संसद में छात्रों पर पुलिस कार्रवाई को लेकर सरकार पर हमलावर होगा विपक्ष, पीएम मोदी से माफी की मांग पर रहेगा जोर
संसद में विपक्ष छात्रों पर कथित पुलिस कार्रवाई, पेपर लीक और शिक्षा मंत्री के इस्तीफे के मुद्दे पर सरकार को घेरने की तैयारी में है। राहुल गांधी ने अमित शाह को पत्र लिखकर जवाब मांगा।

INDIA गठबंधन की बैठक में तय होगी रणनीति
सूत्रों के अनुसार, संसद में सरकार को घेरने की रणनीति सोमवार सुबह संसद भवन में राज्यसभा में नेता प्रतिपक्ष मल्लिकार्जुन खरगे के कक्ष में होने वाली INDIA गठबंधन की बैठक में तय की जाएगी। इस बैठक में पेपर लीक विरोधी कानून में प्रस्तावित संशोधनों पर विपक्ष का रुख भी अंतिम रूप से तय किया जाएगा। माना जा रहा है कि विपक्ष सरकार से परीक्षा प्रणाली में सुधार और छात्रों की सुरक्षा जैसे मुद्दों पर जवाब मांगेगा।
राहुल गांधी ने अमित शाह को लिखा पत्र
लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह को पत्र लिखकर आंदोलन के दौरान छात्रों पर हुई कथित पुलिस कार्रवाई पर जवाबदेही तय करने की मांग की है। उन्होंने पत्र में सवाल उठाया कि क्या छात्रों के खिलाफ पैलेट गन और अन्य बल प्रयोग की अनुमति गृह मंत्री स्तर से दी गई थी। यदि नहीं, तो यह आदेश किसके निर्देश पर जारी हुआ।
राहुल गांधी ने यह भी पूछा कि प्रदर्शन के दौरान सादे कपड़ों में छात्रों पर लाठीचार्ज करते दिखाई देने वाले लोग कौन थे। उन्होंने जानना चाहा कि वे पुलिसकर्मी थे या किसी अन्य एजेंसी अथवा स्वयंसेवक से जुड़े लोग और उनकी तैनाती किसके आदेश पर की गई थी।
'शांतिपूर्ण प्रदर्शन लोकतंत्र का अधिकार'
राहुल गांधी ने अपने पत्र में कहा कि शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शन लोकतंत्र का मूल अधिकार है और सरकार की जिम्मेदारी प्रदर्शनकारियों की सुरक्षा सुनिश्चित करना तथा संवाद के जरिए उनकी समस्याओं का समाधान निकालना है। उन्होंने आरोप लगाया कि छात्रों के साथ हुई कथित हिंसा ने लोकतांत्रिक मूल्यों को आहत किया है और देश के युवा इस मामले में जवाबदेही चाहते हैं।
कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने भी राहुल गांधी का पत्र साझा करते हुए कहा कि गृह मंत्री को संसद में इन सवालों का स्पष्ट जवाब देना चाहिए। उन्होंने कहा कि विपक्ष प्रधानमंत्री से भी छात्रों से माफी मांगने की मांग करेगा।
कांग्रेस ने प्रधान के इस्तीफे को बताया छात्रों की जीत
कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे को छात्रों के संघर्ष की जीत बताया। उन्होंने कहा कि अब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को भी आंदोलन के दौरान हुई घटनाओं पर छात्रों से माफी मांगनी चाहिए और कथित बल प्रयोग के लिए जिम्मेदार लोगों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करनी चाहिए।
राहुल गांधी ने भी प्रधान के इस्तीफे को शिक्षा व्यवस्था में जवाबदेही की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बताते हुए कहा कि यह केवल शुरुआत है और परीक्षा प्रणाली में व्यापक सुधार की जरूरत है।
पेपर लीक कानून में संशोधन पर भी होगी बहस
संसद में सरकार लोक परीक्षा (अनुचित साधनों की रोकथाम) संशोधन विधेयक, 2026 पेश करने की तैयारी में है। प्रस्तावित संशोधन के अनुसार, पेपर लीक या परीक्षा में अनुचित साधनों के इस्तेमाल के मामलों में दोषियों को कम से कम पांच वर्ष और अधिकतम दस वर्ष तक की सजा तथा 50 लाख रुपये तक जुर्माना हो सकता है।
यदि मामला संगठित अपराध से जुड़ा पाया जाता है, तो सात वर्ष से दस वर्ष तक की कैद और 10 करोड़ रुपये तक जुर्माने का प्रावधान किया गया है। वर्तमान कानून में ऐसी घटनाओं के लिए अपेक्षाकृत कम सजा और जुर्माने का प्रावधान है। माना जा रहा है कि इस विधेयक पर संसद में सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच तीखी बहस देखने को मिल सकती है।


