिस्ट से बाहर आने के बावजूद FATF और एशिया/पैसिफिक ग्रुप ऑन मनी लॉन्ड्रिंग (APG) अब भी पाकिस्तान की गतिविधियों पर नजर बनाए हुए हैं।

संयुक्त राष्ट्र में भारत ने किया FATF का समर्थन

हाल ही में संयुक्त राष्ट्र में भारत के स्थायी प्रतिनिधि पी. हरीश ने FATF की भूमिका का समर्थन करते हुए कहा कि आतंकवाद के वित्तपोषण के खिलाफ वैश्विक कार्रवाई के लिए यह संस्था बेहद महत्वपूर्ण है। उन्होंने कहा कि FATF की विश्वसनीयता पर सवाल उठाना उन देशों की चिंता को दर्शाता है जो जांच और निगरानी से बचना चाहते हैं।

विश्लेषकों का मानना है कि अक्टूबर की FATF बैठक में पाकिस्तान को लेकर होने वाली चर्चा दक्षिण एशिया की सुरक्षा और क्षेत्रीय राजनीति के लिहाज से काफी महत्वपूर्ण साबित हो सकती है।


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