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लोकसभा में दो-तिहाई बहुमत के लक्ष्य पर एनडीए की नजर, टीएमसी के बाद शिवसेना UBT में बगावत की चर्चाएं

लोकसभा में दो-तिहाई बहुमत हासिल करने की कोशिशों के बीच NDA की नजर विपक्षी दलों के सांसदों पर है। टीएमसी के बाद अब शिवसेना UBT में संभावित टूट की चर्चा तेज, छह सांसदों के पाला बदलने की अटकलें।

लोकसभा में दो-तिहाई बहुमत के लक्ष्य पर एनडीए की नजर, टीएमसी के बाद शिवसेना UBT में बगावत की चर्चाएं
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नई दिल्लीकेंद्र की सत्ता में मौजूद राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) लोकसभा में अपनी ताकत बढ़ाने की रणनीति पर तेजी से काम कर रहा है। हाल के दिनों में तृणमूल कांग्रेस (TMC) के भीतर असंतोष और बागी सांसदों के दावों के बाद अब विपक्षी खेमे की एक और प्रमुख पार्टी शिवसेना (यूबीटी) में भी संभावित टूट की चर्चाएं राजनीतिक गलियारों में जोर पकड़ रही हैं। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यदि विपक्षी दलों में यह असंतोष बढ़ता है तो इसका सीधा फायदा NDA को मिल सकता है।

शिवसेना UBT के सांसदों पर टिकी नजर

सूत्रों के अनुसार, उद्धव ठाकरे के नेतृत्व वाली शिवसेना (UBT) के कुछ सांसद पार्टी नेतृत्व से नाराज बताए जा रहे हैं। लोकसभा में इस समय पार्टी के कुल नौ सांसद हैं। राजनीतिक चर्चाओं के मुताबिक, यदि दल-बदल कानून से बचते हुए किसी समूह को अलग होना है तो कम से कम छह सांसदों का एक साथ कदम उठाना जरूरी होगा।

ऐसी स्थिति में माना जा रहा है कि इन सांसदों के लिए महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाली शिवसेना सबसे स्वाभाविक विकल्प बन सकती है। हालांकि अब तक किसी सांसद ने सार्वजनिक रूप से इस तरह की संभावना की पुष्टि नहीं की है।

महाराष्ट्र की राजनीति में बदलते समीकरण

महाराष्ट्र विधानसभा चुनावों के बाद से ही राज्य की राजनीति में लगातार बदलाव देखने को मिले हैं। एकनाथ शिंदे ने संगठन और जनसंपर्क के स्तर पर अपनी पकड़ मजबूत की है। पिछले कुछ वर्षों में शिवसेना के कई नेता और पदाधिकारी ठाकरे गुट छोड़कर शिंदे खेमे में शामिल हो चुके हैं।

राजनीतिक जानकारों का कहना है कि इन घटनाक्रमों के चलते उद्धव ठाकरे के प्रभाव क्षेत्र में कमी आई है। हालांकि मुंबई और आसपास के क्षेत्रों में पार्टी अब भी मजबूत जनाधार बनाए रखने का दावा करती है।

लोकसभा में 360 के आंकड़े पर फोकस

लोकसभा में फिलहाल 540 सदस्य मौजूद हैं, जबकि कुछ सीटें रिक्त हैं। ऐसे में दो-तिहाई बहुमत का आंकड़ा करीब 360 सांसदों के आसपास माना जा रहा है। NDA की रणनीति सदन में अपना संख्याबल बढ़ाकर महत्वपूर्ण विधायी और संवैधानिक मामलों में और अधिक मजबूती हासिल करने की बताई जा रही है।

टीएमसी में भी उठी थीं बगावत की आवाजें

हाल ही में टीएमसी के एक कथित बागी समूह ने दावा किया था कि कई सांसद केंद्र सरकार को समर्थन देने के पक्ष में हैं। हालांकि पार्टी नेतृत्व ने ऐसे दावों को खारिज किया था। इसके बावजूद विपक्षी दलों में संभावित असंतोष और अंदरूनी खींचतान को लेकर चर्चाएं लगातार जारी हैं।

राजनीतिक पर्यवेक्षकों का मानना है कि आने वाले महीनों में संसद और राज्यों की राजनीति में नए समीकरण बन सकते हैं। हालांकि NDA का दो-तिहाई बहुमत हासिल करने का लक्ष्य कितना सफल होगा, यह आने वाले राजनीतिक घटनाक्रमों पर निर्भर करेगा।


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